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पुलिस FIR दर्ज करने से मना करे तो क्या करें? जानिए आपके कानूनी अधिकार

यह ज़रूरी है कि हम अपने कानूनी अधिकारों को जानें और समझें. पुलिस अगर FIR नहीं लिखती, तो इसका मतलब ये नहीं कि इंसाफ का रास्ता बंद हो गया. आज के समय में आपको कई विकल्प मिलते हैं, उच्च अधिकारियों से लेकर कोर्ट, आयोग और ऑनलाइन पोर्टल तक. बस ज़रूरत है हिम्मत रखने की और सही जानकारी के साथ आगे बढ़ने की.

Image Credit: FIR
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FIR Rules: कई बार जब हमारे या हमारे किसी जानने वाले के साथ कोई गलत घटना होती है ,जैसे चोरी, मारपीट, धमकी, या किसी और तरह का अपराध तो हम सबसे पहले पुलिस थाने जाकर FIR (First Information Report) दर्ज करवाने की कोशिश करते हैं. लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि पुलिस FIR लिखने से मना कर देती है. इस स्थिति में बहुत से लोग मायूस होकर वापस लौट आते हैं और सोचते हैं कि अब कुछ नहीं किया जा सकता. लेकिन सच्चाई ये है कि कानून ने आपको ऐसे मौकों के लिए भी कई अधिकार दिए हैं. अगर आपको इनके बारे में जानकारी हो, तो आप आगे की कार्रवाई कर सकते हैं और न्याय पा सकते हैं.

FIR दर्ज करवाना हर नागरिक का अधिकार

कानून के अनुसार, अगर कोई अपराध होता है, तो पीड़ित या उसकी ओर से कोई भी व्यक्ति पुलिस में FIR दर्ज करवा सकता है. यह हर भारतीय नागरिक का अधिकार है कि उसकी शिकायत सुनी जाए और पुलिस उस पर कार्रवाई करे. FIR दर्ज करने से पुलिस उस घटना पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करती है। FIR को लिखित या मौखिक दोनों तरीकों से दर्ज करवाया जा सकता है. अगर आप मौखिक रूप से शिकायत करते हैं, तो पुलिस उसे लिखकर आपको सुनाए और फिर आपसे हस्ताक्षर ले। FIR की एक कॉपी आपको मुफ्त में मिलनी चाहिए.

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अगर थाने में FIR दर्ज नहीं हो रही, तो क्या करें?

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अगर थाने का पुलिस अधिकारी आपकी शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार करता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि मामला वहीं खत्म हो गया. आपके पास कई विकल्प होते हैं:

1. बड़े अफसर को लिखित शिकायत दें

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आप सबसे पहले उस थाना क्षेत्र के डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक) या एसपी (पुलिस अधीक्षक) को एक लिखित शिकायत दे सकते हैं. ये अधिकारी अपने मातहत पुलिसकर्मियों को जांच के आदेश दे सकते हैं और FIR दर्ज करवा सकते हैं.

2. मजिस्ट्रेट के पास जाएं – CrPC धारा 156(3)

अगर पुलिस अफसर भी आपकी सुनवाई न करें, तो आप नजदीकी कोर्ट के मजिस्ट्रेट के पास जा सकते हैं और धारा 156(3) CrPC के तहत FIR दर्ज करवाने की अपील कर सकते हैं. कोर्ट पुलिस को निर्देश देगा कि वह FIR दर्ज करे और जांच शुरू करे.

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3. ऑनलाइन शिकायत करें

आजकल कई राज्यों में पुलिस की ऑनलाइन शिकायत पोर्टल उपलब्ध है, जहां आप घर बैठे अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा पुलिस के हेल्पलाइन नंबर जैसे 100 या महिला हेल्पलाइन 1090 पर भी कॉल करके शिकायत दी जा सकती है.

महिला और मानवाधिकार आयोग तक भी पहुंच संभव

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अगर आपका मामला महिला उत्पीड़न, बच्चों से जुड़ा अपराध या मानवाधिकार हनन से जुड़ा है और पुलिस आपकी मदद नहीं कर रही, तो आप राष्ट्रीय महिला आयोग, राज्य महिला आयोग, या मानवाधिकार आयोग तक भी अपनी शिकायत पहुँचा सकते हैं। ये संस्थाएं ऐसे मामलों पर गंभीरता से ध्यान देती हैं और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश देती हैं.

पुलिस अधिकारी की शिकायत भी की जा सकती है

अगर कोई पुलिस अफसर बार-बार आपकी शिकायत नजरअंदाज कर रहा है, या जानबूझकर FIR दर्ज नहीं कर रहा, तो आप उस अधिकारी की भी शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए आप जा सकते हैं:

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राज्य पुलिस शिकायत प्राधिकरण (State Police Complaint Authority)
मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission)
उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय
इन संस्थानों में आप लिखित रूप से शिकायत करके न्याय की मांग कर सकते हैं.

FIR न लिखने पर हिम्मत न हारें, अपने अधिकार जानें

यह ज़रूरी है कि हम अपने कानूनी अधिकारों को जानें और समझें. पुलिस अगर FIR नहीं लिखती, तो इसका मतलब ये नहीं कि इंसाफ का रास्ता बंद हो गया. आज के समय में आपको कई विकल्प मिलते हैं, उच्च अधिकारियों से लेकर कोर्ट, आयोग और ऑनलाइन पोर्टल तक. बस ज़रूरत है हिम्मत रखने की और सही जानकारी के साथ आगे बढ़ने की.

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