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मनरेगा की जगह ‘VB-G RAM-G’ बिल, सिर्फ नाम नहीं बदलेगा, नियम भी होंगे नए, जानिए कितना होगा फायदा

VB-G RAM-G: अगर यह कानून लागू होता है, तो ग्रामीण रोजगार की पूरी व्यवस्था नए ढांचे में काम करेगी. सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण लोगों को ज्यादा रोजगार, बेहतर भुगतान और आजीविका के नए अवसर देने के लिए किया जा रहा है.

Image Source: Social Media
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VB-G RAM-G Yojana: केंद्र सरकार ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है. मौजूदा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) को खत्म कर उसकी जगह एक नया कानून लाया जा सकता है. इस नए कानून का नाम VB-G RAM-G रखा गया है, जिसका पूरा नाम है विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण).माना जा रहा है कि यह नया विधेयक संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया जा सकता है. अगर यह कानून लागू होता है, तो ग्रामीण रोजगार की पूरी व्यवस्था नए ढांचे में काम करेगी. सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण लोगों को ज्यादा रोजगार, बेहतर भुगतान और आजीविका के नए अवसर देने के लिए किया जा रहा है.

रोजगार की गारंटी के दिन बढ़ेंगे


अभी मनरेगा के तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी है. लेकिन नए VB-G RAM-G कानून में इस सीमा को बढ़ाकर 125 दिन करने की तैयारी है. इससे मजदूरों को ज्यादा दिनों तक काम मिलेगा और उनकी सालाना आमदनी बढ़ सकेगी.
मनरेगा में भले ही “कम से कम 100 दिन” लिखा है, लेकिन हकीकत में सॉफ्टवेयर के कारण यही अधिकतम सीमा बन गई है. 100 दिन से ज्यादा काम के लिए राज्यों को केंद्र से विशेष अनुमति लेनी पड़ती है. नए कानून में इस जटिल प्रक्रिया को आसान करने की बात कही जा रही है.

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अब हर हफ्ते मिलेगी मजदूरी


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नए कानून में मजदूरी भुगतान को लेकर भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है. अभी मनरेगा में भुगतान की समय-सीमा 15 दिन है, लेकिन VB-G RAM-G के तहत मजदूरी हर हफ्ते देने का प्रावधान किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या फिर किसी भी हालत में काम करने की तारीख से 15 दिन के भीतर करना अनिवार्य होगा. अगर भुगतान में देरी होती है, तो मजदूर को मुआवजा देने का नियम पहले की तरह बना रहेगा. इससे मजदूरों को समय पर पैसा मिलेगा और उनकी आर्थिक परेशानी कम होगी.

अब फंडिंग में राज्य सरकारों की भी भागीदारी


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मनरेगा में अब तक बिना कौशल वाले मजदूरों की पूरी मजदूरी केंद्र सरकार देती थी. लेकिन नए कानून में यह व्यवस्था बदल सकती है. VB-G RAM-G के तहत अब राज्य सरकारों को भी मजदूरी का खर्च साझा करना होगा. हालांकि सभी राज्यों पर एक जैसा नियम लागू नहीं होगा. पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और बिना विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों में खर्च का अनुपात 90:10 (केंद्र:राज्य) रहेगा. बाकी राज्यों में यह अनुपात 60:40 तय किया गया है.

तय सीमा से ज्यादा खर्च किया तो राज्य देगा पैसा

नए कानून में हर राज्य के लिए सालाना खर्च की एक तय सीमा होगी. अगर कोई राज्य इस सीमा से ज्यादा खर्च करता है, तो अतिरिक्त पैसा राज्य सरकार को अपने बजट से देना होगा. इससे राज्यों पर वित्तीय जिम्मेदारी बढ़ेगी और खर्च पर नियंत्रण रखा जा सकेगा.

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खेती के मौसम में काम पर ब्रेक


VB-G RAM-G कानून का सबसे बड़ा बदलाव ब्रेक पीरियड को लेकर है. खेती के प्रमुख मौसम, यानी बुवाई से लेकर कटाई तक, रोजगार गारंटी के कामों पर अस्थायी रोक लगाई जा सकती है.
इसका मकसद यह है कि किसान और मजदूर खेतों में काम करें और कृषि गतिविधियों में कोई कमी न आए .यानी खेती के पीक सीजन में मनरेगा जैसे काम नहीं कराए जाएंगे, ताकि मजदूरों की कमी न हो.

ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव


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कुल मिलाकर VB-G RAM-G विधेयक मनरेगा से काफी अलग और व्यापक बदलाव लेकर आ सकता है. इसमें ज्यादा रोजगार के दिन, समय पर भुगतान, राज्य सरकारों की भागीदारी और खेती को प्राथमिकता देने जैसे प्रावधान शामिल हैं.
अगर यह कानून लागू होता है, तो ग्रामीण रोजगार व्यवस्था पूरी तरह नए रूप में सामने आएगी और इसका सीधा असर देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा.
 

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