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YouTube पर अश्लील वीडियो अपलोड करना हुआ अपराध, जानिए जुर्माना और सजा

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स हमें अपनी बात कहने की आज़ादी देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति इनका दुरुपयोग करके अश्लीलता या अनैतिकता को बढ़ावा दे. यूट्यूब पर अश्लील वीडियो डालना सिर्फ चैनल डिलीट कराने तक सीमित नहीं है, यह आपको जेल तक पहुंचा सकता है और भारी जुर्माने का कारण बन सकता है.

Image Credit: YouTube
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YouTube Content: आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और वीडियो प्लेटफॉर्म्स जैसे यूट्यूब आम लोगों की अभिव्यक्ति का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं. लेकिन इस आज़ादी का गलत इस्तेमाल करना न सिर्फ अनैतिक है बल्कि कानूनन गंभीर अपराध भी है. कई लोग जाने-अनजाने में यूट्यूब जैसे पब्लिक प्लेटफॉर्म पर अश्लील या आपत्तिजनक वीडियो अपलोड कर देते हैं, जो उन्हें बड़ी मुश्किल में डाल सकता है. भारत में ऐसे मामलों के लिए आईटी एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत सख्त सज़ाएं तय की गई हैं.

IT एक्ट की धारा 67 के तहत पहली बार में ही सज़ा

भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act), 2000 के जरिए इंटरनेट पर आपत्तिजनक कंटेंट को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट कानून बनाए हैं. IT एक्ट की धारा 67 के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर अश्लील सामग्री पब्लिश करता है, तो यह अपराध माना जाता है.

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इस अपराध में पहली बार दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. यदि वही व्यक्ति दोबारा ऐसा करता है, तो सज़ा और अधिक कड़ी हो जाती है. यह कानून सोशल मीडिया, वेबसाइट, मोबाइल ऐप और यूट्यूब जैसे वीडियो प्लेटफॉर्म पर समान रूप से लागू होता है.

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धारा 67A: यौन स्पष्टता वाले कंटेंट पर और सख्त कार्रवाई

अगर अश्लीलता की प्रकृति और भी गंभीर है, यानी वीडियो में यौन स्पष्टता (sexually explicit content) दिखाई गई है, तो IT एक्ट की धारा 67A लागू होती है. इस धारा के तहत पहली बार ही दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना लग सकता है.

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यह कानून खासतौर पर उन मामलों पर लागू होता है जहां वीडियो या कंटेंट में अश्लीलता के स्तर को जानबूझकर बढ़ाया गया हो या ऐसा कंटेंट सार्वजनिक रूप से शेयर किया गया हो जो समाज की नैतिकता के खिलाफ हो.

IPC की धाराएं भी लगती हैं, बच्चों से जुड़ा मामला और गंभीर

केवल आईटी एक्ट ही नहीं, भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराएं भी ऐसे मामलों में लागू होती हैं. IPC की धारा 292, 293, 294 आदि अश्लील सामग्री के प्रचार-प्रसार से संबंधित हैं. इन धाराओं के तहत दोषी को 2 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.

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अगर अश्लील कंटेंट में नाबालिग बच्चों को टारगेट किया गया हो या उनके सामने ऐसी सामग्री पेश की गई हो, तो यह अपराध बाल यौन शोषण से जुड़े कानून (POCSO Act) के तहत आ जाता है, और सज़ा बेहद कठोर हो सकती है.

यूट्यूब की पॉलिसी: जीरो टॉलरेंस नीति

यूट्यूब जैसी इंटरनेशनल कंपनियों की अपनी कड़ी गाइडलाइंस होती हैं. यूट्यूब साफ तौर पर कहता है कि किसी भी प्रकार का अश्लील, नग्न या यौन कंटेंट प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंधित है. अगर कोई इस तरह का वीडियो अपलोड करता है, तो पहले उसे वार्निंग दी जाती है और वीडियो को डिलीट कर दिया जाता है.

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यदि यूज़र बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है, तो यूट्यूब उसका चैनल परमानेंटली बैन कर देता है. इसके अलावा यदि किसी वीडियो को लेकर कोई यूज़र रिपोर्ट करता है, तो यूट्यूब खुद उसकी जांच करता है और ज़रूरत पड़ने पर कानूनी एजेंसियों के साथ डेटा साझा करता है.

डिजिटल आज़ादी का करें जिम्मेदार इस्तेमाल

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स हमें अपनी बात कहने की आज़ादी देते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति इनका दुरुपयोग करके अश्लीलता या अनैतिकता को बढ़ावा दे. यूट्यूब पर अश्लील वीडियो डालना सिर्फ चैनल डिलीट कराने तक सीमित नहीं है, यह आपको जेल तक पहुंचा सकता है और भारी जुर्माने का कारण बन सकता है.

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