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महिला बनकर लिए योजना के पैसे? अब होगी वसूली और जेल की कार्रवाई

‘लाडकी बहना योजना’ जैसी योजनाएं महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बेहद अहम भूमिका निभा सकती हैं. लेकिन जब उन पर इस तरह का घोटाला होता है, तो यह न केवल सरकारी धन का नुकसान है, बल्कि उन हकदार महिलाओं के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है.

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Ladki Behna Yojana: सरकार की तरफ से जब भी कोई योजना महिलाओं के सशक्तिकरण और आर्थिक सहायता के लिए लाई जाती है, तो उम्मीद होती है कि उसका लाभ सही लोगों तक पहुंचेगा.लेकिन महाराष्ट्र में ‘लाडकी बहना योजना’ को लेकर जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला और चिंता का विषय है. यह योजना वैसे तो गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अब सामने आया है कि 14,000 से ज्यादा पुरुषों ने महिला बनकर इस योजना का फायदा उठा लिया. यह न सिर्फ सरकारी पैसों की लूट है, बल्कि उन असली हकदार महिलाओं के हक पर भी डाका है.

क्या है ‘लाडकी बहना योजना’?

महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2024 में विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले इस योजना की शुरुआत की थी. इसका उद्देश्य राज्य की आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की वित्तीय सहायता देना था. यह राशि 21 से 65 वर्ष की उन महिलाओं को दी जानी थी, जिनकी पारिवारिक आय 2.5 लाख रुपये सालाना से कम है. योजना को महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन के लिए एक अहम कदम माना जा रहा था.

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कैसे हुआ घोटाला, जब पुरुषों ने बनाईं झूठी पहचान

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हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कराए गए एक ऑडिट में इस घोटाले का खुलासा हुआ. रिपोर्ट के मुताबिक, 14,298 पुरुषों ने खुद को महिला बताकर योजना के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया और लगातार कई महीनों तक लाभ उठाया. इसके लिए इन्होंने दस्तावेजों और पहचान पत्रों में हेरफेर की, जिससे सिस्टम को धोखा दिया जा सके. इन फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिए सरकार ने करीब 21.44 करोड़ रुपये की राशि इन पुरुषों के खातों में ट्रांसफर कर दी. यह रकम सीधे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाली है, और इससे यह भी स्पष्ट होता है कि योजना की निगरानी और वेरिफिकेशन प्रक्रिया में बड़ी खामी रही.

अब क्या होगी कार्रवाई? जानिए सरकार का रुख

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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और सख्त कार्रवाई की बात कही है. उनका साफ कहना है कि यह योजना गरीब महिलाओं की मदद के लिए थी, न कि किसी को धोखाधड़ी से फायदा उठाने के लिए. अब सरकार ऐसे सभी लोगों से रकम की वसूली करेगी, जिन्होंने गलत तरीके से योजना का लाभ उठाया है. अगर वे जांच में सहयोग नहीं करते हैं या पैसे वापस नहीं करते, तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इसमें न केवल रिकवरी शामिल होगी, बल्कि जेल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है.यह धोखाधड़ी जालसाजी (cheating), सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़ा, और गलत पहचान के आधार पर लाभ उठाने जैसे अपराधों की श्रेणी में आती है, जिसके लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई धाराएं लगाई जा सकती हैं.

घोटाले से उठे सवाल, निगरानी में कहां चूक गई सरकार?

इस खुलासे ने राज्य सरकार की योजना प्रबंधन और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. यह साफ है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा हुआ और लगभग 10 महीने तक किसी को भनक तक नहीं लगी. यह बताता है कि आवेदन प्रक्रिया में दस्तावेजों की कठोर जांच नहीं हुई, और सिस्टम को बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित तरीके से चलने दिया गया.सरकार को अब इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि भविष्य में कोई भी योजना शुरू करने से पहले डिजिटल वेरिफिकेशन, आधार लिंकिंग और जेंडर ऑथेंटिकेशन जैसे कदमों को और मजबूत किया जाए. 

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 योजना की नीयत सही, लेकिन अमल में भारी चूक

‘लाडकी बहना योजना’ जैसी योजनाएं महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बेहद अहम भूमिका निभा सकती हैं. लेकिन जब उन पर इस तरह का घोटाला होता है, तो यह न केवल सरकारी धन का नुकसान है, बल्कि उन हकदार महिलाओं के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है. 

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