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Census 2025: पिछली जनगणना में पूछे गए थे ये अहम सवाल, अब क्या बदलेगा फॉर्मेट?

जनगणना सिर्फ एक आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ये देश के विकास का रास्ता दिखाने वाली एक बड़ी पहल है. इससे सरकार को देश की असली तस्वीर दिखती है और यह तय करना आसान हो जाता है कि किसको क्या मदद चाहिए. आने वाली जनगणना में हमारी भागीदारी भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हमारी दी गई जानकारी से ही बेहतर भारत की योजना बनती है.

Census 2025: पिछली जनगणना में पूछे गए थे ये अहम सवाल, अब क्या बदलेगा फॉर्मेट?
Image Credit: Census
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Census Form New Format: जनगणना मतलब लोगों की गिनती करना और उनके बारे में ज़रूरी जानकारी इकट्ठा करना. यह एक बहुत ही अहम काम होता है, जिससे सरकार को यह पता चलता है कि देश में कितने लोग रहते हैं, कहां रहते हैं और उनकी ज़रूरतें क्या हैं. जनगणना से ही सरकार को यह समझ आता है कि कहां स्कूल, अस्पताल, सड़क या दूसरी सुविधाएं बनानी चाहिए. भारत में जनगणना हर 10 साल में होती है और यह काम बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है. जनगणना के आंकड़ों के बिना देश की सही प्लानिंग कर पाना मुश्किल हो जाता है.

पिछली जनगणना में क्या-क्या पूछा गया था?

साल 2011 में जो जनगणना हुई थी, उसमें अधिकारी हर घर जाकर लोगों से कई सवाल पूछते थे. जैसे, घर में कितने लोग रहते हैं, किसकी उम्र कितनी है, कौन क्या काम करता है, कौन पढ़ता है, किसकी कितनी पढ़ाई हुई है वगैरह. इसके अलावा ये भी पूछा गया था कि घर पक्का है या कच्चा, पानी आता है या नहीं, टॉयलेट है या नहीं, बिजली है या नहीं. इन सब सवालों से सरकार को यह जानने में मदद मिली कि किस इलाके में कितनी सुविधाएं हैं और कहां-कहां अभी ज़रूरत है.

सरकार को इससे क्या फायदा होता है?

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जब सरकार को ये जानकारी मिलती है कि कहां स्कूल नहीं हैं या कहां पानी की कमी है, तो वो वहां योजनाएं बनाकर उन जगहों को बेहतर बना सकती है. जनगणना का डेटा देखकर यह तय किया जाता है कि कौन-से इलाके में अस्पताल खोलना चाहिए, कहां सड़कों की हालत सुधारनी चाहिए और कहां रोजगार के मौके बढ़ाने चाहिए. यानी जनगणना सिर्फ एक कागज पर जानकारी भरने का काम नहीं है, बल्कि ये देश की तरक्की की नींव होती है.

अगली जनगणना कब होगी?

साल 2021 में अगली जनगणना होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी के कारण यह टाल दी गई. अब सरकार ने तय किया है कि अगली जनगणना साल 2027 में की जाएगी. इस बार जनगणना को पहले से ज्यादा आधुनिक और तेज़ बनाने की तैयारी हो रही है. माना जा रहा है कि इस बार अधिकारी मोबाइल या टैबलेट जैसी डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करेंगे ताकि डेटा जल्दी और सही तरीके से रिकॉर्ड किया जा सके.

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इस बार जनगणना में क्या-क्या नए सवाल हो सकते हैं?

इस बार जनगणना में कुछ नए और ज़रूरी सवाल जुड़ सकते हैं, जैसे:

  • लोग क्या काम करते हैं और उन्हें कितना रोजगार मिलता है?
  • घर में इंटरनेट है या नहीं?
  • लोग किस राज्य या गांव से आकर कहां बस गए हैं? यानी माइग्रेशन से जुड़ी जानकारी।

जलवायु परिवर्तन से उनका जीवन कितना प्रभावित हो रहा है?

पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं जैसे पानी की कमी, प्रदूषण वगैरह पर भी सवाल हो सकते हैं.इन नए सवालों से सरकार को ये समझने में मदद मिलेगी कि बदलते समय में लोगों की ज़रूरतें क्या हैं और किस दिशा में योजनाएं बनानी चाहिए.

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जनगणना सिर्फ एक आंकड़ों की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ये देश के विकास का रास्ता दिखाने वाली एक बड़ी पहल है. इससे सरकार को देश की असली तस्वीर दिखती है और यह तय करना आसान हो जाता है कि किसको क्या मदद चाहिए. आने वाली जनगणना में हमारी भागीदारी भी बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हमारी दी गई जानकारी से ही बेहतर भारत की योजना बनती है.

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