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SEBI: सेबी के इन नियमों से ब्रोकरेज फर्म्स को होगा भारी नुक्सान, देने पड़ेंगे एक्स्ट्रा चार्ज

SEBI: स्टॉक एक्सचेन्जो में एक स्लैब वार स्ट्रक्चर होता है। जहां वे ब्रोकरेज फॉर्म से हाई वॉल्यूम के लेनदेन के लिए कम शुल्क देने होते है। लेकिन ब्रोकरेज फार्मेस इस मासिक परिचालन खर्च को निवेशकों से उच्चतम स्लैब रेट पर लेती है , जिससे उन्हें मुनाफा होता है।

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SEBI: सेबी ने स्टॉक मार्किट में बदलाव किये नए नियम। इन नियमो के बदलाव निवेशकों के लिए तो हित में हो सकते है लेकिन ब्रोकेरग फार्म के लिए बिलकुल भी अच्छी खबर नहीं है। 1 अक्टूबर से लेनदेन पर एक सामान्य शुल्क लगाने का निर्देश दिया गया है।स्टॉक एक्सचेन्जो में एक स्लैब वार स्ट्रक्चर होता है।  जहां वे ब्रोकरेज फॉर्म से हाई वॉल्यूम के लेनदेन के लिए कम शुल्क देने होते है। लेकिन ब्रोकरेज फार्मेस इस मासिक परिचालन खर्च को निवेशकों से उच्चतम स्लैब रेट पर लेती है , जिससे उन्हें मुनाफा होता है।  आइए जानते हे इस खबर को विस्तार से ....

ब्रोकेज फार्म्स को हो सकती है हानि 

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने ब्रोकेज फार्म्स द्वारा अपने कस्टमर बेस का विस्तार करने के लिए उपयोग किये जाने वाले रेफेरल प्रोग्राम्स पर लगाम लगा दी है। इसमें ब्रोकरेज फार्म्स को रेफेरल प्रोत्शाहन का उपयोग करने से रोक लगा दी है। वहीं जब तक इंडिडविजुअल को एक्सचेंज के साथ एक अधिकृत इंडिविजुअल के रूप में रजिस्टर्ड नहीं किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ये है की ट्रेडिंग को कम करना है।  जहा निवेशकों को जोखिम भरी रेफरल एक्टिविटीज या आन्ध्रीकृत निवेश योजना में भाग लेने के लिए बहलाया जा सकता है।इस नए नियम से ब्रोकरेज फार्म्स को काफी प्रभावित कर सकता है।  

बदलाव करने का क्या है रीज़न 

वहीं आपको बात दें, निवेशकों के हितो की रक्षा करने के लिए और स्टॉक मार्किट की धांधलीबाज़ी को रोकने के लिए सेबी ने उठया है कदम। सेबी का कहना है की साल 2024 में लगभग 91 फीसदी F & O ट्रेडर्स ने जोखिम भरे ट्रेडर्स में कुल 75,000 करोड़ो का नुक्सान उठाया है।  वहीं इसके अलावा लिकविदित्य की बाढ़ और खुदरा निवेशकों का उत्साह दुनिया के सबसे महंगे इक्विटी मार्किट के लिए घातक संयोजन बन रहा है।  

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सरकार ने बढ़ाया टैक्स 

सरकार ने बजट में फुटुरेस एन्ड ऑप्शन्स ट्रेडर्स पर सिक्योरिटी ट्रांसजेक्शन टैक्स STT 001 % से बढ़ाकर 002% कर दिया है। यह सभी रूल्स भी 1 अक्टूबर से लागू होंगे। टैक्स ट्रेडर्स पर ज्यादा होने से लेनदेन का पैसा कम हो सकता है। दूसरी तरफ उच्च टैक्स निवेशकों की लाभ सिमा को भी बढ़ाएंगे। जिससे संभावित रूप से उन्हें अधिक जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। 

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