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रेलवे करेगा AI से ट्रेनों की निगरानी, DFCCIL के साथ मिलकर बढ़ाएगा सुरक्षा

भारतीय रेलवे की यह नई पहल सिर्फ एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह भविष्य की रेल सेवाओं की दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी कदम है. AI और मशीन विजन टेक्नोलॉजी से ट्रेनों की निगरानी न केवल अधिक सुरक्षित होगी, बल्कि संभावित खतरों को पहले ही पहचान कर बचाव भी संभव होगा.

रेलवे करेगा AI से ट्रेनों की निगरानी, DFCCIL के साथ मिलकर बढ़ाएगा सुरक्षा
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Indian Railway: भारतीय रेलवे ने अपनी सेवा दक्षता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और रोलिंग स्टॉक यानी ट्रेन के ढांचे के रखरखाव को स्वचालित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत रेलवे ने डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता एक अत्याधुनिक तकनीक "मशीन विजन बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (MVIS)" की स्थापना के लिए किया गया है, जिससे चलती ट्रेनों की निगरानी अब इंसानों की बजाय मशीनों के जरिए की जाएगी.

क्या है MVIS तकनीक और कैसे काम करता है यह सिस्टम

MVIS एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित ऑटोमेटेड सिस्टम है जो ट्रेनों के अंडर-गियर (नीचे के हिस्सों) की हाई-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरें लेता है और उन तस्वीरों का विश्लेषण करके पता लगाता है कि कोई पार्ट लटक रहा है, ढीला है या गायब है. इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी भी गड़बड़ी की रियल टाइम में पहचान करता है और तुरंत अलर्ट भेजता है ताकि तुरंत कार्रवाई की जा सके. यह तकनीक रेलवे के सुरक्षा मानकों को मजबूत करने, मैनुअल इंस्पेक्शन पर निर्भरता को कम करने और संभावित दुर्घटनाओं से बचाव में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

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MoU पर किसने किए हस्ताक्षर और क्या है दायित्व

इस समझौते पर औपचारिक रूप से रेलवे बोर्ड के निदेशक (परियोजना एवं विकास) सुमित कुमार और DFCCIL के जीजीएम (मैकेनिकल) जवाहर लाल ने रेल भवन, नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए. इसके अंतर्गत DFCCIL चार MVIS यूनिट्स की खरीद, आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग का पूरा जिम्मा संभालेगा. यह तकनीक भारतीय रेलवे में पहली बार इस्तेमाल की जा रही है, जो इसे एक ऐतिहासिक कदम बनाता है.

रेलवे सुरक्षा और संचालन में मिलेगा जबरदस्त फायदा

MVIS की मदद से ट्रेन संचालन पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा. इस तकनीक के जरिए नियमित निरीक्षणों की आवश्यकता कम होगी और मानवीय भूलों की संभावना भी घटेगी. साथ ही, तकनीक की वजह से रेलगाड़ियों की समयबद्धता और दक्षता में भी सुधार होगा.

रेल मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह कदम भारतीय रेलवे के डिजिटल परिवर्तन और आधुनिक रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के बड़े लक्ष्य का हिस्सा है. यह पहल भविष्य में और अधिक स्मार्ट, तेज़ और सुरक्षित रेलवे व्यवस्था की नींव रखेगी.

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भर्ती प्रक्रिया में भी तेजी: इस साल 50,000 से अधिक नौकरियां

तकनीकी सुधारों के साथ-साथ रेलवे भर्ती के मोर्चे पर भी तेज़ी से काम कर रहा है. वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में ही रेलवे ने 9,000 से अधिक नियुक्ति पत्र जारी किए हैं. इसके अलावा, रेलवे ने पूरे वर्ष के लिए 50,000 से अधिक नई भर्तियों की तैयारी कर ली है.

रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) लगातार बड़े पैमाने पर परीक्षाएं आयोजित कर रहा है. नवंबर 2024 से अब तक, बोर्ड ने 1.86 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों के लिए कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) आयोजित किए हैं. अब रेलवे उन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रहा है जो तकनीकी रूप से दक्ष हों और डिजिटल युग की जरूरतों को समझते हों. 

भारतीय रेलवे की यह नई पहल सिर्फ एक तकनीकी अपग्रेड नहीं है, बल्कि यह भविष्य की रेल सेवाओं की दिशा में एक ठोस और दूरदर्शी कदम है. AI और मशीन विजन टेक्नोलॉजी से ट्रेनों की निगरानी न केवल अधिक सुरक्षित होगी, बल्कि संभावित खतरों को पहले ही पहचान कर बचाव भी संभव होगा. साथ ही, भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाकर रेलवे युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी दे रहा है. 

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