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RBI: अब ATM से बार-बार कैश निकालना पड़ेगा भारी, जानिए RBI के नए नियम

आज के डिजिटल युग में हमें अपने पैसों का इस्तेमाल भी सोच-समझकर करना होगा. एटीएम एक सुविधा है, लेकिन लिमिट से बाहर जाने पर ये खर्च का कारण भी बन सकती है. RBI और बैंक जो भी नियम बना रहे हैं, उनका मकसद सुरक्षा और पारदर्शिता है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने बैंक के एटीएम नियमों को जानें और उसके अनुसार काम करें.

Image Credit: ATM
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Free Transaction Rules: अगर आप अक्सर एटीएम से पैसे निकालते हैं या बैलेंस चेक करते हैं, तो RBI के नए नियम आपके लिए जानना बेहद ज़रूरी है. रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने देशभर के बैंकों को एक तय सीमा तक ही मुफ्त ट्रांजेक्शन (Free Transactions) की अनुमति दी है. अब मेट्रो शहरों में हर महीने केवल 3 बार और नॉन-मेट्रो शहरों में 5 बार ही मुफ्त एटीएम ट्रांजेक्शन की सुविधा मिलती है. इसके बाद हर बार एटीएम इस्तेमाल करने पर बैंक आपसे पैसे चार्ज कर सकता है.

कौन से ट्रांजेक्शन होते हैं “फ्री” लिमिट में शामिल?

फ्री लिमिट में सिर्फ पैसे निकालना (Cash Withdrawal) ही नहीं आता, बल्कि और भी कई काम शामिल होते हैं. जैसे कि:

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  • बैलेंस चेक करना (Balance Inquiry)
  • एटीएम पिन बदलना (PIN Change)
  • मिनी स्टेटमेंट निकालना
  • अन्य नॉन-फाइनेंशियल सेवाएं
  • यानि कि चाहे आप पैसे निकालें या सिर्फ बैलेंस देखें, वो सब ट्रांजेक्शन काउंट होते हैं. इस फ्री लिमिट को पार करने पर बैंक हर बार शुल्क वसूल सकता है.

लिमिट पार होने पर कितना लगेगा चार्ज?

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अगर आपकी फ्री लिमिट खत्म हो जाती है तो बैंक 23 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन तक का चार्ज ले सकता है, और इस पर GST अलग से जुड़ता है. कुछ बैंकों के चार्जेस इस प्रकार हैं:

PNB (पंजाब नेशनल बैंक):

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फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन – ₹23
नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन – ₹11

HDFC बैंक:

फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल दोनों पर ₹23
IndusInd बैंक ने भी इसी तरह के चार्ज लागू किए हैं

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जबकि SBI (भारतीय स्टेट बैंक) अभी भी पुराने चार्जेस ही ले रहा है
इसलिए, अपने बैंक की पॉलिसी जरूर जान लें.

कैश जमा और कैश रिसाइक्लर मशीन का इस्तेमाल

आजकल बहुत से बैंक कैश रिसाइक्लर मशीन (CRM) के जरिए कैश जमा करने की सुविधा देते हैं. अधिकतर मामलों में, कैश जमा करना फ्री होता है, लेकिन अगर आप बहुत बार या बड़ी रकम निकालते हैं, तो लिमिट से ज़्यादा होने पर उस पर भी चार्ज लग सकता है.

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भारत में कैश ट्रांजेक्शन पर भी हैं सख्त नियम

सिर्फ एटीएम से जुड़ी लिमिट ही नहीं, भारत सरकार ने कैश लेन-देन (Cash Transactions) पर भी सख्ती की है. अगर आप किसी साल में ₹20 लाख या उससे ज्यादा की कैश निकासी या जमा करते हैं, तो आपको PAN नंबर या आधार कार्ड देना जरूरी होता है. इसका मकसद है बैंकिंग सिस्टम में पारदर्शिता लाना और काले धन पर रोक लगाना.

कैसे बचें एक्स्ट्रा एटीएम चार्जेस से?

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अब सवाल ये है कि हम इन चार्जेस से बचें कैसे? तो इसका आसान जवाब है:

  • अपने ही बैंक के एटीएम का इस्तेमाल करें, जहां ज़्यादातर ट्रांजेक्शन फ्री होते हैं
  • बेवजह एटीएम जाकर बैलेंस ना चेक करें, इसकी जगह मोबाइल ऐप या नेट बैंकिंग से देखें
  • डिजिटल पेमेंट जैसे UPI, नेट बैंकिंग, QR स्कैन आदि का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें
  • हर महीने आपने कितने ट्रांजेक्शन किए हैं, इसे ट्रैक करते रहें ताकि लिमिट पार ना हो

 समझदारी से करें एटीएम का इस्तेमाल

आज के डिजिटल युग में हमें अपने पैसों का इस्तेमाल भी सोच-समझकर करना होगा. एटीएम एक सुविधा है, लेकिन लिमिट से बाहर जाने पर ये खर्च का कारण भी बन सकती है. RBI और बैंक जो भी नियम बना रहे हैं, उनका मकसद सुरक्षा और पारदर्शिता है. इसलिए जरूरी है कि आप अपने बैंक के एटीएम नियमों को जानें और उसके अनुसार काम करें.

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