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मकान मालिकों की मनमानी पर रोक, अब तय समय से ज्यादा सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं!
Rent Agreement: सबसे बड़ी समस्या यह है कि मकान मालिक अक्सर अपनी मनमर्जी से सिक्योरिटी मनी और किराया तय कर देते हैं. कभी-कभी वे 5–6 महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग लेते हैं. कभी-कभी बिना बताए ही किराया बढ़ा देते हैं. इससे किराएदारों को काफी परेशानी होती है. लेकिन अब यह चीज़ें बदलने वाली हैं.
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Rent Agreement New Rules: देश में बहुत से लोग ऐसे हैं जिनके पास अपना खुद का घर नहीं होता.. उन्हें घर रहने के लिए किसी और के मकान में किराया देना पड़ता है. इसके अलावा, कुछ लोग अपने काम या पढ़ाई की वजह से दूसरे शहर में भी रहते हैं, वहां भी उन्हें किराए के घर में ही रहना पड़ता है. लेकिन किराए पर रहने वाले लोगों के लिए कई समस्याएं होती हैं.
सबसे बड़ी समस्या यह है कि मकान मालिक अक्सर अपनी मनमर्जी से सिक्योरिटी मनी और किराया तय कर देते हैं. कभी-कभी वे 5–6 महीने का सिक्योरिटी डिपॉजिट मांग लेते हैं. कभी-कभी बिना बताए ही किराया बढ़ा देते हैं. इससे किराएदारों को काफी परेशानी होती है. लेकिन अब यह चीज़ें बदलने वाली हैं. सरकार ने नए नियम बना दिए हैं, जिससे मकान मालिक अपनी मनमर्जी से सिक्योरिटी या किराया तय नहीं कर पाएंगे.
सिक्योरिटी डिपॉजिट में अब मनमानी नहीं
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पहले मकान मालिक सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर मनमानी रकम वसूलते थे. इसे रोकने के लिए सरकार ने Model Tenancy Act को पूरे देश में लागू करने की योजना बनाई है. नए नियमों (Rent Rules 2025) के अनुसार अब सिक्योरिटी डिपॉजिट की एक सीमा तय होगी. इसके अलावा, किराया बिना वजह बढ़ाया नहीं जा सकेगा और कोई भी किराएदार अचानक घर से नहीं निकाला जा सकेगा.
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अब नए नियमों के मुताबिक, रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी के लिए अधिकतम 2 महीने का किराया ही सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में लिया जा सकता है. वहीं, दुकान या ऑफिस जैसी कमर्शियल जगहों के लिए यह सीमा 6 महीने तय की गई है. इससे किराएदारों पर अचानक बड़ी रकम जमा करने का दबाव कम होगा और लोग आसानी से घर किराए पर ले पाएंगे.
अब बिना लिखित एग्रीमेंट घर नहीं मिलेगा
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Model Tenancy Act के लागू होने के बाद अब किराए का लिखित एग्रीमेंट होना जरूरी हो गया है.इसमें साफ-साफ लिखा होगा कि किराया कितना है, उसकी बढ़ोतरी कितनी होगी, मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है, नोटिस पीरियड कितना है और रेंट की अवधि कितनी है. इसके अलावा, यह एग्रीमेंट बनने के 60 दिन के अंदर रेंट अथॉरिटी में जमा करना भी जरूरी होगा.
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राज्यों को एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाना होगा, जहां यह एग्रीमेंट डिजिटल रूप में रजिस्टर किया जाएगा. यह रिकॉर्ड कानून के हिसाब से सही माना जाएगा और अगर बाद में कोई विवाद हुआ, तो यही सबूत के तौर पर काम करेगा. इससे मकान मालिक और किराएदार दोनों को पारदर्शिता मिलेगी और कोई भी पक्ष अपनी मनमर्जी से शर्तें नहीं बदल पाएगा.