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मोदी सरकार की बड़ी पहल, गांवों के विकास में AI की एंट्री; PMAY-G में फर्जीवाड़े पर लगेगी सख्त लगाम

केंद्र सरकार अब प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में डिजिटल सर्वे और AI तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। ऐप से ली गई घर की फोटो को AI सिस्टम जांचता है, जिसमें लोकेशन, समय, फेस ऑथेंटिकेशन और आई-ब्लिंक डिटेक्शन शामिल हैं.

Source: PMAY-G
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केंद्र सरकार ने ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है. अब प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण यानी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में कागजी सर्वे की जगह डिजिटल सर्वे और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि योजना का लाभ सही और जरूरतमंद लोगों तक ही पहुंचे.

पहले लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन के लिए कागजों पर आधारित प्रक्रिया अपनाई जाती थी, जिसमें गड़बड़ी और देरी की शिकायतें आती थीं. अब मोबाइल ऐप के जरिए घर की फोटो ली जाती है. इस फोटो के साथ स्थान और समय की जानकारी अपने आप जुड़ जाती है. इससे यह साबित करना आसान हो जाता है कि घर वास्तव में उसी जगह पर है, जहां दावा किया गया है.

AI कैसे करता है जांच?

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सरकार के मुताबिक, ली गई तस्वीरों को AI सिस्टम जांचता है. यह सिस्टम यह पहचानने में सक्षम है कि तस्वीर असली है या उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ की गई है. इसमें फेस ऑथेंटिकेशन और आई-ब्लिंक डिटेक्शन जैसे फीचर जोड़े गए हैं. इससे यह सुनिश्चित होता है कि योजना का लाभ वही व्यक्ति ले रहा है, जिसका नाम सूची में दर्ज है. इस डिजिटल व्यवस्था से फर्जी दावों पर काफी हद तक रोक लगी है. साथ ही लाभार्थियों की पहचान की प्रक्रिया पहले से तेज और पारदर्शी बनी है. अब अधिकारियों के लिए यह ट्रैक करना आसान हो गया है कि स्वीकृत धनराशि सही व्यक्ति तक पहुंच रही है या नहीं.

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पंचायतों में भी तकनीकी सुधार

AI का उपयोग केवल आवास योजना तक सीमित नहीं है. ग्राम पंचायतों के कामकाज में भी नई तकनीक लाई जा रही है. डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डेटा विश्लेषण के जरिए योजनाओं के क्रियान्वयन पर नजर रखी जा रही है. जानकारों का मानना है कि तकनीक के इस इस्तेमाल से न सिर्फ भ्रष्टाचार कम होगा, बल्कि ग्रामीण विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी. सरकार का लक्ष्य साफ है, पारदर्शिता, जवाबदेही और समय पर लाभ वितरण.

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बताते चलें कि ग्रामीण भारत में डिजिटल बदलाव की यह पहल आने वाले समय में विकास की नई तस्वीर पेश कर सकती है. अगर तकनीक का यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य सरकारी योजनाओं में भी इसे बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार घटेगा और गांवों तक विकास की रफ्तार और तेज होगी.

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