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दिल्ली में नए साल पर अगर इस उम्र के लोगों ने खरीदी शराब, तो खानी पड़ सकती है जेल की हवा, जारी हुए नए नियम

Liquor Rules: दिल्ली को पीने - पिलाने और जाम छलकाने वाला शहर भी कहा जाता है।तभी बड़ी संख्या में होटल , क्लब ,बार और रेस्त्रां है , जहा लोग पार्टी करने जाते है। लेकिन अब ऐसे लोगो को एक सावधानी रखनी होगी।

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Liquor Rules: आज कल के युवा में शारब पीने का चलन बहुत ही ज्यादा देखा जा रहा है।शोक शोक में शुरू की गई चीज एक समय के बाद लत बन जाती है। एक तरफ दिल्ली को पीने - पिलाने और जाम छलकाने वाला शहर भी कहा जाता है।तभी बड़ी संख्या में होटल , क्लब ,बार और रेस्त्रां है , जहा लोग पार्टी करने जाते है।  लेकिन अब ऐसे लोगो को एक सावधानी रखनी होगी।  क्योकि दिल्ली सरकार ने राजधानी के होटलो, क्लब, बार और रेस्त्रां मालिकों को निर्देश दिया है की वे शराब परोसना से पहले ग्रहको की उम्र को वेरफिफाई जरूर कर लें। उम्र की जांच सरकारी पहचान पत्र के हार्ड कॉपी से करें। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से .....

सरकार ने करवाया निरक्षण

हाल ही में दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग की टीम ने कई जगहों का निरक्षण किया और इस दौरान उन्होंने पाया की बड़ी संख्या में बार , क्लब में ऐसे लोग है जो 25 साल से कम उम्र के है और शराब पी रहे है।  कुछ लोग ऐसे भी मिले है जो शराब पी रहे थे और दिखावा कर रहे थे की उन्होंने 25 साल पुरे कर लिए है।दिल्ली सरकार के अफसरों का कहना है की इस तरह की भी शिकायत मिली है शराब परोसने का लाइसेंस रखने वाले लोग अंडरएज वालो को भी शराब दे रहे है।दिल्ली आबकारी अधिनियम 2009 के तहत कोई भी व्यक्ति लाइसेंसधारी , उसका कर्मचारी या ऐजन्ट 25 साल के उम्र के किसी भी व्यक्ति को शराब नहीं परोस सकते है। 

नियम न मानने वालो पर होगी कार्यवाही

नियमो का उल्घंन होने पर आभकारी विभाग ने सभी होटलों, क्लब लाइसेंसधारी निर्देश दिया है की वे 25 साल के कम उम्र के व्यक्ति को शराब परोसने से पहले उसकी जांच जरूर करें। इसलिए लिए केवल सरकारी पहचान पत्र की हार्ड कॉपी का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है , ताकि फर्जी या बदली गई डिजिटल आईडी का उपयोग न हो।  शराब परोसने के लिए तय क़ानूनी उम्र का उल्ल्घन करने पर दिल्ली आबकारी अधिनियम 2009 के तहत कार्यवाही की जायेगी। बताना होगा की दिल्ली में शराब पीने की क़ानूनी उम्र एनसीआर के नॉएडा , गुरुग्राम , गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरो की तुलना में अधिक है।  2021 -2022 के आबकारी निति के तहत इसे 21 वर्ष करने का प्रस्ताव था।  लेकिन ये निति और नियम उल्ल्घन करने के आरोपों के कारन रद्द कर दी गई थी।  

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