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गृह मंत्रालय की नई पहल e-Zero FIR… अमित शाह बोले- इससे तेजी से पकड़े जा सकेंगे साइबर अपराधी

ई-जीरो एफआईआर की यह पहल साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत कदम है. यह न केवल अपराधियों तक तेजी से पहुंचने में मदद करेगी, बल्कि पीड़ितों को भी जल्द न्याय और मुआवजा दिलाने में सहायक साबित होगी.

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E- Zero FIR: भारत सरकार ने साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण पाने और पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए एक बड़ी पहल की है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में जानकारी दी कि गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने ‘ई-जीरो एफआईआर’ नाम से एक नई प्रणाली की शुरुआत की है. फिलहाल यह सिस्टम दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया गया है, जिसे बाद में पूरे देश में विस्तार देने की योजना है.

क्या है ई-जीरो एफआईआर सिस्टम?

यह प्रणाली साइबर वित्तीय अपराधों की रिपोर्टिंग और उस पर त्वरित कार्रवाई को सरल और तेज बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है. अब यदि किसी व्यक्ति को 10 लाख रुपये से अधिक की साइबर धोखाधड़ी का सामना करना पड़ता है और वह राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) या साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करता है, तो यह शिकायत अपने-आप ई-क्राइम पुलिस स्टेशन दिल्ली में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज हो जाएगी.

तीन दिन में एफआईआर को करें नियमित

शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित व्यक्ति को तीन दिन के भीतर नजदीकी साइबर थाने में जाकर इस जीरो एफआईआर को नियमित एफआईआर में बदलवाना होगा. इससे न केवल कार्रवाई तेज़ होगी, बल्कि पीड़ित को उसके नुकसान की भरपाई कराने में भी आसानी होगी.

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तीन सिस्टमों का समन्वय

इस पूरी प्रक्रिया में तीन बड़े सिस्टम को आपस में जोड़ा गया है:

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I4C का NCRP सिस्टम

दिल्ली पुलिस का ई-एफआईआर सिस्टम

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राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का CCTNS नेटवर्क

इस समन्वय के चलते अब साइबर अपराध की शिकायतों को सीधे एफआईआर में बदला जा सकेगा, जिससे जांच प्रक्रिया में तेजी आएगी.

कानूनी आधार और भविष्य की योजना

इस पहल को नए आपराधिक कानून, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 173(1) और 1(ii) के प्रावधानों के तहत लागू किया गया है. ई-एफआईआर प्रक्रिया को क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र की बाध्यता से मुक्त किया गया है, यानी कोई भी व्यक्ति दिल्ली में रहते हुए भी किसी और राज्य की घटना के लिए एफआईआर दर्ज करा सकता है.यह नई व्यवस्था शुरुआत में दिल्ली तक सीमित है, लेकिन जल्द ही इसे अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा.

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ई-जीरो एफआईआर की यह पहल साइबर अपराध के खिलाफ लड़ाई में एक मजबूत कदम है. यह न केवल अपराधियों तक तेजी से पहुंचने में मदद करेगी, बल्कि पीड़ितों को भी जल्द न्याय और मुआवजा दिलाने में सहायक साबित होगी. मोदी सरकार के ‘साइबर सुरक्षित भारत’ के विजन की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है.

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