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हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम रिजेक्ट हो जाए? घबराएं नहीं, ऐसे करें शिकायत और पाएं समाधान!

इसमें आपको अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च, सर्जरी का खर्च, दवाइयों का बिल, एंबुलेंस का किराया और कुछ मामलों में डे-केयर ट्रीटमेंट (जो 24 घंटे से कम में हो जाता है) का खर्च भी मिलता है. कुछ पॉलिसियां कैशलेस इलाज की सुविधा देती हैं, जिससे आपको जेब से पैसे देने की ज़रूरत नहीं पड़ती, बीमा कंपनी सीधे अस्पताल का भुगतान करती है.

Image Credit: Claim
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Health Insurance: हेल्थ इंश्योरेंस एक तरह की बीमा पॉलिसी होती है जो आपके इलाज से जुड़े खर्चों को कवर करती है. जैसे-जैसे इलाज महंगा होता जा रहा है, वैसे-वैसे हेल्थ इंश्योरेंस की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है. इसमें आपको अस्पताल में भर्ती होने पर खर्च, सर्जरी का खर्च, दवाइयों का बिल, एंबुलेंस का किराया और कुछ मामलों में डे-केयर ट्रीटमेंट (जो 24 घंटे से कम में हो जाता है) का खर्च भी मिलता है. कुछ पॉलिसियां कैशलेस इलाज की सुविधा देती हैं, जिससे आपको जेब से पैसे देने की ज़रूरत नहीं पड़ती, बीमा कंपनी सीधे अस्पताल का भुगतान करती है.

हेल्थ इंश्योरेंस रखने वाले व्यक्ति के अधिकार क्या हैं?

हेल्थ इंश्योरेंस सिर्फ एक कागज़ नहीं है, बल्कि ये एक कानूनी समझौता होता है बीमा कंपनी और आपके बीच. इस समझौते के तहत आपको इलाज के समय कुछ अधिकार मिलते हैं. जैसे, इलाज के समय पारदर्शी जानकारी देना, क्लेम सही समय पर और बिना भेदभाव के निपटाना, क्लेम रिजेक्ट होने पर वजह बताना आदि. अगर बीमा कंपनी इन बातों का पालन नहीं करती है, तो आपके पास शिकायत करने का पूरा हक होता है.

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अब 24 घंटे भर्ती होना जरूरी नहीं!

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पहले बीमा कंपनियां सिर्फ तभी क्लेम पास करती थीं जब मरीज कम से कम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहा हो. लेकिन अब जमाना बदल गया है. अब बहुत सारे इलाज सिर्फ कुछ घंटों में हो जाते हैं, जिन्हें "डे-केयर ट्रीटमेंट" कहा जाता है,जैसे कि आंख का ऑपरेशन, डायलिसिस या कीमोथेरेपी. इनका खर्च भी अब हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल किया जाता है. यानी अब छोटी लेकिन जरूरी सर्जरी के लिए भी आप क्लेम कर सकते हैं.

क्लेम करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

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जब भी आप हेल्थ इंश्योरेंस का क्लेम करें, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले तो इलाज डॉक्टर द्वारा जरूरी बताया गया हो और वह आपकी पॉलिसी में कवर हो. मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया हो (या फिर डे-केयर ट्रीटमेंट हो). इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज जैसे कि डॉक्टर की रिपोर्ट, बिल, डिस्चार्ज समरी, लैब टेस्ट आदि संभाल कर रखें. अगर आप नेटवर्क अस्पताल में इलाज करा रहे हैं, तो कैशलेस क्लेम का विकल्प लें. नहीं तो रीइम्बर्समेंट का तरीका अपनाएं जिसमें आपको पहले खर्च करना पड़ेगा और बाद में सभी डॉक्यूमेंट जमा कर पैसे वापस लेने होंगे. साथ ही, अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी बीमा कंपनी या TPA (थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर) को समय पर जरूर दें.

क्लेम रिजेक्ट क्यों होता है और इससे कैसे बचें?

कई बार बीमा कंपनियां क्लेम को रिजेक्ट कर देती हैं, और इसकी वजह हम खुद भी हो सकते हैं. जैसे अगर आपने गलत जानकारी दी, या इलाज पॉलिसी में कवर नहीं था, या डॉक्यूमेंट समय पर नहीं दिए, तो क्लेम रिजेक्ट हो सकता है. इसलिए हमेशा पॉलिसी के नियम ध्यान से पढ़ें और सही जानकारी दें. इलाज से जुड़े सारे दस्तावेज संभाल कर रखें और समय पर जमा करें.

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अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो क्या करें?

अगर आपका क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है. सबसे पहले बीमा कंपनी के Grievance Cell में लिखित शिकायत करें. अगर वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिले, तो IRDAI (इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की वेबसाइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं. इसके बाद भी समस्या न सुलझे तो आप Insurance Ombudsman के पास जा सकते हैं, जो बिना किसी फीस के फैसला सुनाते हैं. जरूरत पड़े तो Consumer Court में केस दर्ज करें. अगर आप आर्थिक रूप से कमजोर हैं, तो NALSA या SLSA जैसी संस्थाएं आपको मुफ्त में कानूनी सहायता भी देती हैं.

क्या हेल्थ इंश्योरेंस में OPD खर्च भी कवर होता है?

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अधिकतर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में सिर्फ अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाला खर्च ही कवर होता है. यानी डॉक्टर की फीस, ब्लड टेस्ट, X-Ray या दवाइयों का खर्च (जो आप बिना भर्ती हुए उठाते हैं) इसे OPD खर्च कहा जाता है वो आम तौर पर कवर नहीं होता. लेकिन अब कुछ खास पॉलिसियों या ऐड-ऑन कवर में OPD खर्च भी शामिल किया जा रहा है. इसलिए जब आप पॉलिसी लें, तो जरूर चेक करें कि उसमें OPD कवर है या नहीं.

कैशलेस और रीइम्बर्समेंट में क्या फर्क है?

  • हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम के दो तरीके होते हैं,  कैशलेस और रीइम्बर्समेंट.
  • कैशलेस क्लेम का मतलब होता है कि अगर आपने नेटवर्क अस्पताल में इलाज कराया है, तो बीमा कंपनी सीधे अस्पताल का बिल चुकाएगी और आपको पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे.
  • रीइम्बर्समेंट क्लेम में पहले आपको पूरा खर्च खुद करना होगा, फिर इलाज के बाद सारे दस्तावेज बीमा कंपनी को देने होंगे, और उसके बाद आपको पैसा वापस मिलेगा.
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