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दिल्ली में प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवाना हुआ महंगा: जानिए नई दरें और क्यों बढ़ी फीस
परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने इस बढ़ोतरी की जानकारी दी और बताया कि यह कदम प्रदूषण जांच केंद्रों की कार्यक्षमता बनाए रखने और गुणवत्ता सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक था.
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Pollution Certificate: दिल्ली सरकार ने लगभग 13 वर्षों के बाद प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) शुल्क में वृद्धि की है. यह निर्णय दिल्ली पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन की लंबित मांगों और प्रदूषण जांच सेवाओं की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने इस बढ़ोतरी की जानकारी दी और बताया कि यह कदम प्रदूषण जांच केंद्रों की कार्यक्षमता बनाए रखने और गुणवत्ता सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक था.
नई PUC शुल्क दरें
दिल्ली में लागू नई PUC शुल्क दरें इस प्रकार हैं:
1. पेट्रोल, CNG या LPG से चलने वाले दोपहिया और तिपहिया वाहन: ₹80
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2.पेट्रोल, CNG या LPG से चलने वाले चार पहिया और उससे ऊपर के वाहन: ₹110
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3. डीजल से चलने वाले वाहन: ₹140
4. यह वृद्धि ₹20 से ₹40 तक है, जो पहले की दरों से अधिक है.
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PUC प्रमाणपत्र की वैधता और जुर्माना
PUC प्रमाणपत्र की वैधता वाहन के प्रकार और मानकों पर निर्भर करती है:
1. नए वाहन: पहले वर्ष में एक बार PUC जांच आवश्यक है.
2. BS-IV मानक वाले चार पहिया वाहन: PUC प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष होती है.
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3. अन्य वाहन: PUC प्रमाणपत्र की वैधता तीन महीने होती है.
4. यदि वाहन के पास वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं है, तो मोटर वाहन अधिनियम के तहत ₹10,000 तक का जुर्माना हो सकता है.
PUC जांच प्रक्रिया
PUC जांच प्रक्रिया में वाहन के उत्सर्जन स्तर की जांच की जाती है. यह प्रक्रिया वाहन के इंजन और ईंधन प्रकार के आधार पर निर्धारित मानकों के अनुरूप होती है. जांच के बाद, यदि वाहन मानकों पर खरा उतरता है, तो PUC प्रमाणपत्र जारी किया जाता है.
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बदलाव का उद्देश्य
यह शुल्क वृद्धि प्रदूषण जांच केंद्रों की संचालन लागत को कवर करने और गुणवत्ता सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक थी. सरकार का उद्देश्य सभी वाहनों को निर्धारित प्रदूषण मानकों का पालन सुनिश्चित करना है, ताकि दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार हो सके.
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दिल्ली में PUC शुल्क में वृद्धि वाहन मालिकों के लिए एक अतिरिक्त खर्च हो सकता है, लेकिन यह कदम प्रदूषण नियंत्रण और वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण है. वाहन मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर PUC जांच कराएं और वैध प्रमाणपत्र बनाए रखें, ताकि जुर्माना से बच सकें और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकें.