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अब वोटर लिस्ट से नाम हटाना नहीं होगा आसान... आरोप के बाद एक्शन में EC, लॉन्च किया ई-साइन सिस्टम, जानिए कैसे होगा वेरिफिकेशन
चुनाव आयोग ने E-Sign तकनीक का इस्तेमाल करना शुरु किया है. जिसके जरिए वोटर्स को रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने या सुधार के लिए आवेदन करते वक्त अपने आधार से जुड़े फोन नंबर का उपयोग करके अपनी पहचान को सत्यापित करना होगा. इससे मतदाता पहचान के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा.
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बिहार विधानसभा चुनाव से पहले SIR को लेकर खूब बवाल मचा. वोटर लिस्ट से नाम काटने पर उठे विवाद को खत्म करने का फॉर्मूला चुनाव आयोग ने निकाल लिया है. आयोग ने एक नई तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू किया है. इस तकनीकी सुविधा से मतदाता पहचान के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा.
अब E-Sign तकनीक के जरिए इस समस्या का निपटारा किया जाएगा. निर्वाचन आयोग की तरफ से आयोग के ECINet पोर्टल और ऐप पर एक नए 'E-Sign' फीचर की पेशकश की गई है. जिसके जरिए वोटर्स को रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने या सुधार के लिए आवेदन करते वक्त अपने आधार से जुड़े फोन नंबर का उपयोग करके अपनी पहचान को सत्यापित करना होगा. पहले आवेदक बिना किसी सत्यापन के फॉर्म जमा कर सकते थे, जिससे पहचान के दुरुपयोग का खतरा था. लेकिन E-Sign तकनीक इस दुरुपयोग को रोकने में सक्षम होगा.
कैसे काम करेगा ये E-Sign तकनीक?
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इस नए सिस्टम के शुरू होने के बाद, जब कोई व्यक्ति ECINet पोर्टल पर फॉर्म 6 (नए रजिस्ट्रेशन के लिए), फॉर्म 7 (नाम हटाने के लिए), या फॉर्म 8 (सुधार के लिए) भरता है, तो उसे 'E-Sign' की जरूरत को पूरा करना होगा. जिसके बाद ये पोर्टल आवेदक को यह सुनिश्चित करने के लिए सचेतकरेगा कि मतदाता कार्ड और आधार कार्ड पर नाम समान हो और आधार व मोबाइल नंबर आपस में लिंक हों. इसके बाद, आवेदक को एक बाहरी E-Sign पोर्टल पर निर्देशित किया जाएगा, जहां उसे अपना आधार नंबर दर्ज करना होगा. जिसके बाद OTP काम आएगा. एक 'आधार OTP' उस फोन नंबर पर भेजा जाएगा जो आधार से जुड़ा हुआ है. OTP दर्ज करने और सहमति देने के बाद ही वेरिफिकेशन पूरा होगा. इस प्रकिया को पूरी करने के बाद आवेदक को फॉर्म जमा करने के लिए वापस ECINet पोर्टल पर भेजा जाता है. यह प्रक्रिया फर्जी आवेदनों को रोकने में मदद करेगी.
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चुनाव आयोग ने क्यों किया यह बदलाव?
दरअसल कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 18 सितंबर को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मतदाता सूची में कथित फर्जीवाड़े को लेकर नया दावा किया था. उन्होंने कर्नाटक के आलंद निर्वाचन क्षेत्र का उदाहरण देते हुए आरोप लगाए कि इस क्षेत्र में 6,018 मतदाताओं को वोट डिलीट किए गए.
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राहुल ने कहा, हमें नहीं पता कि 2023 के चुनाव में आलंद में कुल कितने वोट हटाए गए। संभवतः यह संख्या 6,018 से कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा, सभी जानकारी, जिसमें आपत्तिकर्ता का नाम, फॉर्स 7 का रेफरेंस नंबर, ईपीआईसी नंबर, फॉर्म भरने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर कलबुर्गी के एसपी को सौंप दी गई है। इसी को देखते हुए चुनाव आयोग ने इस नए E-Sign के इस्तेमाल करने की बात कही है.