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उत्तराखंड में राशन पाने के लिए जरूरी हुई e-KYC : सरकार का सख्त फैसला, प्रक्रिया पूरी न करने वालों को नहीं मिलेगा राशन

उत्तराखंड सरकार ने राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए e-KYC को अनिवार्य कर दिया है. अब जिन लाभार्थियों की e-KYC पूरी नहीं होगी, उन्हें राशन से वंचित होना पड़ सकता है. सरकार का लक्ष्य है कि फर्जी और डुप्लीकेट राशन कार्ड पर रोक लगाई जाए और असली हकदारों तक ही लाभ पहुंच सके.

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उत्तराखंड सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया को अनिवार्य कर दिया है. 15 अक्टूबर 2025 से शुरू हुई इस पहल के तहत यदि कोई लाभार्थी निर्धारित समय के भीतर अपना आधार कार्ड लिंकिंग और ई-केवाईसी पूर्ण नहीं करता है, तो उसके राशन कार्ड को अस्थायी रूप से निष्क्रिय कर दिया जाएगा. इसका मतलब होगा कि गेहूं, चावल और अन्य सब्सिडी वाले अनाजों से वंचित रहना पड़ेगा.

यह कदम धोखाधड़ी रोकने, डुप्लिकेट कार्डों को हटाने और केवल पात्र लाभार्थियों तक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है. राज्य सरकार ने सभी जिलों में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई भी परिवार इस सुविधा से वंचित न रहे.

ई-केवाईसी का महत्व

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ई-केवाईसी प्रक्रिया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत अनिवार्य है, जो हर पांच वर्ष में एक बार की जाती है. केंद्र सरकार के 22 जुलाई 2025 के अधिसूचना के अनुसार, यह प्रक्रिया आधार-आधारित प्रमाणीकरण पर आधारित है. उत्तराखंड में लगभग 20 लाख से अधिक राशन कार्ड धारक हैं, जिनमें से कई अभी तक इस प्रक्रिया से गुजर चुके हैं. सरकार का कहना है कि ई-केवाईसी से 'वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना को मजबूती मिलेगी, जिससे लाभार्थी किसी भी राज्य में राशन प्राप्त कर सकेंगे. यदि प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती, तो सब्सिडी वाले अनाजों का वितरण तत्काल रोक दिया जाएगा. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य स्तर पर डेटाबेस की तुलना कर अयोग्य लाभार्थियों को हटाया जाएगा.

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समय सीमा और सख्ती

उत्तराखंड में ई-केवाईसी की समय सीमा 15 अक्टूबर 2025 से लागू हो चुकी है. केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में राज्य ने इसे तुरंत प्रभावी किया है. यदि कोई परिवार अभी तक आधार लिंकिंग और ई-केवाईसी नहीं करा पाया है, तो उसके राशन कार्ड को निष्क्रिय कर दिया जाएगा. विभाग के अनुसार, बच्चों के लिए विशेष प्रावधान है – पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों का आधार यदि उपलब्ध न हो, तो एक वर्ष के भीतर पूर्ण करना होगा. 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों को अलग राशन कार्ड नहीं दिया जाएगा. देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे जिलों में विशेष कैंप लगाए गए हैं. जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बिना ई-केवाईसी के राशन दुकानों पर अनाज नहीं मिलेगा.

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प्रक्रिया कैसे पूरी करें

ई-केवाईसी प्रक्रिया सरल है और इसे घर बैठे या नजदीकी केंद्र पर किया जा सकता है. आवश्यक दस्तावेज केवल आधार कार्ड है, जिसमें बायोमेट्रिक (उंगलियों के निशान या आइरिस स्कैन) का उपयोग होता है.

ऑनलाइन प्रक्रिया :

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  • उत्तराखंड पीडीएस पोर्टल (rcmspds.uk.gov.in) पर लॉगिन करें.
  • राशन कार्ड नंबर और आधार नंबर दर्ज करें.
  • आधार से लिंक मोबाइल पर आने वाले ओटीपी से सत्यापन करें.
  • सत्यापन के बाद पुष्टि संदेश प्राप्त होगा.

ऑफलाइन प्रक्रिया :

  • नजदीकी फेयर प्राइस शॉप (राशन दुकान) या ई-मित्र केंद्र पर जाएं.
  • आधार कार्ड लेकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराएं.
  • अधिकारी डेटाबेस में अपडेट करेंगे.
  • यदि मोबाइल नंबर लिंक न हो, तो पहले आधार केंद्र पर अपडेट कराएं. विभाग ने हेल्पलाइन नंबर 1800-180-1801 जारी किया है.

राज्य सरकार के कदम

उत्तराखंड सरकार ने ई-केवाईसी को सफल बनाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं. सभी जिलों में ग्राम पंचायतों और नगर निगमों के माध्यम से जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं. खाद्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम को इसमें शामिल किया जाए. राज्य में 500 से अधिक सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां मुफ्त में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "यह कदम गरीबों की सुरक्षा के लिए है, ताकि फर्जी लाभार्थी प्रणाली का दुरुपयोग न कर सकें. " विभाग ने 31 मार्च 2025 तक पूर्ण कवरेज का लक्ष्य रखा है, लेकिन देरी पर जुर्माना या कार्ड रद्द करने की कार्रवाई होगी.

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लाखों परिवार प्रभावित हो सकते हैं

इस कदम से राज्य के लगभग 7-8 लाख परिवार प्रभावित हो सकते हैं, यदि वे समय पर ई-केवाईसी नहीं कराते. विशेष रूप से पहाड़ी जिलों में नेटवर्क की समस्या को ध्यान में रखते हुए मोबाइल वैन भेजी जा रही हैं. सरकार ने अपील की है कि सभी लाभार्थी तुरंत प्रक्रिया पूरी करें, ताकि 'अनाज की कमी' न हो. यह पहल न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगी, बल्कि डिजिटल इंडिया के अनुरूप भी है. पाठकों से अनुरोध: नजदीकी रिश्तेदारों को भी जागरूक करें. अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाएं. 

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