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पीक आवर्स में कैब हुई महंगी, Ola-Uber अब लेंगे दोगुना किराया, सरकार की नई मंजूरी

इन नए नियमों से यात्रियों और ड्राइवरों दोनों को नए अवसर मिलेंगे. जहां एक ओर यात्रियों को सुरक्षा, ट्रैकिंग और रेटिंग सिस्टम से पारदर्शिता और भरोसेमंद सेवा मिलेगी, वहीं ड्राइवरों को बीमा और कमाई के बेहतर अवसर मिलेंगे.

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Cabs Become Expensive During Peak Hour: केंद्र सरकार ने कैब एग्रीगेटर्स को पीक टाइम यानी व्यस्त घंटों में अधिक किराया वसूलने की अनुमति दे दी है. अब ओला, उबर, रैपिडो जैसी सेवाएं बेस फेयर का 200% तक किराया वसूल सकती हैं, जबकि पहले यह सीमा 150% तक ही थी. यानी अगर सामान्य किराया ₹100 है, तो पीक टाइम में यह ₹200 तक हो सकता है. सरकार का मानना है कि इससे ड्राइवरों को भी लाभ मिलेगा और ज्यादा संख्या में वाहन पीक टाइम में उपलब्ध रहेंगे. हालाँकि, इसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ेगा क्योंकि व्यस्त समय में सफर करना अब पहले से महंगा हो जाएगा.

नॉन-पीक आवर्स में सस्ती राइड का विकल्प

सरकार ने एक राहत की भी घोषणा की है  नॉन-पीक आवर्स यानी कम भीड़भाड़ वाले समय में न्यूनतम किराया बेस फेयर का 50% तय किया गया है. इसका मतलब है कि यात्रियों को कुछ घंटों में सस्ते दाम पर यात्रा का मौका मिलेगा. यह कदम यात्रियों को अधिक लचीलापन देने के उद्देश्य से लिया गया है ताकि वे सस्ते समय में यात्रा करने की योजना बना सकें.

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राइड कैंसिलेशन पर लगेगा जुर्माना

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राइड बुक करने के बाद बिना उचित कारण के उसे रद्द करने पर अब यात्रियों और ड्राइवरों दोनों पर कुल किराए का 10% जुर्माना लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹100 रखी गई है. यह राशि ड्राइवर और कंपनी के बीच बांटी जाएगी. यह प्रावधान इसलिए जोड़ा गया है ताकि राइड कैंसिलेशन की संख्या कम हो और सेवाओं में विश्वसनीयता बनी रहे.

ड्राइवरों के लिए बीमा और सुरक्षा की गारंटी

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सरकार ने कैब ड्राइवरों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एग्रीगेटर कंपनियों के लिए कुछ अनिवार्य बीमा प्रावधान तय किए हैं. अब प्रत्येक ड्राइवर के लिए कंपनियों को कम से कम ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा और ₹10 लाख का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराना होगा. इससे ड्राइवरों को काम के दौरान किसी भी दुर्घटना या बीमारी की स्थिति में वित्तीय सहायता मिल सकेगी.

बेस फेयर का निर्धारण अब राज्य सरकारें करेंगी

ऑटो और बाइक टैक्सी सेवाओं के किराए की बात करें तो अब यह अधिकार राज्य सरकारों को दिया गया है.  इसका अर्थ है कि एक ही सेवा का किराया अलग-अलग राज्यों में भिन्न हो सकता है, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किराया तय किया जा सकेगा.  इससे राज्य सरकारों को अपने ट्रैफिक और पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अनुसार बेहतर निर्णय लेने की सुविधा मिलेगी.

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डेड माइलेज पर यात्रियों को राहत

ड्राइवर जब ग्राहक को पिक करने के लिए वाहन चलाते हैं, तो उसे 'डेड माइलेज' कहा जाता है. पहले इसके लिए भी यात्रियों से अतिरिक्त चार्ज लिया जाता था. अब सरकार ने तय किया है कि यदि यह दूरी 3 किलोमीटर से कम है, तो इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा. यह निर्णय यात्रियों के हित में है और किराए में पारदर्शिता लाएगा.

सेफ्टी के लिए टेक्नोलॉजी आधारित समाधान

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अब सभी टैक्सी और बाइक टैक्सी में व्हीकल लोकेशन एंड ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है.यह डिवाइस न केवल कैब कंपनी के सर्वर से जुड़ा होगा बल्कि संबंधित राज्य सरकार के नियंत्रण केंद्र से भी कनेक्ट रहेगा। इससे रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी, जिससे महिलाओं और अन्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी.

ड्राइवरों के लिए नियमित ट्रेनिंग होगी ज़रूरी

ड्राइवरों की गुणवत्ता और यात्री अनुभव को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि हर ड्राइवर को साल में कम से कम एक बार रिफ्रेशर ट्रेनिंग लेनी होगी। इसके अलावा, जिन ड्राइवरों की रेटिंग सबसे कम (नीचे के 5%) में आती है, उन्हें हर तीन महीने में ट्रेनिंग लेना अनिवार्य होगा. जो ड्राइवर ट्रेनिंग नहीं लेंगे, उन्हें सेवा से हटाया जा सकता है. यह कदम ग्राहकों की संतुष्टि और सुरक्षा के लिहाज़ से जरूरी माना जा रहा है.

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निजी बाइकों को भी मिलेगा कमाई का मौका

एक बड़ा बदलाव यह है कि अब राज्य सरकारें चाहें तो निजी मोटरसाइकिलों को भी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स (जैसे ओला, उबर, रैपिडो) पर रजिस्टर करने की अनुमति दे सकती हैं. इसका मतलब यह है कि कोई भी व्यक्ति जो अपनी बाइक से सवारी सेवा देना चाहता है, वह ऐसा कर सकेगा बशर्ते राज्य सरकार ने इसकी अनुमति दी हो. यह कदम विशेष रूप से उन इलाकों में मददगार होगा जहाँ सार्वजनिक परिवहन सीमित है और लोगों को जल्दबाजी में सस्ती राइड्स की जरूरत होती है.

इन नए नियमों से यात्रियों और ड्राइवरों दोनों को नए अवसर मिलेंगे. जहां एक ओर यात्रियों को सुरक्षा, ट्रैकिंग और रेटिंग सिस्टम से पारदर्शिता और भरोसेमंद सेवा मिलेगी, वहीं ड्राइवरों को बीमा और कमाई के बेहतर अवसर मिलेंगे. हालांकि, पीक टाइम में किराए की वृद्धि और जुर्माने जैसे प्रावधान यात्रियों के लिए थोड़े कठिन हो सकते हैं, लेकिन सरकार का उद्देश्य सेवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को संतुलित करना है.

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