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पुलिस हिरासत में हुई मारपीट? अब डरें नहीं, ऐसे करें शिकायत
पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए होती है, न कि उसे डराने या मारने के लिए. अगर आपके साथ या किसी परिचित के साथ कस्टडी में मारपीट या प्रताड़ना हुई है, तो चुप न रहें. कानून और संविधान आपकी रक्षा के लिए हैं
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Complaint Against Police For Beating: किसी भी व्यक्ति को पुलिस हिरासत में रखना, जांच के उद्देश्य से एक सामान्य प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन अगर उस दौरान पुलिस किसी भी तरह की मारपीट, शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना करती है, तो यह पूरी तरह से गैर-कानूनी और असंवैधानिक है.भारतीय संविधान के तहत हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 21) प्राप्त है. इसके साथ ही पुलिस को भी सीमित शक्तियां दी गई हैं, जिनका दुरुपयोग नहीं किया जा सकता.
लेकिन इसके लिए कुछ और भी जरुरी जानकारी करनी होती हैं तो भी इस प्रकिया के लिए फॉलो कर सकते हैं। लेकिंन अगर उस दौरान पुलिस किसी तरह की मारपीट या फिर शहरीक या फिर मानसिक प्रताड़ना करती हैं. जिसके तहत कुछ और भी कुछ जानकार लेने चाहिए इसके तहत और भी भयंकर जानकारी लेनी चाहिए.
अगर पुलिस कस्टडी में मारपीट हो तो कहां कर सकते हैं शिकायत?
1. SP (Superintendent of Police) या DCP को शिकायत करें
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आप सबसे पहले जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) या उपायुक्त (DCP) के पास शिकायत कर सकते हैं.यह शिकायत लिखित रूप में होनी चाहिए और आप चाहें तो डाक या ईमेल से भी भेज सकते हैं.
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क्या लिखें शिकायत में:
घटना की तारीख और समय
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पुलिस स्टेशन का नाम
शामिल पुलिसकर्मियों का नाम (अगर पता हो)
चोटों या प्रताड़ना का विवरण
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गवाहों के नाम (अगर कोई हों)
2. मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत करें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) एक स्वतंत्र संस्था है जो नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा करती है. आप NHRC को ऑनलाइन या पोस्ट के माध्यम से शिकायत भेज सकते हैं.
वेबसाइट: https://nhrc.nic.in
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यहाँ पर आपको कोई वकील रखने की जरूरत नहीं होती. NHRC मामले की जांच कर सकती है और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है.
3. न्यायालय (Court) में याचिका दाखिल करें
- आप सीधे मजिस्ट्रेट या हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं. आप धारा 156(3) CrPC के तहत कोर्ट से एफआईआर दर्ज करवाने की मांग कर सकते हैं.
- इसके अलावा, धारा 200 CrPC के तहत निजी शिकायत भी दर्ज कर सकते हैं और कोर्ट को यह दिखा सकते हैं कि पुलिस ने आपके साथ क्या गलत किया है.
- अगर मामला बहुत गंभीर है, तो आप हाई कोर्ट में रिट याचिका (जैसे Habeas Corpus या Mandamus) भी दायर कर सकते हैं.
4. लोकायुक्त या विजिलेंस विभाग में शिकायत
कुछ राज्यों में आप लोकायुक्त या विजिलेंस ब्यूरो के पास भी भ्रष्टाचार या पुलिस की ज्यादती के मामलों की शिकायत कर सकते हैं.
5. राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC)
यदि आपका मामला किसी राज्य का है तो आप उस राज्य के मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत कर सकते हैं. जैसे कि उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग, महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग आदि.
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जरूरी सबूत और दस्तावेज़
शिकायत करते समय ये चीज़ें साथ रखें:
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- मेडिकल रिपोर्ट (अगर चोट लगी है तो सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट बहुत जरूरी है)
- फोटो या वीडियो (अगर उपलब्ध हो)
गवाहों का बयान
- FIR की कॉपी (अगर दर्ज की गई हो)
- शिकायत की कॉपी (जिन-जिन जगहों पर आपने भेजी हो)
पुलिस को कैसे जवाबदेह बनाएं?
- FIR दर्ज करने से इनकार करें तो आप ऑनलाइन FIR पोर्टल या महिला आयोग की मदद ले सकते हैं.
- आप किसी एनजीओ या लीगल एड सर्विस से भी संपर्क कर सकते हैं
- हर राज्य में फ्री लीगल एड देने के लिए राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SLSA) होती है, वहां से वकील की मदद भी ले सकते हैं.
डरें नहीं, आवाज उठाएं
पुलिस जनता की सुरक्षा के लिए होती है, न कि उसे डराने या मारने के लिए. अगर आपके साथ या किसी परिचित के साथ कस्टडी में मारपीट या प्रताड़ना हुई है, तो चुप न रहें. कानून और संविधान आपकी रक्षा के लिए हैं. सही जगह शिकायत कर के आप न सिर्फ अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं, बल्कि दूसरों को भी न्याय दिलाने में मदद करते हैं.