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सरकार की बड़ी पहल, 19 राज्यों में घर बैठे डाउनलोड होंगे जमीन के कागजात, लोन और खरीद-बिक्री होगी आसान

Cheapest Bank Loan: इन सभी डिजिटल कदमों से जमीन से जुड़े काम अब आसान, तेज और पारदर्शी हो गए हैं. लोगों को कम समय में सही जानकारी मिल रही है और भ्रष्टाचार व विवादों में भी कमी आ रही है.

Image Source: Social Media
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Land Document: अब देश के 19 राज्यों के लोग अपने जमीन के कागजात (लैंड रिकॉर्ड) घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से डिजिटल रूप में डाउनलोड कर सकेंगे. सबसे खास बात यह है कि ये डिजिटल कागजात कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य होंगे. यानी अब जमीन से जुड़े कामों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. सरकार का कहना है कि इससे लोगों का समय बचेगा और काम भी जल्दी होगा.

बैंक से लोन लेना होगा आसान


अब 406 जिलों में बैंक जमीन को गिरवी रखने यानी मॉर्गेज की जानकारी ऑनलाइन ही जांच सकेंगे. इससे लोन लेने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी. पहले बैंक को कागजों की जांच में काफी समय लगता था, लेकिन अब सब कुछ ऑनलाइन होने से लोगों को जल्दी लोन मिलने में मदद मिलेगी.

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लगभग पूरा हो चुका है जमीन रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण

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सरकार के मुताबिक, भूमि संसाधन विभाग ने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने का काम लगभग पूरा कर लिया है. अब जमीन से जुड़े ज्यादातर काम ऑनलाइन हो रहे हैं. ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बताया कि देश के 97 प्रतिशत से ज्यादा गांवों में जमीन के अधिकार से जुड़े रिकॉर्ड कंप्यूटर पर दर्ज किए जा चुके हैं. इसके साथ ही लगभग 97 प्रतिशत जमीन के नक्शे भी डिजिटल बना दिए गए हैं.

नक्शों से जोड़े गए जमीन के रिकॉर्ड

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सरकार ने बताया कि करीब 85 प्रतिशत गांवों में जमीन के लिखित रिकॉर्ड को उनके डिजिटल नक्शों से जोड़ दिया गया है. इससे जमीन की सही जानकारी मिलती है और विवाद होने की संभावना भी कम होती है. अब जमीन का मालिकाना हक साफ और स्पष्ट तरीके से ऑनलाइन देखा जा सकता है.

शहरों के लिए ‘नक्शा’ योजना


शहरों में जमीन की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने ‘नक्शा’ (NAKSHA) नाम की योजना शुरू की है, जिसका पूरा नाम है राष्ट्रीय भू-स्थानिक ज्ञान-आधारित शहरी आवास भूमि सर्वेक्षण. इस योजना के तहत देश के 157 शहरी स्थानीय निकायों (ULB) में काम किया जा रहा है. इनमें से 116 शहरों में हवाई सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरों के जरिए 5,915 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया गया है.

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कई शहरों में सर्वे पूरा, कई में जारी


सरकार ने बताया कि 72 शहरों में जमीन की जमीनी स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है, जबकि 21 शहरों में यह काम पूरी तरह खत्म हो चुका है. इससे शहरों में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और ज्यादा साफ और भरोसेमंद बनेंगे.

राज्यों को मिल रही है आर्थिक मदद


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केंद्र सरकार ने 2025-26 की योजना के तहत 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को करीब 1,050 करोड़ रुपये की मदद मंजूर की है. यह पैसा जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड का काम पूरा करने के लिए दिया गया है, ताकि पूरे देश में एक जैसी व्यवस्था लागू हो सके.

जमीन का भी होगा आधार कार्ड


सरकार ने जमीन के लिए एक खास पहचान संख्या शुरू की है, जिसे यूएलपीआईएन (ULPIN) कहा जाता है.  यह 14 अंकों की यूनिक संख्या होती है और इसे जमीन का आधार कार्ड भी कहा जा रहा है. नवंबर 2025 तक देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 36 करोड़ से ज्यादा जमीन के टुकड़ों को यह नंबर दिया जा चुका है.

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जमीन की खरीद-बिक्री भी हुई आसान

सरकार ने राष्ट्रीय दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली (NGDRS) शुरू की है, जिससे जमीन की खरीद और बिक्री अब आसान हो गई है. यह सिस्टम पंजाब, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश सहित 17 राज्यों में लागू हो चुका है. करीब 88 प्रतिशत सब-रजिस्ट्रार ऑफिस अब राजस्व कार्यालयों से जुड़ चुके हैं, जिससे जमीन की रजिस्ट्री होते ही रिकॉर्ड अपने आप अपडेट हो जाता है.

जमीन से जुड़े काम अब तेज और पारदर्शी

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सरकार का कहना है कि इन सभी डिजिटल कदमों से जमीन से जुड़े काम अब आसान, तेज और पारदर्शी हो गए हैं. लोगों को कम समय में सही जानकारी मिल रही है और भ्रष्टाचार व विवादों में भी कमी आ रही है. आने वाले समय में जमीन से जुड़े सभी काम पूरी तरह डिजिटल हो जाएंगे. 

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