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'नेक काटोगे, आकर तो देखो, हमसे अच्छा काटना कोई नहीं जानता’, नागालैंड के मंत्री ने की बांग्लादेश की बोलती बंद

नागालैंड के मंत्री तेमजेन इमना अलोंग ने बांग्लादेशी कट्टरपंथियों को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि भूल जाओ कि ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ बनेगा. जहां तक काटने की ही बात है, तो हमसे बेहतर काटना कोई नहीं जानता. उन्होंने साफ कहा कि ये लोग हमारा हिडिंबा और घटोत्कच नहीं देखे हैं.

Image: Nagaland minister Temjen Imna Along / X (File Photo)
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बांग्लादेश में जब से मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार आई है, तब से ऐसा लगता है जैसे बांग्लादेशी कट्टरपंथी यह भूल गए हैं कि वे कौन हैं, उनका देश कैसे अस्तित्व में आया और जिससे वे लड़ रहे हैं उसका इतिहास क्या रहा है. बीते साल अगस्त में हुए कट्टरपंथी आंदोलन, जिसे ढाका की क्रांति का नाम दिया जा रहा था, वह अब अपना असली रंग दिखा रहा है. उनका एक ही मकसद है भारत का विरोध और दिल्ली की सत्ता को चुनौती देना.

उनका एक ही एजेंडा है कथित और कभी न पूरा होने वाला ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का ख्वाब. खैर, नॉर्थ ईस्ट को क्या तोड़ेंगे ये बांग्लादेशी कट्टरपंथी, उनके लिए पूर्वोत्तर का एक राज्य और कुछ चुनिंदा लोग ही काफी हैं. ऐसा ही करारा जवाब नागालैंड के खेल मंत्री और बीजेपी नेता तेमजेन इमना अलोंग ने दिया है. उन्होंने बांग्लादेश को उसकी असली औकात दिखा दी है.

दरअसल, जिस तरह बांग्लादेश में ISI और बांग्लादेश के इशारे पर कट्टरपंथी ताकतें भारत विरोधी माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं, वह अब हद से आगे बढ़ चुका है. ‘चिकन नेक-चिकन नेक’ का राग अलापा जा रहा है. इसी पर तेमजेन इमना अलोंग ने आईना दिखाया है. अलोंग ने कहा कि बांग्लादेश की मौजूदा घटनाओं से वह बेहद आहत हैं. उन्होंने आगे कहा कि भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को लेकर दी जा रही धमकियों का कोई मतलब नहीं है. यह ‘चिकन नेक’ शब्द ही मीडिया का है. नेक-चिकन नेक जैसा कोई शब्द ही नहीं है, यह मीडिया का उछाला हुआ शब्द है.

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'अपना इतिहास न भूलें बांग्लादेशी कट्टरपंथी'

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बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी ताकतों की ओर से जिस तरह भारत विरोधी माहौल बनाने की कोशिशें की जा रही हैं, उसे लेकर नागालैंड के खेल मंत्री और बीजेपी नेता तेमजेन इमना अलोंग ने तीखी नाराजगी जाहिर की है. खास तौर पर बांग्लादेश में हिंदुओं की जघन्य हत्याओं और भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर दी जा रही धमकियों पर उन्होंने खुलकर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने महाकाव्य महाभारत के पात्रों का उदाहरण देते हुए ऐसे कट्टरपंथी तत्वों को सख्त चेतावनी दी है कि वे इतिहास से सबक लें और भ्रम में न रहें.

'भारत की एकता और अखंडता को लेकर गलतफहमी पड़ेगी भारी'

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दरअसल, कट्टरपंथी यह भ्रम पाले बैठे हैं कि उनका तथाकथित ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का सपना पूरा हो सकता है. इतना ही नहीं, वे यह भी सोच रहे हैं कि भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर को काटकर पूर्वोत्तर भारत को देश से अलग कर सकते हैं. अलोंग ने साफ कर दिया है कि भारत की एकता और अखंडता को लेकर कोई भी गलतफहमी पालना भारी पड़ सकता है.

तेमजेन इमना अलोंग ने कहा, “हम लोगों ने समझ लिया है कि उनका इरादा क्या है. अगर वे यह सोचते हैं कि चिकन नेक काटकर वे हमें कमजोर कर सकते हैं, तो यह उनकी सबसे बड़ी भूल है. चिकन नेक जैसे शब्द मीडिया के हैं, हमारा कोई ‘नेक’ नहीं है जिसे काटा जा सके. हम पूरी मजबूती के साथ भारत से जुड़े हुए हैं और हम भारतीय हैं.” उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर भारत की जनता देश की संप्रभुता और अखंडता के साथ मजबूती से खड़ी है और किसी भी तरह की धमकी या उकसावे से डरने वाली नहीं है.

'हम पूरी तरह भारतीय हैं'

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उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो लोग इस तरह की बातें कर रहे हैं, हम उनकी उतनी निंदा भी नहीं करते. हम बस इतना चाहते हैं कि वे लोग एक बार आकर पूर्वोत्तर को देखें. उन्हें शायद पता नहीं है कि वे किससे बात कर रहे हैं. हम लोग समझ चुके हैं कि उनका असली इरादा क्या है. अगर वे यह सोचते हैं कि तथाकथित ‘चिकन नेक कॉरिडोर’ काटकर कुछ कर लेंगे, तो उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि हम लोगों का कोई ‘नेक’ नहीं है. यह शब्द मीडिया के हैं. हम बहुत मजबूती से भारत के साथ जुड़े हुए हैं और पूरी तरह भारतीय हैं.

'हमारा घटोत्कच और हिडिंबा नहीं देखा'

उन्होंने साफ कहा कि हम यह भी नहीं कहना चाहते कि सारे बांग्लादेशी गलत हैं. बांग्लादेश में बहुत से अच्छे लोग भी हैं, लेकिन कुछ जो पागल किस्म के लोग हैं, वही इस तरह की बातें कर रहे हैं. ऐसे लोगों ने आज तक हमारा घटोत्कच और हिडिंबा नहीं देखा है. अगर वे चाहें तो यहां आकर देखें. हम उन्हें दिखाएंगे कि पूर्वोत्तर क्या है और यहां के लोग कैसे हैं.

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'गला काटने की बात है तो हमसे बेहतर कोई नहीं है'

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तेमजेन इमना अलोंग ने आगे कहा कि राजनीति में बैठे लोगों को जो भी सपने दिख रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि साल 1971 और 1972 में भारत ने ही बांग्लादेश को आज़ादी दिलाई थी. अगर कोई इतनी जल्दी यह सब भूल जाता है, तो फिर बहुत कुछ हो सकता है. गला काटने और धमकी देने की जो भाषा है, उसमें हमसे बेहतर कोई नहीं जानता कि हालात कैसे संभाले जाते हैं. यह कोई नई बात नहीं है, हम यह सब पहले भी देख चुके हैं.

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