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नहीं भूलेंगे कौन हमारे साथ, कौन नहीं... श्रीलंका में दित्वाह संकट, देवदूत बना भारत, जयसूर्या बोले- ये सच्ची दोस्ती
श्रीलंका में आए चक्रवात दित्वाह संकट में श्रीलंकाई लोगों के लिए भारत देवदूत बनकर उभरा है. इस पर श्रीलंका के दिग्गज क्रिकेटर ने कहा कि श्रीलंका कभी नहीं भूलेगा कि संकट या जब उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी तो कौन उनके साथ खड़ा था और कौन नहीं. उन्होंने ये भी कहा कि भारत की सहायता भारत-श्रीलंका के बीच सच्ची दोस्ती को दर्शाती है.
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चक्रवात दित्वाह ने श्रीलंका में भारी तबाही मचाई है. पड़ोसी देश श्रीलंका के लोगों और सरकार पर आई इस विपदा के वक्त भारत, भारत के लोग और भारतीय वायुसेना देवदूत बनकर उभरे हैं. इस मुश्किल परिस्थिति से निपटने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर ऑपरेशन सागर बंधु के तहत राहत और बचाव अभियान चलाया है, जिसमें न सिर्फ श्रीलंकाई लोगों को रेस्क्यू किया गया बल्कि सेना के जवानों को भी बचाया गया. उनके लिए वायुसेना के विमान से खाद्य सामग्री, मेडिकल सामान, मूविंग हॉस्पिटल सहित अन्य जरूरत की चीजें भेजी गईं. भारत के इस मानवीय कार्य और मदद की काफी तारीफ हो रही है.
श्रीलंका के दिग्गज क्रिकेटर और क्रिकेट बोर्ड के प्रशासक और कोच सनथ जयसूर्या ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारत की जनता का धन्यवाद किया है. उन्होंने कहा कि कठिन समय में मिले भारत के साथ ने दोनों देशों की सच्ची मित्रता को दर्शाया है.
भारत के राहत और बचाव कार्य की सनथ जयसूर्या ने की तारीफ!
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सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर ने भारतीय वायुसेना के राहत और बचाव ऑपरेशन की तस्वीर ट्वीट किया, जिसमें एक श्रीलंकाई महिला वायुसेना के अफसर का हाथ जोड़कर धन्यवाद कर रही है, उस पर लिखा कि, बाढ़ के बीच एक खूबसूरत पल, एक श्रीलंकाई मां अपने परिवार को बचाने में मदद करने वाले भारतीय वायु सेना के पायलट का शुक्रिया अदा कर रही है. तबाही के बीच भी, मानवता अपनी चमक बिखेरती रहती है. करुणा की कोई सीमा नहीं होती.
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'श्रीलंका कभी नहीं भूलेगा कि संकट में उसके साथ कौन खड़ा हुआ'
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इसी तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए जयसूर्या ने पीएम मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत की जनता का आभार व्यक्त करते हुए लिखा: माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारत की जनता का इन कठिन दिनों में श्रीलंका के साथ खड़े रहने के लिए आभार. आर्थिक संकट के दौरान आपका समर्थन हमारी दोस्ती की असली ताकत को दर्शाता है. इस मुश्किल घड़ी में हमारे साथ खड़े रहने के लिए धन्यवाद.
इतना ही नहीं सनथ जयसूर्या यहीं नहीं रुके उन्होंने फेसबुक पर भी इसी तस्वीर पर प्रतिक्रिया दी और लिखा कि श्रीलंका उन्हें कभी नहीं भूलेगा कि जरूरत के वक्त उनके साथ खड़े हुए.
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चक्रवात दित्वाह के अब तक 465 से ज्यादा लोगों की मौत
आपको बता दें कि चक्रवात दित्वाह के कारण आई भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से श्रीलंका अब तक करीब 465 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग लापता है. इसी को देखते हुए भारत द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन सागर बंधु के तहत NDRF ने श्रीलंका में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं. भारतीय उच्चायोग ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए बताया, “ऑपरेशन सागर बंधु के तहत एनडीआरएफ टीम जीवनरक्षक कार्यों को जारी रखे हुए है. एक दृष्टिबाधित वरिष्ठ नागरिक और एक घायल महिला को सुरक्षित निकाला गया और स्थल पर ही इलाज मुहैया कराया गया.”
28 नवंबर को शुरू हुआ ऑपरेशन सागर बंधु
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भारत ने 28 नवंबर को चक्रवात दित्वाह से श्रीलंका में उत्पन्न भीषण बाढ़, जनहानि और व्यापक तबाही के बाद तत्काल खोज एवं बचाव तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत समर्थन के लिए ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया. ऑपरेशन के तहत आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि ने श्रीलंका पहुंचकर फौरी राहत सामग्री उपलब्ध कराई. दोनों युद्धपोतों से तैनात हेलीकॉप्टरों ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और खोज एवं बचाव कार्यों में तेजी लाई.
ऑपरेशन सागर बंधु में INS विक्रांत और INS उदयगिरि भी शामिल
भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने बताया, “चक्रवात दित्वाह के बाद आईएनएस विक्रांत और आईएनएस उदयगिरि ने राहत सामग्री तुरंत उपलब्ध कराकर हजारों लोगों की सहायता की. हेलीकॉप्टरों ने हवाई खोज एवं बचाव कार्यों से कई लोगों की जान बचाई.” उन्होंने यह भी बताया कि आईएनएस सुकन्या 1 दिसंबर को त्रिंकोमाली पहुंचा और वहां गंभीर आपात राहत सामग्री श्रीलंकाई प्रशासन को सौंपी गई.
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प्रवक्ता के अनुसार, यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में “फर्स्ट रिस्पॉन्डर” के रूप में भारतीय नौसेना की भूमिका, भारत की “महासागर दृष्टि” तथा नेबरहुड फर्स्ट नीति को और मजबूत करती है. उधर, श्रीलंका में चक्रवात दित्वाह की तबाही का दायरा लगातार बढ़ रहा है. डेली मिरर ने डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर के हवाले से बताया कि हादसों में मृतकों की संख्या बढ़कर 465 हो गई है.
कंडी जिले में सबसे ज्यादा मौत
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सबसे अधिक 118 मौतें कंडी जिले में दर्ज की गई हैं. अब भी 366 लोग लापता हैं, जिनमें बड़ी संख्या मताले जिले से है. एकीकृत रूप से 1.5 मिलियन से अधिक लोग चक्रवात और बाढ़ से प्रभावित हुए हैं तथा 61,000 से अधिक परिवारों के 2.32 लाख लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं. श्रीलंकाई सरकार ने भारी तबाही के बाद 22 जिलों को राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित करते हुए विशेष राजपत्र जारी किया है.