Advertisement

Loading Ad...

रेलवे ट्रैक की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती, वजह जानकर सर चकरा जाएगा, शायद ही लोगों को पता हो जवाब

रेलवे ट्रैक की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती, इसका जवाब सुनकर सच में दिमाग हिल सकता है, क्योंकि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ये आम लोहे की बनी होती हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है. रेलवे की पटरियां साधारण लोहे से नहीं, बल्कि खास तरह के हाई-ग्रेड स्टील से बनाई जाती हैं.

Loading Ad...

भारतीय रेलवे अपनी उपलब्धियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हो चुकी है. रेलवे ट्रेनों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से एडवांस बनाकर यात्रियों के सफ़र के आंनद को भी दो गुना कर रहा है. 

भारतीय रेल नेटवर्क पूरे विश्व में प्रसिद्ध है

यही वजह है जब कोई विदेशी यात्री भारतीय ट्रेनों में सफ़र करता है तो उसकी सुविधाओं और संचालन से वो काफी इंप्रेस होते हैं. इतना ही नहीं वो फिर उस बात को अपने व्ल़ॉग में बताकर वायरल कर देते हैं. भारत का रेल नेटवर्क ना सिर्फ सहूलियत और सुवधिाएं देने के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. बल्कि भारतीय रेलवे अनोखी इंजीनिरिग को लेकर भी फेमस है,जो कि काफी चौंकाने वाली चीज़ है. 

Loading Ad...

रेलवे ट्रैक की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती

Loading Ad...

अब रेल की पटरियों को ही ले लीजिए, क्या ट्रेन में सफ़र करते हुए आपने कभी सोचा है कि रेलवे ट्रैक की पटरियों में कभी जंग क्यों नहीं लगती है. अगर आप नहीं जानते हैं, तो चलिए बताते हैं आपको. 

रेलवे ट्रैक की पटरियों में जंग क्यों नहीं लगती, इसका जवाब सुनकर सच में दिमाग हिल सकता है, क्योंकि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ये आम लोहे की बनी होती हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है. रेलवे की पटरियां साधारण लोहे से नहीं, बल्कि खास तरह के हाई-ग्रेड स्टील से बनाई जाती हैं. खासतौर पर भारतीय रेलवे में इस्तेमाल होने वाली पटरियां हाई मैंगनीज स्टील और कार्बन-मैंगनीज मिश्र धातु वाली होती हैं, जिसमें करीब 0.8-1.2% कार्बन और कई प्रतिशत मैंगनीज मिलाया जाता है. 

Loading Ad...

ट्रेनें खुद ही पटरियों को साफ और चमकदार रखती हैं

इस खास मिश्रण की वजह से ऑक्सीकरण यानि जंग लगने की प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है. स्टील मजबूत, टिकाऊ और मौसम के बदलावों से बचाव करने वाला बन जाता है. जंग लगने की रफ्तार इतनी कम होती है कि सालों तक कोई खास समस्या नहीं आती. लेकिन असली मजेदार बात ये है कि ट्रेनें रोज़ चलती रहती हैं. ट्रेन के पहिए पटरियों पर भारी दबाव और घर्षण डालते हैं, जिससे पटरियों की ऊपरी सतह पॉलिश होती रहती है. अगर कहीं हल्की-सी जंग भी लग जाए, तो ट्रेन के पहिए उसे रगड़कर हटा देते हैं.  यानी ट्रेनें खुद ही पटरियों को साफ और चमकदार रखती हैं.

क्या करने से समुद्री इलाके में पटरियों पर जंग लगती?

Loading Ad...

अगर ट्रैक पर ट्रेनें कम चलती हैं या बिल्कुल बंद हो जाता है, तो वहां जंग लग सकती है, लेकिन मुख्य लाइनों पर ये बहुत कम देखने को मिलता है. कुछ जगहों (जैसे समुद्री इलाके में) जहां नमी और नमक ज्यादा होता है, वहां रेलवे अब जिंक कोटिंग या गैल्वेनाइज्ड स्टील का इस्तेमाल शुरू कर रही है ताकि और बेहतर सुरक्षा मिले. 

कैसे बनती हैं ट्रेन की पटरियां?

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ रेलवे ट्रैक आमतौर पर हाई क्वालिटी वाले हॉट-रोल्ड, कार्बन-मैंगनीज स्टील से बनाए जाते हैं. इनको उच्च शक्ति, घिसाव प्रतिरोध और टिकाऊपन के लिए जाना जाता है. ट्रेन की पटरियां प्राय 60 kg/m या 52 kg/m में उपलब्ध होती हैं जिनको भारी वजन और हर जलवायु परिस्थिति का सामना करने के लिए आकार दिया जाता है. 

Loading Ad...

ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं?

यह भी पढ़ें

ट्रेन की पटरियां चोरी क्यों नहीं होतीं, ये सवाल सुनकर दिमाग हिल जाता है, क्योंकि खुले में लाखों टन लोहा पड़ा रहता है, फिर भी चोर हाथ नहीं लगाते हैं.  ये साधारण लोहा नहीं, बल्कि हाई कार्बन मैंगनीज वाली मिश्र धातु से बनी होती हैं. इसे काटना, तोड़ना या पिघलाना बहुत मुश्किल और महंगा पड़ता है. पटरियां कंक्रीट या लकड़ी के स्लीपर्स पर बोल्ट, क्लिप (पैंड्रॉल क्लिप) और फिश प्लेट से कसकर जकड़ी जाती हैं. इन्हें खोलने में घंटों लगते हैं, स्पेशल टूल्स चाहिए होते हैं. 

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...