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गाजियाबाद जेल में राममय माहौल, कैदी कर रहे हैं भजन-कीर्तन; सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो, देखें

गाज़ियाबाद जेल का यह प्रयास समाज को एक गहरा संदेश देता है  कि इंसान चाहे जितनी भी बड़ी गलती कर ले, अगर उसे अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वह सुधर सकता है.इस पहल से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में भारत की अन्य जेलें भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ेंगी और ‘जेल’ शब्द का मतलब सिर्फ दंड नहीं, बल्कि दूसरा मौका और एक नई शुरुआत बन जाएगा.

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जहां कभी सिर्फ दीवारें, सलाखें और सन्नाटा था, वहां आज भक्ति की गूंज, ध्यान की शांति और रामायण के पवित्र शब्द सुनाई दे रहे हैं. उत्तर प्रदेश की सबसे प्रमुख जेलों में से एक गाज़ियाबाद जेल अब मात्र एक कारावास नहीं, बल्कि एक सुधारगृह के रूप में बदल रही है और यह बदलाव न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज को पुनर्विचार का संदेश भी देता है.

जेल नहीं, अब जीवन सुधार की पाठशाला

रविवार को डीजी जेल पीसी मीना ने गाज़ियाबाद जेल का निरीक्षण किया. उन्होंने यहां के बदलते माहौल की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल न केवल बंदियों के मनोबल को ऊँचा कर रही है, बल्कि उन्हें जीवन के एक नए मार्ग पर भी प्रेरित कर रही है. आज यहां कैदियों के लिए नियमित रामायण पाठ, ध्यान, योग, और अन्य आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है. इसका उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि आत्मिक सुधार और पुनर्वास की दिशा में उन्हें आगे बढ़ाना है.

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बंदियों में जाग रहा है आत्मबोध

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गाज़ियाबाद जेल के अंदर अब एक ‘राममय’ वातावरण है. कैदी न केवल आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर रहे हैं, बल्कि आत्मचिंतन के माध्यम से अपने कर्मों को समझने और जीवन में सुधार की राह खोजने में जुटे हैं. इस पहल से जेल प्रशासन यह साबित कर रहा है कि हर व्यक्ति में परिवर्तन की संभावना होती है, बस उसे सही दिशा और प्रेरणा की ज़रूरत है.

सुधार की इस पहल के लाभ

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मानसिक स्वास्थ्य में सुधार: ध्यान और योग से कैदियों की मानसिक स्थिति बेहतर हो रही है.

आत्मिक जागरूकता: धार्मिक और आध्यात्मिक शिक्षाओं से उनके भीतर आत्मग्लानि की जगह आत्मबोध पनप रहा है.

पुनर्वास की तैयारी: बाहर जाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना प्रबल हो रही है.

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समाज के लिए एक संदेश

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गाज़ियाबाद जेल का यह प्रयास समाज को एक गहरा संदेश देता है  कि इंसान चाहे जितनी भी बड़ी गलती कर ले, अगर उसे अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो वह सुधर सकता है.इस पहल से यह उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में भारत की अन्य जेलें भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ेंगी और ‘जेल’ शब्द का मतलब सिर्फ दंड नहीं, बल्कि दूसरा मौका और एक नई शुरुआत बन जाएगा.

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