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नसीमा बनी सीमा, सरयू नदी में बुर्के का विसर्जन कर अपनाया हिंदू धर्म
नसीमा बनी सीमा...! सरयू नदी में किया बुर्के का विसर्जन, सीमा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यह मेरा व्यक्तिगत निर्णय है. मैंने लंबे समय से अपने अंदर मंथन किया, और आज खुद से ईमानदारी के साथ एक नया अध्याय शुरू करने का साहस जुटाया है."
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अयोध्या की पावन सरयू नदी के तट पर बुधवार को एक विशेष दृश्य देखने को मिला, जब नसीमा खातून नामक महिला ने अपना बुर्का नदी में प्रवाहित कर नए जीवन की शुरुआत की. अब उन्होंने अपना नाम "सीमा" रख लिया है. उनका यह कदम सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है.
नसीमा बनीं सीमा
सीमा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "यह मेरा व्यक्तिगत निर्णय है. मैंने लंबे समय से अपने अंदर मंथन किया, और आज खुद से ईमानदारी के साथ एक नया अध्याय शुरू करने का साहस जुटाया है."
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सीमा ने सरयू नदी में बुर्के का किया विसर्जन
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उन्होंने बताया कि यह परिवर्तन किसी दबाव या बहकावे में आकर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आध्यात्मिक आकर्षण के चलते हुआ है. सीमा ने सरयू नदी में आस्था जताते हुए अपना बुर्का प्रवाहित किया और संकल्प लिया कि वह अब सनातन धर्म को अपनाकर सेवा और शांति के मार्ग पर चलेंगी.
हिंदू समाज के लोगो ने किया सीमा का स्वागत
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स्थानीय हिंदू समाज के कुछ लोगों ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि "भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ हर व्यक्ति को अपनी आस्था चुनने का अधिकार है. अगर किसी ने पूरी जागरूकता के साथ ऐसा निर्णय लिया है, तो उसका स्वागत होना चाहिए."
हालाँकि, इस घटनाक्रम पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक समूहों की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आई हैं. कुछ ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उदाहरण बताया है, तो कुछ ने इसके पीछे 'धार्मिक प्रचार' की आशंका जताई है.
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फिलहाल सीमा का कहना है कि वे अपनी शिक्षा पूरी करके समाजसेवा में लगना चाहती हैं. उन्होंने यह भी जोड़ा कि "मेरा उद्देश्य किसी धर्म की आलोचना नहीं, बल्कि अपने आत्मिक सुख की खोज है."