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दो भाइयों ने एक ही लड़की से की शादी, तीन दिन तक चला विवाह समारोह, सोशल मीडिया पर बना चर्चा का विषय

शादी में शामिल तीनों लोग दुल्हन और दोनों दूल्हे शिक्षित हैं. एक दूल्हा जल शक्ति विभाग में कार्यरत है, जबकि दूसरा विदेश में नौकरी करता है. इस वजह से यह मामला और भी चर्चित हो गया है.

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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से एक हैरान करने वाली और चर्चा का विषय बनी शादी की खबर सामने आई है, जिसमें दो भाइयों ने एक ही युवती से शादी रचाई है. यह शादी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार बड़े धूमधाम से संपन्न हुई.

दो भाइयों ने एक ही लड़की से की शादी

सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र के थिंडो खानदान के दो भाइयों ने कुन्हट गांव की एक शिक्षित युवती से एक साथ विवाह किया. यह अनोखी शादी 12 से 14 जुलाई तक तीन दिन तक चली, जिसमें ढोल-नगाड़ों के साथ बारात निकली और वीडियो शूट भी हुआ. शादी में बड़ी संख्या में गांववासी और रिश्तेदार शामिल हुए.

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हाटी समाज की परंपरा को फिर जिंदा किया

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इस विवाह को हाटी समाज की एक पुरानी परंपरा से जोड़ा जा रहा है, जिसे ‘उजला पक्ष’ कहा जाता है. इस परंपरा के अनुसार, दो या अधिक भाई एक ही महिला से शादी कर सकते हैं. इसका उद्देश्य पारिवारिक संपत्ति का विभाजन रोकना और पारिवारिक एकता को बनाए रखना था.

शादी में शामिल तीनों लोग दुल्हन और दोनों दूल्हे शिक्षित हैं. एक दूल्हा जल शक्ति विभाग में कार्यरत है, जबकि दूसरा विदेश में नौकरी करता है. इस वजह से यह मामला और भी चर्चित हो गया है.

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पुरानी परंपराओं से जुड़ी है यह रस्म

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और उत्तराखंड के जौनसार-बावर क्षेत्र में यह प्रथा पहले आम थी, लेकिन 70 और 80 के दशक के बाद ऐसी शादियाँ लगभग समाप्त हो गई थीं. इसी प्रकार की प्रथा किन्नौर जिले में भी प्रचलित थी. माना जाता है कि यह परंपरा पांडवों के समय से जुड़ी हुई है, जहाँ द्रौपदी ने पाँचों पांडवों से विवाह किया था.

सोशल मीडिया पर हो रही है चर्चा

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इस शादी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. जहाँ कुछ लोग इसे परंपरा से जुड़ा मान रहे हैं, वहीं कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आज के समय में एक युवती दो भाइयों से शादी के लिए कैसे तैयार हुई. हालांकि, परिवार और स्थानीय लोग इस मामले में खुलकर बात नहीं कर रहे हैं.

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यह शादी भले ही आज के समय में असामान्य लगे, लेकिन यह हिमाचल की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता का एक हिस्सा है. यह मामला यह भी दर्शाता है कि कुछ परंपराएं समय के साथ भले ही कम हो गई हों, पर पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं.

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