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फ्लाइट की ‘संकटमोचन’ सीटें होगी महंगी, प्लेन क्रैश में यात्रियों की बचने वाली जान से है कनेक्शन, जानें कैसे
अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश में एक व्यक्ति की जान बचने के बाद उससे जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट ने इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है कि व्यक्ति की जान उसके सीट की वजह से बच गई. कई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि अब इस सीट की कीमत और भी बढ़ जाएगी और ये सबसे महंगी सीट बन जाएगी…
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अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश के बाद लोगों के मन में फ्लाइट में सफ़र करने को लेकर डर बैठ गया है. सफर करते वक्त आप भी सोचते हैं कि कौन सी सीट सबसे सुरक्षित है? हालांकि इसका जवाब सोशल मीडिया पोस्ट्स में देखने को मिला रहा है. जिसमें दावा किया जा रहा है कि फ्लाइट की सबसे सुरक्षित सीट 11A है क्योंकि अहमदाबाद हादसे में इस सीट पर बैठे विश्वास कुमार रमेश की जान बची थी. इसके अलावा एक अन्य हादसे का शिकार हुए प्लेन में इसी सीट पर बैठे एक यात्री की जान बच गई थी. इसलिए इस सीट को संकटमोचन सीट कहना गलत नहीं होगा. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि एयरलाइंस कंपनियां अब इस सुरक्षित सीट को महंगे विकल्प के तौर पर बेचने की तैयारी में हैं. कई पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि इस सीट की कीमत अब अहमदाबाद एयर इंडिया के प्लेन क्रैश के बाद और भी बढ़ जाएगी और ये सबसे महंगी सीट बन जाएगी. लेकिन इसके पीछे की सच्चाई क्या है? चलिए जानते हैं.
11A सीट पर बैठने वालों की बची जान
दरअसल, अहमदाबाद में हुई विभत्स प्लेन दुर्घटना में सीट नंबर 11A पर बैठे विश्वास कुमार रमेश नामक यात्री की जान बच गई, जबकि विमान पूरी तरह से तबाह और बर्बाद हो गया, जलकर खाक हो गया. ये सीट विंग (पंखों) के पास वाली ओवरविंग सीट थी, जिसे एविएशन इंडस्ट्री में आमतौर पर ‘स्ट्रक्चरल स्ट्रॉन्ग’ यानी संरचनात्मक रूप से मजबूत माना जाता है. इस सीट की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि एक अन्य हादसे इसी सीट पर बैठे एक यात्री ने मौत को मात दी थी.
11 दिसंबर, 1998 को थाई अभिनेता और गायक 20 वर्षीय रूआंगसाक लॉयचुसाक की जान बच गई थी. दरअसल थाई एअरवेज फ्लाइट TG261 दक्षिण थाईलैंड में लैंडिंग के दौरान एक दलदल में क्रैश लैंडिंग की थी. इस हादसे में विमान में सवार 146 लोगों में से 101 की जान चली गई थी. रूआंगसाक उसी विमान की सीट 11A पर बैठे थे, और आज 47 वर्ष के होने के बाद उनका कहना है कि उन्होंने एक रहस्यमयी संयोग देखा है.
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इस घटना के बाद से यात्रियों में ऐसी सीटों को लेकर रुचि और जागरूकता दोनों बढ़ी है. खास बात ये है कि कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों और क्रैश एनालिसिस रिपोर्ट्स में भी यह बात सामने आई है कि प्लेन के पिछले हिस्से या विंग के ऊपर की सीटें तुलनात्मक रूप से ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं.
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ओवरविंग सीट क्यों है ज्यादा सुरक्षित?
- यह हिस्सा एयरक्राफ्ट की पंखों से जुड़ा होता है और संरचना में सबसे मजबूत होता है.
- इमरजेंसी एग्जिट के पास रहने की वजह से रेस्क्यू की संभावना अधिक होती है.
- इन सीटों पर एक्स्ट्रा लेग स्पेस भी होता है, जो आराम के साथ-साथ फुर्ती से बाहर निकलने में मदद करता है.
क्यों बढ़ सकती है इन सीटों की कीमत?
फ्लाइट में जहां लेग स्पेस या विंडो सीट के लिए पहले से एक्स्ट्रा चार्ज लिया जाता है, वैसे ही अब एविएशन कंपनियां *सेफ्टी वैल्यू* को भी एक नया चार्जिंग प्वाइंट बना सकती हैं. जो यात्री जानबूझकर सुरक्षित माने जाने वाली सीटें चुनना चाहते हैं, उनसे अतिरिक्त शुल्क वसूलना एयरलाइंस के लिए नया कमाई का जरिया बन सकता है.
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एयरलाइंस कंपनियां क्या करेंगी?
कुछ बजट और प्रीमियम कैरियर्स ने इन सीटों को ‘सेफ्टी प्रीमियम सीट’ की कैटेगरी में डालने पर विचार शुरू कर दिया है. टिकट बुकिंग के दौरान अब सिर्फ विंडो, आइसल या एक्स्ट्रा लेग रूम ही नहीं, बल्कि हाई सेफ्टी जोन भी एक विकल्प हो सकता है.