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पिता ने कार सेवकों पर चलवाई गोली, खुद ने राम मंदिर की बात करने वाले सचिव को किया था बर्खास्त, फिर क्यों करने लगे 1 साल में मंदिर बनाने की बात

समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें वो कह रहे हैं कि अगर राज्य में आज हमारी सरकार होती तो एक साल में 'राम मंदिर' बनकर तैयार हो जाता. अखिलेश यादव के इसी सफेद झूठ का हम इस लेख में पर्दाफाश करने जा रहे हैं. राम विरोधी लोगों ने किस प्रकार अपनी सरकार में राम भक्तों के ऊपर अत्याचार किया, ये देश की जनता तो जानती ही है लेकिन जो लोग भूल गए उन्हें फिर से याद दिलाते हैं.

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव शायद भूल गए कि यूपी की जनता से वो झूठ बोल रहे हैं, इन दिनों सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है. जिसमें अखिलेश यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि "ये लोग (बीजेपी) चाहती तो एक साल में राम मंदिर बनकर तैयार हो जाता, या हमलोग होते (समाजवादी सरकार) होती तो एक साल में मंदिर बनकर तैयार हो जाती."

मंदिर निर्माण की बात पर सचिव को किया था बर्खास्त 

अखिलेश जी को 8 साल पहले 9 अक्टूबर 2013 में ले चलते हैं, जब यूपी में सपा की सरकार थी, और मुख्यमंत्री की गद्दी पर अखिलेश यादव खुद बैठे थे, उस समय यूपी सरकार में सचिव रहे सर्वेश चंद्र मिश्रा ने सीएम अखिलेश को चिट्ठी लिखी थी, जिस चिट्ठी में उन्होंने लिखा था, "सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण की ही तरह श्री राम जन्मभूमि पर भी कानून बनाकर मंदिर निर्माण करना चाहिए."

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इस चिट्ठी को जनता के बीच आते ही अखिलेश आग बबूला हो गए थे, और सर्वेश चंद्र मिश्रा को हटा दिया था, यूपी सरकार के सचिव को गृह विभाग से हटा कर वोटिंग लिस्ट में डाला गया था, राम मंदिर का नाम सुनते ही बौखला जाने वाले आज एक साल में मंदिर बनवा देने की बात कर रहे हैं, तब मंदिर का नाम लेते ही अधिकारी को निलंबित कर दिया था, इन सब के अलावा राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में निमंत्रण मिलने के बावजूद वहां नहीं गए थे. 

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लाखों कारसेवकों पर पिता मुलायम सिंह यादव ने चलवाई थी गोलियां 

अयोध्यावासी 30 अक्टूबर 1990 और 2 नवंबर 1990 को कारसेवकों पर चलाई गई पुलिस की गोलियों की गूंज को नहीं भूलें हैं. गोलीकांड की निशानी आज भी अयोध्या की गलियों में मौजूद है. कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव ने कई साल बाद एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा था कि "उस समय मेरे सामने मंदिर-मस्जिद और देश की एकता का सवाल था. बीजेपी वालों ने अयोध्या में 11 लाख की भीड़ कारसेवा के नाम पर लाकर खड़ी कर दी थी. देश की एकता के लिए मुझे गोली चलवानी पड़ी. हालांकि, मुझे इसका अफसोस है, लेकिन और कोई विकल्प नहीं था."

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इस घटना के दो साल बाद 6 दिसंबर, 1992 में विवादित ढांचे को गिरा दिया गया था. 1990 के गोलीकांड के बाद हुए विधानसभा चुनाव में मुलायम सिंह बुरी तरह चुनाव हार गए और कल्याण सिंह सूबे के नए मुख्यमंत्री बने. मुलायम सिंह ने इस दौरान समाजवादी पार्टी का गठन किया और उन्हें मुस्मिलों का नेता कहा जाने लगा.

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