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वीर सावरकर मानहानि केस में राहुल गांधी के खिलाफ हो रही थी सुनवाई, जब चली सबूतों वाली CD, जज-वकील सब रह गए दंग!

कोर्ट में पहले चली CD कैसे हुई खाली? पुणे की MP/MLA स्पेशल कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ पेश की गई सबूतों की सीडी जज साहब के सामने खाली निकली. हैरानी की बात ये है कि मामले का संज्ञान लेते वक्त और समन जारी करते वक्त ये कथित तौर पर चली थी. ऐसे में बड़ा सवाल ये उठता है कि सीलबंद सीडी कैसे खाली निकली. अदलात में सुनवाई के दौरान हुए इस मामले की गूंज पूरे देश में है.

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कैसा हो जब डॉक्टर के पास जाएं और आपको क्या बीमारी है, वही भूल जाएं? एग्जाम हॉल में जिस विषय की परीक्षा देने जाएं और अचानक पता चले कि आज तो दूसरे विषय की परीक्षा है? कुछ ऐसा ही हुआ है पुणे की MP/MLA स्पेशल कोर्ट में. यहां गुरुवार को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की सुनवाई के दौरान एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई. दरअसल हुआ कुछ ये कि अदालत में राहुल गांधी द्वारा विचारक विनायक दामोदर सावरकर के कथित अपमान से जुड़ी एक सीडी सबूत के तौर पर पेश की गई, लेकिन वह खाली निकली. न सीडी प्ले हुई और न ही उसमें कोई डेटा था.

आपको बता दें कि राहुल गांधी के खिलाफ यह शिकायत सावरकर के परपौत्र सत्यकी सावरकर ने दर्ज कराई थी. उन्होंने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि राहुल ने 2023 में लंदन में दिए एक भाषण के दौरान कथित तौर पर सावरकर के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. इस पूरे केस की सुनवाई मजिस्ट्रेट अमोल शिंदे कर रहे हैं.

सीलबंद सीडी खुलने पर बढ़ा ड्रामा

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एक निजी वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक राहुल के कथित भाषण के वीडियो की एक सीलबंद सीडी अदालत में पहले जमा कराई गई थी. कहा गया कि संज्ञान लेते वक्त यह सीडी अदालत में चलाई भी गई थी और उसी आधार पर राहुल गांधी को समन भी जारी किया गया था. हालांकि अदालत में उस समय हैरान कर देने वाला वाकया सामने आया, जब इस सीडी को खोला गया और चलाई गई तो यह बिल्कुल ब्लैंक निकली. इसमें कोई डेटा नहीं था. इस पूरी घटना के दौरान कोर्ट में सभी हैरान रह गए. इसके बाद शिकायतकर्ता के वकील संग्राम कोल्हटकर भी चकित रह गए और उन्होंने दावा किया कि इसी सीडी को देखने के बाद ही समन और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी.

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कोर्ट ने यूट्यूब पर वीडियो देखने का अनुरोध खारिज किया

अदालत के समक्ष राहुल गांधी के भाषण वाली सीडी खाली निकलने के बाद वकील कोल्हटकर ने मजिस्ट्रेट साहब से यूट्यूब पर उपलब्ध भाषण को सीधे देखने का अनुरोध किया, जिसका विरोध राहुल गांधी की ओर से पेश अधिवक्ता मिलिंद दत्तात्रय पवार ने किया. उन्होंने दलील दी कि ऑनलाइन कंटेंट स्वयं में प्रमाणित नहीं होता. उनकी आपत्ति को सही मानते हुए मजिस्ट्रेट शिंदे ने कहा कि URL को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के अनुरूप प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं है, इसलिए इसे अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश नहीं किया जा सकता. धारा 65-बी के तहत किसी भी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को अदालत में सबूत के रूप में मान्य कराने के लिए प्रमाणीकरण प्रमाणपत्र आवश्यक होता है.

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दो और सीडी पेश करने का अनुरोध भी खारिज

इसके बाद सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई करने वाली MP/MLA विशेष अदालत ने शिकायतकर्ता सत्यकी द्वारा दायर एक अन्य याचिका जिसमें मांग की गई थी कि राहुल गांधी के भाषण की एक अतिरिक्त सीडी चलाई जाए को भी खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई सीडी मौजूद नहीं है.

कोर्ट में पहले चली सीडी खाली कैसे हुई? जांच की मांग

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वहीं, सीलबंद सीडी जो समन जारी करने से पहले चलाई गई थी, वह खाली कैसे हो गई इसका पता लगाने और न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए कोल्हटकर ने स्थगन का अनुरोध किया, जिस पर अदालत ने सुनवाई अगले शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी. हालांकि कोल्हटकर के स्थगन के अनुरोध का पवार ने विरोध किया. अब देखने वाली बात यह होगी कि अदालत न्यायिक जांच की मांग स्वीकार करती है या नहीं और जांच में यह सामने आता है या नहीं कि पहले चलाई गई सीडी आखिर खाली कैसे हो गई.

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