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DSP ऋषिका सिंह ने वर्दी में दबाए कांवड़ियों के पैर, अखिलेश ने भी की तारीफ, सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है वीडियो
तस्वीरों में मुजफ्फरनगर की महिला पुलिस अधिकारी को महिला कावड़ियों के पैर दबाते देखा जा सकता है. अपनी ड्यूटी और फर्ज के साथ-साथ श्रद्धा और सेवा भाव की मिसाल देती इस पुलिस अधिकारी की चहुंओर तारीफ हो रही है.
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मुजफ्फरनगर से एक भावुक कर देने वाला दृश्य सामने आया है, जहां एक महिला पुलिस अधिकारी ने अपने कर्तव्य से आगे बढ़कर मानवता और श्रद्धा की मिसाल पेश की है.
कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं. पुलिस और प्रशासन की ओर से हर स्तर पर निगरानी की जा रही है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो. इसी बीच एक ऐसी तस्वीर और वीडियो सामने आया है, जिसने लाखों लोगों का दिल छू लिया.
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DSP ऋषिका सिंह ने दिखाई मानवता की मिसाल
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फुगाना क्षेत्र की सीओ (Circle Officer) ऋषिका सिंह, जो कि डीएसपी रैंक की अधिकारी हैं, की एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है. वीडियो में वे महिला कांवड़ यात्रियों के पैरों की सेवा करती दिखाई दे रही हैं. ये दृश्य मुजफ्फरनगर-शामली बॉर्डर के पास एक सेवा शिविर का है, जहां वह अपनी ड्यूटी पर थीं.
जब उन्होंने देखा कि कुछ महिला कांवड़िए पैदल यात्रा के चलते थकावट और दर्द से परेशान हैं, तो वह खुद को रोक नहीं सकीं और श्रद्धा के भाव में आकर उनके पैर दबाने लगीं. इस पूरे वाकये को किसी ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया. वीडियो के वायरल होते ही लोग उनकी प्रशंसा करते नहीं थक रहे.
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पूर्व CM अखिलेश यादव ने की ऋषिका की तारीफ
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस वीडियो को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करते हुए ऋषिका सिंह की सराहना की है. उन्होंने इसे "सेवा और श्रद्धा की सच्ची मिसाल" बताया.
ऋषिका सिंह का सफर: संघर्ष से सफलता तक
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ऋषिका सिंह का बचपन लखनऊ में बीता और यहीं से उन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद दिल्ली स्थित दौलत राम कॉलेज से बीए ऑनर्स किया. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने यूपीपीएससी (UPPSC) की तैयारी शुरू की.
2019: पहली बार पीसीएस परीक्षा दी, लेकिन असफल रहीं.
2020: इंटरव्यू राउंड तक पहुंचीं, लेकिन चयन नहीं हो पाया.
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2021: फिर से इंटरव्यू तक पहुंचीं, पर सफलता नहीं मिली.
2022: आखिरकार उन्होंने 80वीं रैंक हासिल कर पुलिस सेवा में डीएसपी पद प्राप्त किया.
सेवा से ही बनता है विश्वास
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कांवड़ यात्रा जैसे विशाल आयोजन में जहां पुलिस बल की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित मानी जाती है, वहीं ऋषिका सिंह ने यह सिद्ध किया है कि एक अधिकारी मानवता की मिसाल भी बन सकता है. उनकी यह पहल बताती है कि वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, बल्कि सेवा का प्रतीक भी हो सकती है.
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ऋषिका सिंह का यह कार्य सिर्फ एक सेवा नहीं, बल्कि समाज को दिया गया एक संदेश है कि जब श्रद्धा और मानवता साथ चलते हैं, तब असली पुलिसिंग दिखाई देती है. देश को ऐसे ही संवेदनशील, कर्मठ और सेवा भाव से ओत-प्रोत अधिकारियों की आवश्यकता है.