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उत्तरकाशी में बादल फटने से बड़ी तबाही, 15 घर बहे, अब तक 4 की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन पर पल-पल की अपडेट ले रहे सीएम धामी
राज्य सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए बादल फटने की घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. मुख्यमंत्री ने प्रशासन को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं.
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गंगोत्री धाम और मुखवा गांव के पास स्थित धराली गांव में सोमवार देर रात बादल फटने की घटना ने भारी तबाही मचाई है. इस भयावह प्राकृतिक आपदा में करीब 15 घर बह गए हैं और एक दर्जन से अधिक लोगों के बहने की आशंका है. वहीं अब तक चार लोगों की मौत की जानकारी भी सामने आ रही है.
प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, भारी बारिश के कारण खीर गाड़ और अन्य नालों में अचानक जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ गया, जिससे पानी और मलबा पहाड़ी से बहकर नीचे बसे गांवों में घुस गया.
अचानक आया पानी और मलबा
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स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि कई घरों में पानी घुस गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे. कई लोगों को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी.
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सड़कें और पुल तबाह, संपर्क टूटा
बाढ़ और मलबे के कारण सड़कें और पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे धराली गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गया है. स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है और राहत व बचाव कार्य में तेजी लाई जा रही है.
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राहत और बचाव कार्य जारी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी में बादल फटने की घटना पर कहा कि बादल फटने की सूचना आई है. पानी के साथ बहुत तेज गति से मलबा आया है. उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द राहत और बचाव का कार्य किया जाए. सेना के लोग, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभाग कोशिश कर रहा है. हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि सभी को बचाया जाए.
प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और उन्हें भोजन, पानी और आश्रय उपलब्ध कराया जा रहा है. घायलों को प्राथमिक चिकित्सा के बाद अस्पताल भेजा जा रहा है.
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सरकारी प्रतिक्रिया और जांच के आदेश
राज्य सरकार ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए बादल फटने की घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं. मुख्यमंत्री ने प्रशासन को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं.
स्थानीय लोगों में डर का माहौल
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इस घटना के बाद धराली और आसपास के गांवों में डर और घबराहट का माहौल है. लोग अभी भी संभावित भूस्खलन और बाढ़ के खतरे से डरे हुए हैं.