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टॉयलेट सीट से हाईकोर्ट की वर्चुअल सुनवाई में शामिल हुआ शख्स, सब रिकॉर्ड होते ही वीडियो हुआ वायरल

गुजरात हाईकोर्ट में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, जब एक व्यक्ति वर्चुअल सुनवाई में टॉयलेट सीट पर बैठकर शामिल हुआ. यह घटना जस्टिस निरजार एस. देसाई की बेंच के समक्ष हुई, और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिस पर लोगों का अब गुस्सा भी फूट रहा है.

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वर्चुअल कोर्ट ने कई लोगों परेशानियों को कम किया है, ख़ासकर बुजुर्ग, और बीमार लोगों के लिए. वर्चुअल कोर्ट  के ज़रिए लोग घर बैठे सुनवाई से जुड़ जाते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इस तरह के नियमों का अनुचित फायदा उठाते हैं.

टॉयलेट सीट पर बैठे शख्स का वीडियो वायरल!
वहीं इस बीच  गुजरात हाईकोर्ट में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया, जब एक व्यक्ति वर्चुअल सुनवाई में टॉयलेट सीट पर बैठकर शामिल हुआ. यह घटना जस्टिस निरजार एस. देसाई की बेंच के समक्ष हुई, और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिस पर लोगों का अब गुस्सा भी फूट रहा है. हालांकि कुछ लोग इस वीडियो फनी रिएक्शन भी दे रहे हैं. 

वायरल वीडियो देख भड़के लोग!
एक यूजर ने लिखा कि “अगर यह सच है तो कृपया कार्रवाई करें क्योंकि यह माननीय उच्च न्यायालय का अनादर है.”

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वहीं एक और यूजर ने लिखा “वीडियो इतना शर्मनाक था कि मुझे भी अपनी आंखें ढकनी पड़ीं.”

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इतना ही नहीं एक और यूजर ने लिखा “वकील को इतना पैसा देने के बाद, तारिक पे तारिक मिलने के बाद, आखिरकार उसे वो राहत मिल गई जिसकी उसे बहुत जरूरत थी... हल्का हो गया.”

वहीं एक और यूजर ने लिखा “भाई थोड़ी तो मर्यादा रखना चाहिए था.”

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टॉयलेट सीट पर बैठे शख्स का नाम समद बैटरी!
बता दें कि इस व्यक्ति का ज़ूम मीटिंग में नाम “समद बैटरी” दर्ज था, ब्लूटूथ ईयरफोन पहने वर्चुअल सुनवाई में शामिल हुआ. शुरू में उसने फोन को करीब रखा, लेकिन बाद में कैमरा दूर करने पर पता चला कि वह टॉयलेट सीट पर बैठा था. वीडियो में वह खुद को साफ करते और टॉयलेट फ्लश करते हुए दिखा, फिर बाथरूम से बाहर निकलकर एक कमरे में दोबारा स्क्रीन पर आया.

चेक बाउंस मामले में हुई थी सुनवाई!
कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, यह व्यक्ति एक आपराधिक मामले में शिकायतकर्ता था और एक प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) को रद्द करने की याचिका में प्रतिवादी के रूप में शामिल था. दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका था, और हाईकोर्ट ने FIR को रद्द कर दिया. मामला चेक बाउंस से संबंधित था.

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पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं
बता दें कि पहली बार नहीं है जब गुजरात हाईकोर्ट की वर्चुअल सुनवाई में अनुचित व्यवहार देखा गया हो. इससे पहले अप्रैल 2025 में एक याचिकाकर्ता को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान सिगरेट पीते पकड़ा गया, जिसके लिए कोर्ट ने उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया था. वहीं मार्च 2025 में धवल पटेल नामक व्यक्ति को टॉयलेट से सुनवाई में शामिल होने के लिए 2 लाख रुपये का जुर्माना और दो हफ्ते कोर्ट परिसर में बगीचे की सफाई की सजा दी गई थी. 

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