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3 महीने में हो सकती थी पिता की मौत, 21 साल की दीप्ति ने दिया जीवनदान कहा- मेरे लिए पापा से बढ़कर कुछ नहीं है

जितेंद्र सिंह पिछले तीन साल से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे. उदयपुर, अहमदाबाद और जोधपुर में इलाज के बावजूद हालत बिगड़ती गई. अंत में डॉक्टर आशीष मेहता ने परिजनों को बताया कि अब केवल लिवर ट्रांसप्लांट ही समाधान है. पत्नी रिंकू कंवर बीपी की मरीज होने के कारण डोनर नहीं बन सकीं और छोटे भाई का ब्लड मैच नहीं हुआ. ऐसे में बेटी ने आगे आकर पिता को जीवनदान दिया.

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पाली जिले के खारड़ा गांव की 21 वर्षीय दीप्ति राज मेड़तिया ने मिसाल पेश करते हुए अपने पिता को नया जीवन दिया है. दीप्ति के पिता जितेंद्र सिंह मेड़तिया (46) लिवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. डॉक्टरों ने साफ कहा कि मरीज की जान तभी बच सकती है, जब कोई नजदीकी परिजन लिवर डोनेट करे. ऐसे कठिन समय में बेटी ने बिना हिचके अपने पिता को 60% लिवर दान कर दिया.

15 घंटे तक चला ऑपरेशन

गुरुग्राम के वेदांता हॉस्पिटल में 29 अगस्त 2025 को यह जटिल ऑपरेशन किया गया. करीब 15 घंटे तक चली इस सर्जरी में डॉक्टरों की टीम ने पिता को बेटी का लिवर ट्रांसप्लांट किया. ऑपरेशन के बाद दोनों स्वस्थ हैं. दीप्ति को ICU में एक दिन और वार्ड में 5 दिन भर्ती रखने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया, जबकि जितेंद्र सिंह अभी एक महीने तक डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे.

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“मुझे पापा का साथ चाहिए था”

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वही मीडिया से बात करते हुए दीप्ति ने कहा 'मेरे लिए पापा से बढ़कर कुछ नहीं है. मैं चाहती थी कि पापा हमेशा मेरे साथ रहें. डॉक्टरों ने बताया कि लिवर तीन महीने में फिर से विकसित हो जाएगा, इसलिए मैंने बिना सोचे-समझे यह फैसला किया'

पिता के लिए बेटी के जज्बे को सलाम 

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शुरुआत में दादा गणपत सिंह ने दीप्ति के लिवर डोनेट करने पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि इतनी कम उम्र में यह जोखिम नहीं उठाना चाहिए. लेकिन बेटी के जज्बे और पिता के प्रति उसके प्रेम ने पूरे परिवार को मानने पर मजबूर कर दिया. डॉक्टर अरविंदर सिंह सोइन ने सभी जांचों के बाद पुष्टि की कि दीप्ति सुरक्षित रूप से 60% लिवर डोनेट कर सकती हैं.

तीन साल से जूझ रहे थे बीमारी से

जितेंद्र सिंह पिछले तीन साल से लिवर की बीमारी से जूझ रहे थे. उदयपुर, अहमदाबाद और जोधपुर में इलाज के बावजूद हालत बिगड़ती गई. अंत में डॉक्टर आशीष मेहता ने परिजनों को बताया कि अब केवल लिवर ट्रांसप्लांट ही समाधान है. पत्नी रिंकू कंवर बीपी की मरीज होने के कारण डोनर नहीं बन सकीं और छोटे भाई का ब्लड मैच नहीं हुआ. ऐसे में बेटी ने आगे आकर पिता को जीवनदान दिया.

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ऑपरेशन से पहले 20 यूनिट ब्लड की आवश्यकता थी. इसमें करणी सेना के सदस्यों ने सहयोग किया. दीप्ति के मामा कृष्णपाल सिंह सोनगिरा और जितेंद्र सिंह सोनगिरा ने प्लेटलेट्स डोनेट किए.

दादा-दादी ने किया अपनी पोती पर गर्व 

आज पिता और बेटी दोनों स्वस्थ हैं. पूरे गांव और समाज में खुशी का माहौल है. दादा-दादी, जो पहले इस फैसले के खिलाफ थे, अब अपनी पोती पर गर्व कर रहे हैं. दीप्ति की मां ने कहा 'दीप्ति ने न सिर्फ अपने पिता को जीवन दिया बल्कि अपनी छोटी बहन निधि और भाई श्रवण सिंह के लिए भी रोल मॉडल बन गई'

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दीप्ति वर्तमान में उदयपुर के भोपाल नोबेल कॉलेज से BA, LLB की पढ़ाई कर रही हैं.

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