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Yogi ने क्यों कहा ‘बटेंगे तो कटेंगे’ ठाकरे और Rahul Gandhi की ये ‘दोस्ती’ देख समझ जाएंगे !

Bal Thackeray की पुण्यतिथि पर पहली बार राहुल गांधी ने किया उन्हें याद, क्या वाकई राहुल गांधी बाल ठाकरे के विचारों के समर्थक हैं या फिर सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ठाकरे के विचारों का समर्थन करने का ढोंग रच रहे हैं, देखिये ये खास रिपोर्ट !

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यूं ही नहीं कहते राजनीति में सबकुछ जायज है। अगर ऐसा नहीं होता तो जिस कांग्रेस के बारे में हिंदू हृदय सम्राट बाल ठाकरे कभी कहा करते थे। मैं शिव सेना को कांग्रेस नहीं बनने दूंगा। महाराष्ट्र की सत्ता हासिल करने के लिए उनके बेटे उद्धव ठाकरे आज उसी कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाते।और ना ही राहुल गांधी कभी उद्धव ठाकरे से हाथ मिलाते। लेकिन यहां सवाल सत्ता का है। जिसे हासिल करने के लिए विचारधारा से भी समझौता करना पड़े तो राहुल गांधी और उद्धव ठाकरे को वो भी मंजूर है। इसीलिये दोनों नेताओं ने महाराष्ट्र जीतने के लिए एक दूसरे से हाथ मिलाया। बाल ठाकरे को उनकी पुण्यतिथि पर पहली बार याद भी किया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि।


"क्या वाकई राहुल गांधी बाल ठाकरे के विचारों के समर्थक हैं या फिर सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ठाकरे के विचारों का समर्थन करने का ढोंग रच रहे हैं। और हिंदू हृदय सम्राट बाल ठाकरे के समर्थकों की पीठ पर लात रख कर सत्ता के सिंहासन पर पहुंचना चाहते हैं ?

ये सवाल दरअसल इसलिये उठ रहा है। क्योंकि महाराष्ट्र के महाविकास अघाड़ी गठबंधन में राहुल गांधी तब से उद्धव ठाकरे के साथ हैं जब साल 2019 में बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने सीएम की कुर्सी के लिए कांग्रेस से हाथ मिला लिया था। यानि राहुल और उद्धव ठाकरे की सियासी दोस्ती को पांच साल हो गये।लेकिन इसके बावजूद एक भी मौका ऐसा नहीं आया। जब कांग्रेस के जन नायक कहे जाने वाले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर हिंदू हृदय सम्राट बाल ठाकरे की जयंती या फिर पुण्यतिथि पर एक शब्द भी कहा हो। लेकिन इस बार 17 नवंबर को खुद राहुल गांधी ने बाल ठाकरे की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। और सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा।" बालासाहेब ठाकरे जी को उनकी 12वीं पुण्यतिथि पर याद करते हुए मेरी संवेदनाएं उद्धव ठाकरे जी, आदित्य और पूरे शिवसेना परिवार के साथ हैं"

अब तक के अपने बीस साल से सियासी करियर में राहुल गांधी ने कभी भी बाल ठाकरे के समर्थन में दो शब्द भी नहीं कहे होंगे। लेकिन इस बार बाल ठाकरे को उनकी पुण्य तिथि पर याद भी किया।  और ट्वीट भी किया। जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह यही बताई जा रही है कि। इस बार बाल ठाकरे की पुण्यतिथि के वक्त महाराष्ट्र चुनाव भी हो रहे हैं। ऐसे में राहुल गांधी अगर बाल ठाकरे को उनकी पुण्यतिथि पर नहीं याद करते तो बीजेपी उन्हें ठाकरे विरोधी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ती। शायद यही वजह कि मजबूरी में राहुल गांधी ने बाल ठाकरे को उनकी पुण्यतिथि पर नमन किया। जिससे महाराष्ट्र के वोटर्स भी खुश हो जाएं। और महाविकास अघाड़ी को सियासी फायदा भी हो जाए। बात यहीं खत्म नहीं होती। एक तरफ जहां भाई राहुल गांधी बाल ठाकरे को याद कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र की एक रैली में उनकी बहन प्रियंका गांधी भी अपनी जुबान से बाल ठाकरे का नाम लेकर मोदी को कोसने में लगी हुई थीं।

चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस जिस तरह का पैंतरा अपना रही है। उसका ये पैंतरा शायद बाल ठाकरे पहले ह पहचान गये थे इसीलिये उन्होंने राहुल गांधी का नाम आते ही एक इंटरव्यू में कह दिया था कि। छोड़ रे ये कल का पोपट। बाल ठाकरे के इसी पोपट शब्द के बहाने कुछ ही दिनों पहले बीजेपी ने भी उन पर तंज मारा था।

बाल ठाकरे के निधन के बारह साल बाद राहुल गांधी ने उनकी पुण्यतिथि पर ट्वीट किया तो कांग्रेस के ही पुराने नेता मिलिंद देवड़ा ने एक और बात महाराष्ट्र के लोगों को याद दिलाते हुए बताया कि।

"मैं कांग्रेस द्वारा 12 साल बाद बालासाहेब ठाकरे की विरासत को स्वीकार करने का स्वागत करता हूं, 2012 में, मुंबई से केंद्रीय मंत्री होने के नाते मैंने प्रस्ताव दिया था कि यूपीए सरकार बालासाहेब के लिए राष्ट्रीय शोक का दिन घोषित करे, हालांकि तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह इसके समर्थक थे, लेकिन गठबंधन के भीतर कुछ तत्वों ने इस विचार को रोक दिया था"

कभी कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे मिलिंद देवड़ा ने ये सनसनीखेज खुलासा ऐसे वक्त किया जब राहुल गांधी ने बाल ठाकरे के निधन के बारह साल बाद उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसी बात से समझ सकते हैं कि कांग्रेस बाल ठाकरे से इस कदर नफरत करती थी कि उनके निधन पर राष्ट्रीय शोक का प्रस्ताव ठुकरा दिया गया था। और आज वही कांग्रेस बाल ठाकरे कि विरासत पर कदम रख कर महाराष्ट्र की सत्ता हासिल करने का ख्वाब देख रही है। अगर आपको लगता है कि बाल ठाकरे से कांग्रेस की नफरत का सिलसिला यहीं खत्म हो गया। तो आपको एक बात और याद दिलाते हैं। साल 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी ने गोरेगांव सीट से युवराज मोहिते को टिकट देकर चुनाव लड़ाया था। ये वही युवराज मोहिते थे जिन्होंने 8 जनवरी 1993 को शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के खिलाफ मुंबई दंगों की जांच के लिए गठित श्रीकृष्णा आयोग के सामने गवाही दी थी। मोहिते की ये गवाही दंगों में बाल ठाकरे और शिवसेना के शामिल होने को लेकर फैसला लेने में मददगार साबित हुई थी। इसी बात से समझ सकते हैं कि हिंदू हृदय सम्राट बाल ठाकरे से कांग्रेस कितनी नफरत करती है। और आज उसी कांग्रेस के नेता राहुल गांधी बाल ठाकरे को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहे हैं। तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह यही बताई जा रही है कि कांग्रेस बाल ठाकरे की विरासत पर कदम रख कर महाराष्ट्र की सत्ता हासिल करने के लिए ये सब कुछ कर रही है।कांग्रेस की ये रणनीति देख कर वीर सावरकर की एक बात याद आ रही है। जब उन्होंने कहा था कि जिस दिन हिंदू एक हो जाएंगे उस दिन कांग्रेसी वोट के लिए कोट पर जनेऊ पहनेंगे। और आज ये हिंदुओं की एकता ही है जिसने राहुल गांधी को भी हिंदू हृदय सम्राट के सामने झुकने पर मजबूर कर दिया। इसीलिये योगी आदित्यनाथ कहा करते हैं। बटेंगे तो कटेंगे। एक हैं तो सेफ हैं।

कभी बीजेपी के दम पर सत्ता में आने वाले उद्धव ठाकरे ने आज उसी सत्ता के लिए जिस तरह से कांग्रेस से हाथ मिलाया है। 

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