Advertisement
'कौन बड़ा भाई होगा यह जब तय होगा तब...', JDU को बड़ा भाई मानने को तैयार नहीं उपेंद्र कुशवाहा, पटना में करने जा रहे शक्ति प्रदर्शन
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा पाला बदलने के लिए जाने जाते हैं. साल 2010 में वे जेडीयू में थे. साल 2015 में उनकी पार्टी ने बीजेपी से मिलकर चुनाव लड़ा था और 2020 का विधानसभा चुनाव तीसरा मोर्चा बनाकर लड़े थे. शुक्रवार को पटना में वह एक रैली करने जा रहे हैं, जिसे शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है.
Advertisement
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में खींचतान काफी बढ़ गई है. सीट शेयरिंग से पहले एनडीए के घटक दलों में भी आपसी खींचतान देखी जा रही है. सभी 5 दल अधिक से अधिक सीटें हासिल करने की जुगत में हैं.
जेडीयू बड़े भाई की भूमिका में रहेगा - मंत्री श्रवण कुमार
बुधवार को नालंदा में जेडीयू के नेता और बिहार सरकार में मंत्री श्रवण कुमार ने कहा था कि जेडीयू इस चुनाव में बड़े भाई की भूमिका में रहेगा. इस पर पलटवार करते हुए राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कौन बड़ा भाई होगा यह जब तय होगा तब तय होगा. उपेंद्र कुशवाहा जदयू को बड़ा भाई बताने पर काफी सहज नहीं दिखे थे.
Advertisement
उपेंद्र कुशवाहा जिस कोइरी समाज से आते हैं वह पारंपरिक रूप से एनडीए का वोटर माना जाता रहा है. लेकिन बीते लोकसभा चुनाव में कुशवाहा मतदाताओं ने दोनों गठबंधन को वोट किया. महागठबंधन ने 6 कुशवाहा उम्मीदवारों को टिकट दिया था. इसके बाद कुशवाहा मतदाताओं का एक हिस्सा महागठबंधन की तरफ चला गया था. यही वजह है कि लोकसभा चुनाव हारने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा, ताकि कुशवाहा मतदाताओं को रिझाया जा सके.
Advertisement
2020 चुनाव में कुशवाहा बने एनडीए के हार का कारण
पिछले विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी (राष्ट्रीय लोक समता पार्टी) कई सीटों पर एनडीए के हार की वजह बनी थी. पिछले चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा ने तीसरा मोर्चा बनाया था. उनकी पार्टी 99 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. इनमें से सिर्फ 5 सीटों पर उनके उम्मीदवार जमानत बचा पाए थे. चार सीटें एनडीए हार गई थी. उपेंद्र कुशवाहा एनडीए के 13 उम्मीदवारों के हार का कारण बने.
Advertisement
यह भी पढ़ें
उपेंद्र कुशवाहा भी पाला बदलने के लिए जाने जाते हैं. साल 2010 में वे जेडीयू में थे. साल 2015 में उनकी पार्टी ने बीजेपी से मिलकर चुनाव लड़ा था और 2020 का विधानसभा चुनाव तीसरा मोर्चा बनाकर लड़े. इस बार चुनाव के ऐलान से पहले वे 5 सितंबर को पटना के मिलर स्कूल में रैली करने जा रहे हैं. इस रैली को शक्ति प्रदर्शन भी माना जा रहा है, ताकि सीटों के लिए अधिक दबाव बनाया जा सके.