×
जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

Zero पर सिमटी Congress तो Amit Shah बोले- पार्टी जब परिवार वंदन में लग जाए तो यही होता है !

Delhi Election Result: साल 2014 के लोकसभा चुनाव से मोदी के दम पर बीजेपी ने जहां लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता से कांग्रेस को खदेड़ दिया तो वहीं अब राजधानी दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस एक सीट जीतना तो छोड़ ही दीजिये दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार खाता भी नहीं खोल पाई... जिस पर बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने गजब मौज ले ली !

Zero पर सिमटी Congress तो Amit Shah बोले- पार्टी जब परिवार वंदन में लग जाए तो यही होता है !
Advertisement
जिस राजधानी दिल्ली में बैठ कर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने दशकों तक देश की सत्ता चलाई। उसी राजधानी दिल्ली में कांग्रेस की हालत एक दिन ऐसी हो जाएगी कि लगातार तीन विधानसभा चुनाव में वो खाता भी नहीं खोल पाएगी।ये शायद ही किसी ने सोचा होगा। लेकिन मोदी राज में कुछ ऐसा ही हो रहा है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से मोदी के दम पर बीजेपी ने जहां लगातार तीसरी बार केंद्र की सत्ता से कांग्रेस को खदेड़ दिया।तो वहीं अब राजधानी दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस एक सीट जीतना तो छोड़ ही दीजिये। दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार खाता भी नहीं खोल पाई। जिस पर बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह ने गजब मौज ले ली।

जीरो की खोज भले ही आर्यभट्ट ने की हो। लेकिन जैसे जैसे चुनावों में देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस प्रदर्शन करती जा रही है। ऐसा लग रहा है आर्यभट्ट ने जीरो का अविष्कार गणित के लिए नहीं। कांग्रेस के लिए ही किया हो। इसीलिये साल 2014 के बाद तीन बार लोकसभा चुनाव हुए लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को दिल्ली की 7 में से एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई, 2014, 2019 और 2024 के चुनाव में जीरो पर ही सिमट गई।

बात यहीं खत्म नहीं होती। जिस दिल्ली में बैठ कर कांग्रेस ने दशकों तक देश पर राज किया।उस दिल्ली में कांग्रेस ने शीला दीक्षित के राज में लगातार तीन बार सत्ता हासिल की और खुद शीला दीक्षित 1998 से साल 2013 तक मुख्यमंत्री रहीं। लेकिन जैसे ही अरविंद केजरीवाल राजनीति में उतरे।राजधानी दिल्ली में कांग्रेस सिमटती गई।

दिल्ली विधानसभा चुनाव


साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 8 सीटें नसीब हुईंसाल 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीरो पर ही सिमट गई। साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस जीरो पर लुढ़क गई


साल 2013 से साल 2020 तक अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी कांग्रेस के खात्मे की कहानी लिखती रही। और साल 2025 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में तो बीजेपी ने भी कांग्रेस का वही हाल किया। जो केजरीवाल ने साल 2015 और 2020 में किया था। इस बार बीजेपी ने कांग्रेस को जीरो पर समेट दिया। जिस पर बीजेपी के चाणक्य कहे जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह ने सीधे गांधी परिवार को निशाने पर लेते हुए कहा।"एक पार्टी जब परिवार वंदन में लग जाए, तब उसकी क्या दुर्दशा होती है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण कांग्रेस है, जिस दिल्ली में आज से एक दशक पहले कांग्रेस की 15 साल सरकार रही, वहां 2014 से हुए 6 चुनावों में कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला है, इस विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटों पर कांग्रेस की जमानत जब्त हो गई है, राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को अगर कहीं स्थायित्व मिला है, तो वह शून्य (0) में मिला है, यह एक परिवार की सेवा में समर्पित कांग्रेस की देशभर में स्थिति को दर्शाता है"

बात अमित शाह तक ही सीमित नहीं है। कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे आचार्य प्रमोद कृष्णम भी कांग्रेस की पस्त होती हालत के लिए गांधी परिवार को ही जिम्मेदार मानते हैं।इसीलिये जब नई दिल्ली से चुनाव हारने के बाद कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि।"नई दिल्ली सीट से इस शर्मनाक हार के लिए मैं, और केवल मैं, व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हूं दिल्ली का वोटर बदलाव चाहता था, और मैं इस भावना में लोगों में खरा नहीं उतरा"

तो आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उन्हें सलाह देते हुए कहा कि "नेतृत्व की “पराजय” को अपने ऊपर ओढ़ने की बजाय पार्टी को राहुल गांधी और उनके “नौकरों” से “मुक्ति” दिलाने का प्रयास करें"

यानि पुराने कांग्रेसी नेता आचार्य प्रमोद कृष्णम भी ये बात जानते हैं कि समस्या कांग्रेस में नहीं है।राहुल गांधी में है। इसीलिये अमित शाह के बाद उन्होंने भी कांग्रेस को राहुल गांधी से मुक्ति दिलाने की सलाह दे डाली।लेकिन ये बात वो भी जानते हैं कि गांधी परिवार से कांग्रेस का मोह इतनी आसानी से नहीं छूटने वाला है। और जब तक ये मोह नहीं छूटेगा। तब तक इस बात की भी कोई गारंटी नजर नहीं आ रही है कि भविष्य में कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आएगी। सुप्रिया श्रीनेत। पवन खेड़ा। रागिनी नायक जैसे कांग्रेस के कुछ नेता और समर्थक भले ही राहुल गांधी में जन नायक की छवि देखते हों। लेकिन जनता लगातार राहुल गांधी को नकार रही है।और ये आज से नहीं साल 2014 से चल रहा है।जब से मोदी राज्य से निकल कर देश की राजनीति में आए हैं।वैसे आपको क्या लगता है। कांग्रेस का यही हाल रहा तो क्या राहुल गांधी कभी भविष्य में प्रधानमंत्री बन पाएंगे। 

यह भी पढ़ें

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
LIVE
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Close
ADVERTISEMENT
NewsNMF
NMF App
Download
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें