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'वोटर अधिकार यात्रा' का आज दूसरा दिन... राहुल-तेजस्वी का कारवां औरंगाबाद से पहुंचेगा गया, जानें क्या है खास रणनीति

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासत गरमाती दिख रही है. विपक्ष ने वोट चोरी का मुद्दा उठाकर सड़क पर मोर्चा संभाल लिया है. इसी कड़ी में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने रविवार को सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की. पहले दिन औरंगाबाद में रुकने के बाद सोमवार को यह यात्रा देव सूर्य मंदिर से निकलकर रफीगंज होते हुए गया पहुंचेगी, जहां दोनों नेता सभा को संबोधित करेंगे.

Source: x (Day 1 Voter Adhikar Yatra )
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बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और चुनावी मौसम धीरे-धीरे अपने चरम की ओर बढ़ रहा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने तरीके से जनता को लुभाने की कोशिश में जुटे हैं. एक ओर सत्ताधारी दल अपनी उपलब्धियां गिनाने में व्यस्त है तो दूसरी ओर विपक्ष जनता से सीधे जुड़ाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है. इसी कड़ी में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी तथा राजद नेता तेजस्वी यादव ने ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की है. आज इस यात्रा का दूसरा दिन है. 

सासाराम से शुरू हुई यात्रा

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की इस यात्रा का आगाज रविवार को सासाराम जिले से हुआ. पहले ही दिन यहां भारी जनसमूह इकट्ठा हुआ, जहां राहुल गांधी ने मंच से बीजेपी और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि देश में “बड़ा चुनावी घोटाला” हो रहा है और लाखों लोगों के वोटर लिस्ट से नाम गायब कर दिए गए हैं. राहुल गांधी का दावा है कि कई नागरिकों ने उनसे मुलाक़ात कर वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने की शिकायत की है. इस यात्रा का पहला पड़ाव औरंगाबाद रहा, जहां रात्रिविश्राम के बाद सोमवार की सुबह यात्रा औरंगाबाद के देव सूर्य मंदिर से शुरू हुई. इसके बाद कारवां अम्बा, कुटुंबा और रफीगंज होते हुए गया जिले के गुरारू पहुंचेंगे और खलीस पार्क में आयोजित सभा को संबोधित करेंगे. इस यात्रा के ज़रिए राहुल और तेजस्वी एक तीर से दो निशाने लगा रहे हैं. एक तो चुनाव आयोग पर दबाव और दूसरी तरफ चुनावी तैयरिं के बीच आम लोगों से मुलाकात करते हुए जनसभा कर जनता के बीच सीधे तौर पर अपनी बात पहुँचने की कोशिश. 

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चुनाव आयोग की सख्त प्रतिक्रिया

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राहुल गांधी के आरोपों ने चुनावी माहौल को और भी गरमा दिया. लेकिन इसी बीच चुनाव आयोग ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनकी बातों को पूरी तरह खारिज कर दिया. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि वोट चोर" और दोहरे मतदान जैसे आरोप पूरी तरह निराधार हैं. आयोग का कहना है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी तरीके से की जाती है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों और स्टेकहोल्डर्स को शामिल किया जाता है. इसके साथ ही चुनाव आयोग ने राहुल गांधी को सात दिन का समय दिया है. या तो वे अपने आरोपों के सबूत पेश करें और शपथपत्र दें, नहीं तो सार्वजनिक तौर पर माफ़ी मांगें. आयोग ने साफ कर दिया कि अगर कोई प्रमाण नहीं दिया गया तो इन आरोपों को बेबुनियाद माना जाएगा.

जनता से सीधा संवाद

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इस बीच गौर करने वाली बात यह है कि यह यात्रा पैदल मार्च के बजाय वाहनों से की जा रही है, लेकिन इसके बावजूद राहुल गांधी और तेजस्वी यादव रास्ते में लगातार स्थानीय लोगों से मुलाक़ात कर रहे हैं. कभी चाय की दुकान पर रुककर बातचीत, तो कभी किसानों और छात्रों के बीच जाकर उनके मुद्दे सुनना यह सब विपक्ष की रणनीति का हिस्सा है. इस तरह जनता से सीधे जुड़ने का प्रयास बिहार की राजनीति को नए समीकरण दे सकता है.

16 दिन लंबी होगी यात्रा

यह यात्रा केवल एक-दो जिलों तक सीमित नहीं है. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव अगले 16 दिनों में 20 से ज्यादा जिलों को कवर करेंगे और लगभग 1,300 किलोमीटर का सफर तय करेंगे. यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना में एक विशाल रैली के साथ होगा. इस रैली में INDIA गठबंधन के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है. इसे विपक्ष की एक बड़ी शक्ति-प्रदर्शन सभा माना जा रहा है.

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विपक्ष के लिए बड़ा दांव

बिहार हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति का अहम केंद्र रहा है. राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की तर्ज पर यह ‘वोटर अधिकार यात्रा’ बिहार में विपक्ष के लिए बड़ा दांव साबित हो सकती है. कांग्रेस और राजद दोनों ही चाहते हैं कि जनता में यह संदेश जाए कि उनके वोट की ताकत सबसे बड़ी है और कोई भी सत्ता पक्ष उसे छीन नहीं सकता. तेजस्वी यादव का कहना है कि यह यात्रा केवल राजनीति के लिए नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक को उसके संवैधानिक अधिकारों की याद दिलाने के लिए है. वहीं राहुल गांधी ने सभा में कहा कि “यह लड़ाई संविधान को बचाने की है.”

सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया

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सत्ताधारी दलों ने इसे विपक्ष की ‘डर की राजनीति’ करार दिया है. उनका कहना है कि विपक्ष चुनाव से पहले केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहा है. बीजेपी नेताओं ने दावा किया है कि बिहार की जनता विकास और स्थिरता के नाम पर उन्हें दोबारा सत्ता में लाएगी.

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बता दें कि बिहार की सियासत में यह ‘वोटर अधिकार यात्रा’ अब चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यह पहल क्या वास्तव में जनता के बीच विपक्ष को मजबूती देगी या फिर सत्ताधारी दल इसे अपनी राजनीतिक चालाकी से बेअसर कर देंगे. यह तो आने वाले दिनों में साफ होगा. लेकिन इतना तय है कि बिहार विधानसभा चुनाव का मैदान अब और भी दिलचस्प और टक्कर भरा होने जा रहा है.

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