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बिना नीतीश के अपना सीएम बना सकती है BJP! बिहार चुनाव के रुझानों से साफ हो रही तस्वीर, जानिए कैसे बन रहा समीकरण

14 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक के रुझानों में NDA दलों में बीजेपी 90, जेडीयू 79, चिराग की पार्टी 20, HAM 4 और कुशवाहा की पार्टी RLM 4 सीटों पर आगे चल रही है. ऐसे में अगर इन रुझानों पर नजर डाली जाए, तो नीतीश को साइड कर बीजेपी 90+ चिराग की LJPR 20+ मांझी की (HAM) 4+ कुशवाहा की (RLM) 4 सीट को मिलाकर कुल 118 सीटें हो जाएंगी.

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बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों की काउंटिंग जारी है. NDA ऐतिहासिक और प्रचंड जीत के साथ सरकार बनाने जा रही है. दोपहर 2 बजे तक की रिपोर्ट में NDA 200 सीटों पर बढ़त बनाए हुई है. पीएम मोदी और नीतीश का जादू फिर से चला है. महागठबंधन सबसे बुरे हार से गुजरती नजर आ रही है. इस बीच बिहार में नई सरकार बनाने का एक नया समीकरण सामने आया है. सभी 243 सीटों में सबसे ज्यादा 90+ सीटें बीजेपी जीतती नजर आ रही है. ऐसे में नए समीकरण के मुताबिक, बीजेपी बिना नीतीश के अपना सीएम बना सकती है. तो चलिए जानते हैं कि आखिर यह कैसे संभव हो सकता है? 

बिना नीतीश के अपना सीएम बना सकती है बीजेपी 

14 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक के रुझानों में NDA दलों में बीजेपी 90, जेडीयू 79, चिराग की पार्टी 20, HAM 4 और कुशवाहा की पार्टी RLM 4 सीटों पर आगे चल रही है. ऐसे में अगर इन रुझानों पर नजर डाली जाए, तो नीतीश को साइड कर बीजेपी 90+ चिराग की LJPR 20+ मांझी की (HAM) 4+ कुशवाहा की (RLM) 4 सीट को मिलाकर कुल 118 सीटें हो जाएंगी. 

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बहुमत के लिए 122 सीटों की जरूरत

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बीजेपी की 90, चिराग की 20, मांझी और कुशवाहा की 4-4 सीटों को मिलाकर कुल आंकड़ा 118 सीटों का बन रहा है. उनमें अगर 4 और सीटें मिला दी जाए, तो बहुमत का आंकड़ा 122 हो जाएगा. बिहार में किसी भी पार्टी को सरकार बनाने के लिए यह आंकड़ा छूना जरूरी है. ऐसे में हो सकता है कि बीजेपी लेफ्ट के किसी 5 अन्य विधायकों को जोड़कर यह आंकड़ा पार कर जाए और प्रदेश में पहली बार खुद का मुख्यमंत्री उतार दे. हालांकि, यह इतना आसान नहीं है, लेकिन आंकड़ों के अनुसार इस तरह का समीकरण बन सकता है. 

नीतीश के महागठबंधन में जाने पर भी बीजेपी बना लेगी सरकार 

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जो समीकरण बीजेपी बिना नीतीश कुमार के बना सकती है. ऐसे में अगर यही समीकरण नीतीश कुमार महागठबंधन में जाकर बनाए, तो फिर क्या आंकड़ा बन सकता है? इस सवाल पर बिहार यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर प्रमोद कुमार ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया है कि 'बीजेपी जोड़-तोड़ में माहिर है और राज्यपाल भी उसी का है. नतीजों से साफ है कि नीतीश कुमार अगर NDA को छोड़ेंगे, तो बीजेपी कांग्रेस और बाकी पार्टियों के विधायकों को तोड़कर सरकार बना लेगी.' 

'8 से 10 विधायकों का जुगाड़ करना कोई बड़ी बात नहीं'

इस मामले पर एक और पॉलीटिकल एनालिस्ट प्रियदर्शी रंजन ने बताया कि 'बीजेपी के लिए अपना मुख्यमंत्री बनाने का रास्ता साफ हो रहा है और ऐसे में उसके लिए 8 से 10 विधायकों का जुगाड़ करना कोई बड़ी बात नहीं है. अगर बीजेपी ऐसा करेगी, तो गठबंधन सिर्फ धर्म बचाने के लिए, वरना अब उस पर नीतीश का प्रेशर ज्यादा काम नहीं करेगा.' रंजन का यह भी कहना है कि 'सीटों के बंटवारे के समय से ही इस बात का आभास हो गया था कि बीजेपी ने इस समीकरण को जरूर में ध्यान रखा है और ऐसे में आज के रिजल्ट में नीतीश कुमार भले ही 2020 के चुनाव से ज्यादा मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है.' 

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NDA ने नीतीश के चेहरे पर लड़ा चुनाव

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बता दें कि जून 2025 और 16 अक्टूबर को दो अलग-अलग इंटरव्यू में बिहार विधानसभा चुनाव में सीएम चेहरे को लेकर पूछे गए सवाल पर अमित शाह ने कहा था कि मुख्यमंत्री चेहरे का फैसला सभी सहयोगी दल मिलकर करेंगे. उनके इस बयान के बाद विवाद शुरू हो गया था, लेकिन 1 नवंबर को एक इंटरव्यू के दौरान अमित शाह ने स्पष्ट कर दिया कि 'इसमें कोई भी कंफ्यूजन नहीं है और मैं फिर से स्पष्ट करना चाहता हूं कि नीतीश ही मुख्यमंत्री है और चुनाव जीतने के बाद भी वही रहेंगे.'

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