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आत्मविश्वास से भरी चाल, सीएम का हाथ पकड़कर ऊपर उठाया और बिहारी अंदाज में लहरा दिया गमछा, मोदी-नीतीश की जुगलबंदी देख तेजस्वी-राहुल की टेंशन बढ़ना तय
बिहार में चुनावी माहौल गरम है. 22 अगस्त को पीएम मोदी गयाजी पहुंचे, जहां उन्होंने विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया और औंटा-सिमरिया छह लेन पुल का लोकार्पण किया. इस दौरान मोदी और नीतीश की गर्मजोशी भरी मुलाकात ने समर्थकों का उत्साह बढ़ाया और विपक्ष की टेंशन भी. मोदी के गमछा लहराने और नीतीश का हाथ पकड़कर उठाने के नजारे ने साफ संकेत दिया कि एनडीए गठबंधन मजबूती से मैदान में है.
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बिहार में चुनावी माहौल तेज हो चुका है. सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों ही अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में उतर चुके हैं. नेता गांव-गांव जाकर वोटरों को साध रहे हैं. इस बीच शुक्रवार को गयाजी से आई एक तस्वीर ने बिहार की राजनीति में नई हलचल मचा दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गर्मजोशी ने समर्थकों का उत्साह बढ़ा दिया, वहीं विपक्ष की टेंशन और बढ़ा दी.
मोदी-नीतीश की जबरदस्त जुगलबंदी
22 अगस्त को पीएम मोदी बिहार दौरे पर थे. यहां उन्होंने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया. इसी दौरान गंगा नदी पर बने औंटा-सिमरिया छह लेन पुल का लोकार्पण भी हुआ. इस दौरान पीएम मोदी और नीतीश साथ नजर आए. दोनों के बीच मुस्कान, बातचीत और हल्की-फुल्की ठिठोली ने माहौल को राजनीतिक दृष्टिकोण से यादगार बना दिया. मोदी ने जनता की ओर गमछा लहराकर अभिवादन किया, तो गंगा तट पर “मोदी-मोदी” के नारे गूंज उठे. नीतीश भी बराबर हाथ जोड़कर जनता को नमन करते दिखे. तभी पीएम मोदी ने नीतीश का हाथ पकड़कर ऊपर उठाया. यह नजारा साफ संकेत था कि एनडीए गठबंधन पहले से ज्यादा मजबूती के साथ मैदान में उतर रहा है.
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पीएम मोदी ने लहराया गमछा
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समारोह का सबसे यादगार क्षण वह रहा जब पीएम मोदी ने अपने गले का गमछा उतारकर लहराया. भीड़ ने जोरदार नारों और तालियों से उनका स्वागत किया. यह दृश्य गयाजी के लोगों के लिए हमेशा खास रहेगा. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह सिर्फ एक इशारा नहीं, बल्कि जनता से सीधा जुड़ाव था, जो मोदी के अंदाज की पहचान बन चुका है.
क्यों खास है मोदी-नीतीश की जोड़ी
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बिहार की राजनीति में मोदी और नीतीश की जोड़ी हमेशा अहम रही है. नीतीश की सुशासन वाली छवि और मोदी की लोकप्रियता मिलकर एनडीए को मजबूत आधार देती है. बीते चुनावों में भी यह फार्मूला कारगर साबित हुआ था और विपक्ष को हार का सामना करना पड़ा था. विशेषज्ञों का कहना है कि गयाजी की यह तस्वीर भी संकेत देती है कि यह जोड़ी चुनावी रण में विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती बनने वाली है.
विपक्ष की बढ़ी टेंशन
तेजस्वी यादव और राहुल गांधी लगातार यह प्रचार कर रहे थे कि नीतीश कुमार अब कमजोर पड़ चुके हैं. तेजस्वी तो उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं. लेकिन गयाजी की तस्वीर ने इस धारणा को ध्वस्त कर दिया. मोदी और नीतीश की जुगलबंदी ने यह साफ कर दिया कि न सिर्फ नीतीश पूरी तरह सक्रिय हैं, बल्कि बीजेपी और जेडीयू का गठजोड़ भी अटूट है. यानी विपक्ष का “दरार वाली थ्योरी” यहां फेल हो गई.
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जनता को मिला विकास का तोहफा
राजनीतिक संदेशों के साथ-साथ यह दौरा विकास के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा. 1.86 किलोमीटर लंबे औंटा-सिमरिया पुल से मोकामा और बेगूसराय के बीच की दूरी घट जाएगी. भारी वाहनों का रास्ता छोटा होगा और यात्रा दूरी करीब 100 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इससे व्यापार और उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा.
तस्वीरों ने दिया बड़ा सियासी संदेश
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गयाजी से आई तस्वीरें महज उद्घाटन समारोह की झलकियां नहीं थीं, बल्कि यह बिहार की राजनीति का नया दृश्य थीं. मोदी-नीतीश की यह दोस्ताना केमेस्ट्री एनडीए की मजबूती का संदेश देती है.
जनता के बीच यह छवि विपक्ष के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है. खासकर तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के लिए यह साफ संकेत है कि आने वाला चुनावी रण आसान नहीं होगा.