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'राम मंदिर को अस्पताल-कॉलेज...', सनातन पर बयान, श्रीराम का कथित अपमान... वो 4 वजह जिस कारण छपरा हारे खेसारी लाल

Bihar Election Result 2025: एनडीए को मिले मजबूत जनादेश के बीच छपरा सीट पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला. भोजपुरी स्टार और आरजेडी उम्मीदवार खेसारी लाल यादव भारी भीड़ के बावजूद बीजेपी की छोटी कुमारी से 7,600 वोटों से हार गए. उन्हें 79,245 वोट मिले, जबकि छोटी कुमारी ने 86,845 वोट हासिल किए. खेसारी की हार की सबसे बड़ी वजह उनका राम मंदिर पर विवादित बयान माना जा रहा है, जिसने हिंदू वोट बैंक को नाराज़ कर दिया और बीजेपी ने इसे चुनाव में प्रभावी तरीके से भुनाया.

Khesari Lal Yadav (File Location)
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Bihar Chunav Result 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार एनडीए के पक्ष में जबरदस्त जनसमर्थन देखने को मिला और नतीजों ने इसकी पूरी पुष्टि भी कर दी. कुल सीटों में बढ़त के साथ एनडीए जहां सत्ता की ओर मजबूती से बढ़ता दिखा, वहीं चुनावी लड़ाई के बीच एक सीट ऐसी रही जिस पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी थीं. वह थी छपरा विधानसभा सीट जिस पर भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव मैदान में थे. आरजेडी उम्मीदवार के रूप में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए माना जा रहा था कि वे भारी अंतर से जीत दर्ज करेंगे, लेकिन नतीजों ने सभी अनुमानों को गलत साबित कर दिया.

दरअसल, छपरा सीट पर मुकाबला रोमांचक रहा और अंत में बीजेपी की उम्मीदवार छोटी कुमारी ने अप्रत्याशित जीत हासिल कर ली. उन्हें कुल 86,845 वोट मिले, जबकि खेसारी लाल यादव 79,245 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे. खेसारी की चुनावी सभाओं में उमड़ने वाली भारी भीड़ के कारण उनके समर्थकों में जीत की उम्मीद बहुत मजबूत थी, लेकिन भीड़ वोटों में तब्दील नहीं हो सकी. ऊपर से प्रचार के दौरान दिए गए कुछ विवादास्पद बयानों ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं और अंत में यह सीट उनके हाथ से निकल गई.

राम मंदिर पर बयान से बढ़ी नाराजगी

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खेसारी लाल यादव की हार का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है उनका राम मंदिर पर दिया गया विवादित बयान. उन्होंने प्रचार के दौरान कहा था कि मंदिर में पढ़कर कोई मास्टर बनेगा क्या. यहां अस्पताल या कॉलेज बनना चाहिए. यह बयान छपरा जैसे पारंपरिक हिंदू बहुल क्षेत्र में लोगों को रास नहीं आया. स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ नाराजगी तेज हो गई और विरोधियों ने इसे मुद्दा बनाकर लगातार उन पर हमले किए. सोशल मीडिया पर ‘छपरा हार: ताड़े छक्का’ जैसा गाना वायरल हुआ, जिसने माहौल को पूरी तरह बदल दिया. बीजेपी ने भी इसे राम मंदिर के अपमान के तौर पर दिखाया और हिंदू वोट बैंक में खेसारी के खिलाफ एक मजबूत ध्रुवीकरण हो गया. इस एक बयान ने उनकी बनाई गई सकारात्मक छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया और यह नुकसान वोटों में साफ दिखा.

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‘जंगलराज सही था’ बयान बना आत्मघाती कदम

राम मंदिर विवाद थमा भी नहीं था कि खेसारी का दूसरा बयान फिर सुर्खियों में आ गया. उन्होंने कहा कि जंगलराज सही था. लोग फिरौती देकर जिंदा तो रहते थे. यह बयान सुनते ही छपरा में लोगों की यादें 15 से 20 वर्ष पीछे चली गईं, जब अपराध, अपहरण और भय का माहौल चरम पर था. बीजेपी ने इसी मुद्दे को हवा दी और प्रचार में बताया कि खेसारी जंगलराज को सही ठहराते हैं. इस बयान से मध्यम वर्ग और महिलाओं में भारी नाराजगी फैल गई. पवन सिंह ने भी इस पर पलटवार करते हुए कहा कि लोग खुद देखें कि बिहार पहले कैसा था और आज कैसा है. यह हमला जनता पर सीधा असर डाल गया.

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भोजपुरी इंडस्ट्री से टकराव पड़ा भारी

खेसारी लाल यादव ने प्रचार के दौरान अपने ही उद्योग यानी भोजपुरी इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकारों पर निशाना साध दिया. मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ और पवन सिंह, जिनका क्षेत्र में मजबूत प्रभाव है, सभी ने एक-एक करके खेसारी को जवाब दिया. इससे भोजपुरी दर्शकों का एक बड़ा वर्ग उनसे नाराज हो गया. यह वही तबका था जो सामान्य समय में उन्हें अपना स्टार मानता था. लेकिन चुनावी जंग में इंडस्ट्री के भीतर इस टकराव ने उनकी लोकप्रियता को बुरी तरह कमजोर कर दिया.

मोदी-नीतीश की आंधी के आगे फीकी पड़ी स्टारडम

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इस चुनाव में एनडीए ने मोदी-नीतीश के संयुक्त नेतृत्व को सामने रखकर मजबूत कैंपेन चलाया. भाजपा का संगठन और जमीनी स्तर पर नीतीश का प्रशासनिक भरोसा, दोनों ने मिलकर एक ऐसी राजनीतिक लहर तैयार की जिसे ‘मोदी-नीतीश की आंधी’ कहा जा रहा है. खेसारी ने इस लहर की ताकत को कम आंका. भीड़ देखकर वह आश्वस्त हो गए, लेकिन मतदाता का मूड पूरी तरह एनडीए के पक्ष में था. स्टारडम और लोकप्रियता इस मजबूत राजनीतिक धार के सामने टिक नहीं पाई.

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बताते चलें कि छपरा की हार से साफ होता है कि राजनीति और मनोरंजन दो अलग दुनिया हैं. भीड़, गाने, चर्चे और सोशल मीडिया की चमक वोट में बदल जाए, यह ज़रूरी नहीं है. खेसारी लाल यादव ने चुनाव मैदान में उतरकर अपनी कोशिश जरूर की, लेकिन कई गलत बयानों, रणनीतिक चूकों और मजबूत विपक्षी लहर की वजह से उनकी पहली राजनीतिक लड़ाई असफल रही.इस हार ने एक बार फिर दिखा दिया कि राजनीति में सिर्फ लोकप्रियता नहीं, बल्कि सही बात, सही समय और जमीन से जुड़ी समझ ही जीत की असली कुंजी होती है.

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