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ओवैसी बिगाड़ेंगे राहुल-तेजस्वी का खेल... बिहार चुनाव में 100 सीटों पर उतारेंगे प्रत्याशी! महागठबंधन में भारी टेंशन, मचा हड़कंप

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने बताया कि 'हम बिहार चुनाव में तीसरा विकल्प पेश करने की कोशिश में लगे हुए हैं. हमारी योजना 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की है.'

ओवैसी बिगाड़ेंगे राहुल-तेजस्वी का खेल... बिहार चुनाव में 100 सीटों पर उतारेंगे प्रत्याशी! महागठबंधन में भारी टेंशन, मचा हड़कंप
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बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां जोरों पर है. महागठबंधन और एनडीए दोनों दल मिलकर सीटों के बंटवारे पर गहरा मंथन कर रहे हैं. पिछले चुनाव की तरह इस बार भी कुछ ऐसे दल हैं, जो दोनों ही दलों की चिंता बढ़ाते नजर आ रहे हैं. खासतौर से महागठबंधन के वोट बैंक में बड़ी सेंध लगाने की तैयारी चल रही है. इसमें तीसरे मोर्चे की पहल पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने खुद कमान संभाली है. खबरों के मुताबिक, आगामी राज्य विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी 100 सीटों पर लड़ने की योजना बना रही है, जो कि पिछली सीटों से करीब 5 गुना ज्यादा सीट है. ओवैसी ने बिहार में एक लक्ष्य के तहत तीसरा विकल्प तैयार करना शुरू कर दिया. 

ओवैसी ने राहुल-तेजस्वी की टेंशन बढ़ाई

बता दें कि AIMIM प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने बिहार विधानसभा चुनाव में तीसरा विकल्प तैयार करना शुरू कर दिया है. हाल ही में उन्होंने सीमांचल का व्यापक दौरा किया, जो उनकी पार्टी का एक पारंपरिक गढ़ माना जाता है. इस दौरान उन्होंने वहां पर कई जनसभाएं भी की और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर नए राजनीतिक समीकरण पर चर्चा की. इस दौरान ओवैसी ने कहा कि मैं बिहार में साथियों से मिलने और नई मित्रता करने के लिए उत्सुक हूं. 

'राज्य की जनता को एक नया विकल्प चाहिए'

ओवैसी ने किशनगंज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि 'बिहार की जनता को एक नया विकल्प चाहिए, हम वही बनने की कोशिश कर रहे हैं.' बता दें सीमांचल बिहार के पूर्वोत्तर हिस्से को कहा जाता है. इसमें कुल 4 जिले आते हैं, जिनमें कटिहार, किशनगंज अररिया और पूर्णिया शामिल है. खास तौर से यह क्षेत्र मुस्लिम आबादी के लिए जाना जाता है. राजनीतिक पार्टियों के लिए यहां आबादी, गरीबी और विकास की कमी जैसे कई मुद्दे हैं. 

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100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी 

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने बताया कि 'हम बिहार चुनाव में तीसरा विकल्प पेश करने की कोशिश में लगे हुए हैं. हमारी योजना 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की है. हमने आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद और महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव को पत्र लिखकर कुछ सीटों की मांग की थी, लेकिन उन्होंने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई. अब ऐसे में चुनाव में जनता ही इसका जवाब देगी.' अख्तरुल ने आगे कहा कि उनकी पार्टी इस बार सामाजिक न्याय और अल्पसंख्यक अधिकारों के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगी, हम आरजेडी और महागठबंधन दोनों को अपनी ताकत दिखाएंगे. 

2015 में बिहार की राजनीति में पहली बार उतरी AIMIM 

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हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM पहली बार साल 2015 के विधानसभा चुनाव में बिहार की राजनीति में पहली बार उतरी थी. उस चुनाव में पार्टी ने सीमांचल की 6 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उस दौरान कोई भी सफलता नहीं मिली. हालांकि, कोचाधमन विधानसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान को करीब 37,000 वोट मिले थे, जो वहां की कुल मतों का लगभग 26 प्रतिशत था. 

2020 में 5 सीटों पर मिली जीत

साल 2020 में फिर से पार्टी चुनावी मैदान में उतरी. इस बार उसने 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे और अपनी राजनीतिक ताकत का शानदार प्रदर्शन किया. उस चुनाव में AIMIM ने सीमांचल की 5 सीटों में अमौर, बहादुरगंज, कोचाधामन, बायसी और जोकीहाट पर शानदार जीत हासिल की. इन सभी सीटों पर पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे और सभी में सफलता हासिल की. 

2022 में AIMIM को लगा झटका 

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साल 2022 में असदुद्दीन ओवैसी को बड़ा झटका लगा, जब अख्तरुल ईमान को छोड़कर सभी विधायक आरजेडी में शामिल हो गए. 2020 के चुनाव में पार्टी ने 16 मुस्लिम और 4 गैर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया था. इनमें 5 ने जीत दर्ज की थी, लेकिन पार्टी के गैर मुस्लिम उम्मीदवारों को सफलता नहीं मिली और उन्हें वोट भी कम मिले. इनमें मनिहारी सीट पर सबसे कम वोट 2,475 गोरेटी मुर्मू को मिला. इसके अलावा बरारी से राकेश रोशन को 6598 और रानीगंज से रोशन देवी को मात्र 2412 वोट ही मिले. 

ओवैसी की राजनीति पर क्या कहा एक्सपर्ट्स ने? 

राजनीतिक एक्सपर्ट अरुण कुमार पांडे ने बताया है कि 'असदुद्दीन ओवैसी अब सिर्फ सीमांचल की राजनीति तक सीमित नहीं रहना चाहते. वह कई दलों से गठबंधन की बातचीत कर रहे हैं, जहां पर मुस्लिम मतदाता अहम भूमिका निभाते हैं. ऐसे में महागठबंधन के लिए ओवैसी बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकते हैं, जहां पिछड़ी जातियों की भूमिका है. वहां पर आरजेडी को चुनौती मिल सकती है.' अरुण पांडे ने आगे बताया कि 'बिहार में मुसलामानों की आबादी 17.7 प्रतिशत है. यह आबादी 47 विधानसभा सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाती है. 11 सीटों पर मुस्लिम आबादी 40 प्रतिशत से अधिक है, जबकि 7 सीटों पर 30 प्रतिशत से अधिक और वहीं 29 सीटों पर यह आंकड़ा 20 से 30 प्रतिशत है. इनमें खास तौर से सीमांचल में मुस्लिम आबादी की संख्या सबसे ज्यादा है.' 

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दो चरणों में होंगे बिहार विधानसभा चुनाव 

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बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. सभी 243 सीटों पर 2 चरणों में मतदान होंगे. इनमें पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को होगा. मतगणना 14 नवंबर को होगी और देर शाम तक नतीजे सामने आ जाएंगे. 

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