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विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल की बढ़ गई टेंशन, इन विधायकों ने छोड़ा 'आप' का साथ

अरविंद केजरीवाल एक तरफ लगातार बीजेपी को चुनौती देते हुए अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में वापिस लाने की जुगत में लगे हुए है। वही दूसरी तरफ़ केजरीवाल की मुश्किलें बीजेपी और कांग्रेस नहीं बल्कि उनकी पार्टी के नेता बढ़ाने में लगे हुए है।

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दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक हफ़्ते से भी कम का समय बचा है। इस बीच सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक तरफ लगातार बीजेपी को चुनौती देते हुए अपनी पार्टी को फिर से सत्ता में वापिस लाने की जुगत में लगे हुए हैं। वही दूसरी तरफ़ केजरीवाल की मुश्किलें बीजेपी और कांग्रेस नहीं बल्कि उनकी पार्टी के नेता बढ़ाने में लगे हुए हैं। दरअसल, चुनाव से महजपांच दिन पहले 'आप' में भगदड़ मच गई है। पार्टी के सात विधायकों के बाद अब आठवें विधायक ने भी इस्तीफा देते हुए खुद को पार्टी से अलग कर लिया है।   


शीशमहल का किया जिक्र 

चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी को लगातार झटका लगता जा रहा है। पहले पार्टी के सात विधायकों ने इस्तीफा देकर केजरीवाल की मुश्किल बढ़ाई थी, अब मादीपुर से पार्टी के विधायक गिरीश सोनी ने इस्तीफा आप संयोजक की टेंशन बढ़ा दी है। बताया जा रहा है 'आप' के ये विधायक इस चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज थे। इस्तीफा देने वाले कुछ विधायकों ने तो सोशल मीडिया के जरिए भ्रष्टाचार तथा अन्य मुद्दों को लेकर अपनी ही पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए थे। मादीपुर से विधायक गिरीश सोनी ने अपने इस्तीफे की कॉपी को अपने सोशल मीडिया के एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा "काफी समय से आम आदमी पार्टी में जो गतिविधियां चल रही  हैं। वह हमेशा आलोचना का विषय बनकर एक सवालिया निशान उठाती है जैसे "शीशमहल"क्या इसके बाद हम सच में आम आदमी हैं।
इन सभी विषयों से आघात होकर आज मैं आम आदमी पार्टी की समस्त जिम्मेदारियों से निवृत होकर आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा  दे रहा हूँ।"


पार्टी छोड़ने वाले नेताओं का आरोप 

बताते चले कि गिरीश सोनी से पहले कस्तूरबा नगर से मौजूदा विधायक मदन लाल दावा किया कि वो ख़ुद और उनके अलावा पार्टी के छह अन्य विधायकों ने आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष राम विलास गोयल को भेजा है। इनके अलावा  भावना गौड़ (पालम), राजेश ऋषि (जनकपुरी),बी एस जून (बिजवासन),  रोहित मेहरौलिया (त्रिलोकपुरी)  पवन शर्मा (आदर्श नगर),  और नरेश यादव (महरौली) भी शामिल हैं। जिन्होंने चुनाव से पहले केजरीवाल का साथ छोड़ा है, उनका कहना है कि अब पार्टी और केजरीवाल पर उन्हें भरोसा नहीं है। इन नेताओं का पार्टी का साथ छोड़ने को लेकर पार्टी की प्रवक्ता रीना गुप्ता की माने तो इनका टिकट इस बार इसलिए काटा गया क्योंकि चुनाव से पहले करवाए गए पार्टी द्वारा सर्वे में यह जानकारी सामने आई थी कि ये विधायक अपने क्षेत्र में जनता के बीच मौजूद नहीं थे।


गौरतलब है कि दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीटों पर सिंगल फेज में 5 फरवरी को मतदान होने है, वही वोटों की गिनती 8 फरवरी को होगी। इस बीच जिस तरह से आप के नेता पार्टी का साथ छोड़ रहे है वो केजरीवाल केलिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है कि आख़िर वो अपने राजनीतिक विरोधियों से लड़े यह अपने पार्टी के नेताओं को मनाकर चुनाव तक शांत रखें।
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