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Jharkhand Election 2024: बीजेपी, जेएमएम और सपा ने कितने दलबदलुओं पर लगाया दांव?
Jharkhand Election 2024:दलबदलुओं को टिकट देने का चलन भारतीय राजनीति में काफी पुराना है, लेकिन झारखंड जैसे राज्य में इसका विशेष महत्व है। कई बार क्षेत्रीय मुद्दे, जातिगत समीकरण, और व्यक्तिगत लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए पार्टियां इन नेताओं को टिकट देती हैं। इस बार भी बीजेपी, जेएमएम और सपा ने दलबदलुओं पर भरोसा जताया है।
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Jharkhand Election 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव का माहौल गरम है। कुल 81 सीटों के लिए हो रहे इन चुनावों में पार्टियों ने अपनी रणनीति तय कर ली है और उम्मीदवारों की घोषणा हो चुकी है। चुनाव में खास बात यह है कि इस बार दलबदलुओं की चांदी नजर आ रही है। चाहे सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की अगुवाई वाला इंडिया ब्लॉक हो या विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), दोनों ने ही अपने-अपने गठबंधन में दलबदलुओं को शामिल कर टिकटों की बारिश कर दी है। आइए जानते हैं कि किस पार्टी ने कितने दलबदलुओं पर भरोसा जताया है और किन सीटों पर उन्हें उतारा गया है।
बीजेपी का दांव, 8 दलबदलुओं को मिला टिकट
बीजेपी ने अपने कई मजबूत उम्मीदवारों के अलावा दलबदलुओं को भी मैदान में उतारा है। पार्टी ने इस बार अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर 8 दलबदलुओं को टिकट दिया है। इनमें जेएमएम के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और उनके पुत्र बाबू लाल सोरेन को महत्वपूर्ण सीटों पर उतारा गया है। इनके साथ ही अन्य दलबदलुओं को भी उन सीटों पर उतारा गया है, जहाँ पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जाती है।
चंपाई सोरेन (जेएमएम) - सरायकेला
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बाबू लाल सोरेन (जेएमएम) - घाटशिला
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लोबिन हेम्ब्रम (जेएमएम) - बोरियो
सीता सोरेन (जेएमएम) - जामताड़ा
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डॉ. मंजू देवी (कांग्रेस) - जमुवा
गीता कोड़ा (कांग्रेस) - जगन्नाथपुर
कमलेश कुमार सिंह (एनसीपी) - हुसैनाबाद
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रौशन लाल चौधरी (आजसू) - बड़कागांव
बीजेपी के इस कदम को पार्टी की मजबूत रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहाँ वह अन्य दलों से आए कद्दावर नेताओं के प्रभाव का उपयोग करना चाहती है।
JMM का दांव: 7 दलबदलुओं को मैदान में उतारा
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झारखंड में सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने भी इस बार 7 दलबदलुओं को अपना उम्मीदवार बनाया है। जेएमएम ने बीजेपी, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) और आरजेडी से आए नेताओं को टिकट देकर अपना पक्ष मजबूत करने की कोशिश की है।
लुईस मरांडी (बीजेपी) - जामा
गणेश महली (बीजेपी) - सरायकेला
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केदार हाजरा (बीजेपी) - जमुवा
अनंत प्रताप देव (बीजेपी) - भवनाथपुर
एमटी राजा (आजसू) - राजमहल
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उमाकांत रजक (आजसू) - चंदनकियारी
उदयशंकर सिंह (आरजेडी) - सारठ
जेएमएम ने यह रणनीति अपनाई है कि बीजेपी से आए उम्मीदवार उन क्षेत्रों में प्रभावशाली साबित हो सकते हैं, जहाँ बीजेपी का प्रभाव है। साथ ही, अन्य पार्टियों के नेताओं को जोड़कर जेएमएम ने इंडिया ब्लॉक की स्थिति को मजबूत किया है।
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कांग्रेस का सहयोग और रणनीति
जेएमएम के गठबंधन में शामिल कांग्रेस ने भी 2 दलबदलुओं को टिकट दिया है। पांकी सीट पर बीजेपी से आए लाल सूरज को और छतरपुर सीट पर आरजेडी से आए राधाकृष्ण किशोर को उम्मीदवार बनाया है। इन उम्मीदवारों को शामिल कर कांग्रेस ने अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने का प्रयास किया है, खासकर उन सीटों पर जहां जेएमएम का प्रभाव कम है।
समाजवादी पार्टी (सपा): 6 दलबदलुओं को टिकट
बीजेपी और जेएमएम के बाद समाजवादी पार्टी ने भी इस बार 6 दलबदलुओं को मैदान में उतारा है। सपा के अधिकांश उम्मीदवार आरजेडी से आए हुए हैं, जबकि कांग्रेस और बसपा के भी कुछ नेताओं को टिकट दिया गया है।
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गिरिनाथ सिंह (आरजेडी) - गढ़वा
ममता भुइयां (आरजेडी) - छतरपुर
रघुपाल सिंह (आरजेडी) - मनिका
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कमलेश यादव (आरजेडी) - हुसैनाबाद
उमाशंकर अकेला (कांग्रेस) - बरही
अंजू देवी (बसपा) - विश्रामपुर
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सपा की यह रणनीति बताती है कि वह उन उम्मीदवारों को मैदान में उतार रही है जो क्षेत्र में पहले से ही प्रभावशाली हैं और अपने क्षेत्र के मतदाताओं पर पकड़ रखते हैं।
झारखंड विधानसभा चुनाव में 13 और 20 नवंबर को दो चरणों में मतदान होंगे। पहले चरण में 43 सीटों के लिए चुनाव होगा और दूसरे चरण में 38 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। कुल 743 उम्मीदवार पहले चरण में और 634 उम्मीदवार दूसरे चरण में मैदान में हैं। चुनाव के नतीजे 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
दलबदलुओं को टिकट देने का चलन भारतीय राजनीति में काफी पुराना है, लेकिन झारखंड जैसे राज्य में इसका विशेष महत्व है। कई बार क्षेत्रीय मुद्दे, जातिगत समीकरण, और व्यक्तिगत लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए पार्टियां इन नेताओं को टिकट देती हैं। इस बार भी बीजेपी, जेएमएम और सपा ने दलबदलुओं पर भरोसा जताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड जैसे राज्य में दलबदलुओं की लोकप्रियता उनके स्थानीय प्रभाव और जमीनी समर्थन के कारण है। इसका फायदा पार्टियों को मिलता है क्योंकि ये नेता अपनी क्षेत्रीय पहचान के आधार पर वोट खींचने में सक्षम होते हैं।
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कुल मिलाकर, झारखंड विधानसभा चुनाव में दलबदलुओं का प्रमुख स्थान है और यह देखना दिलचस्प होगा कि ये उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में किस तरह का प्रदर्शन करेंगे।