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बिहार में सियासी रण तेज... दूसरे चरण में 122 सीटों पर कांटे की टक्कर, कई दिग्गज नेताओं की किस्मत दांव पर

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान आज, यानी 11 नवंबर को सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है. राज्य के 122 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 45,399 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं. इनमें 101 सामान्य, 19 अनुसूचित जाति (SC) और 2 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें शामिल हैं. इस चरण में कुल 1302 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें 1,165 पुरुष, 136 महिलाएं और 1 थर्ड जेंडर उम्मीदवार शामिल हैं.

Bihar 2nd Phase Election
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बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण का मतदान आज, यानी 11 नवंबर को सुबह 7 बजे से शुरू हो गया है. राज्य के 122 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 45,399 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं. मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक तय किया गया है. चुनाव आयोग ने निष्पक्ष और सुचारु मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा और तकनीकी इंतज़ाम पुख्ता किए हैं. मतदान वाले क्षेत्रों में स्थानीय पुलिस बलों के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 500 से अधिक कंपनियां तैनात की गई हैं, ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न हो सके. चुनाव आयोग ने सभी मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था भी की है. इसके अलावा, दिव्यांग और वृद्ध मतदाताओं की सुविधा के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं.

दूसरे चरण में कुल कितने प्रत्याशी लड़ रहे चुनाव?

बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में आज 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान हो रहा है. इनमें 101 सामान्य, 19 अनुसूचित जाति (SC) और 2 अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटें शामिल हैं. इस चरण में कुल 1302 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं, जिनमें 1,165 पुरुष, 136 महिलाएं और 1 थर्ड जेंडर उम्मीदवार शामिल हैं. इन सभी उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला 3 करोड़ 70 लाख 13 हजार 556 मतदाता करेंगे. बता दें कि पहले चरण में रिकॉर्ड 65 प्रतिशत मतदान हुआ था, जिससे दूसरे चरण को लेकर मतदाताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है. सुबह से ही कई मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं. राज्य में इस चरण का मतदान बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि यही तय करेगा कि बिहार की सत्ता पर अगली बार किसकी पकड़ मजबूत होगी. 

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गठबंधन का क्या हैं गणित?

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बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण में जिन 122 सीटों पर मतदान हो रहा है, वहां मुख्य मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच माना जा रहा है. एनडीए की ओर से बीजेपी (BJP) सबसे ज़्यादा 53 सीटों पर चुनाव मैदान में है, जबकि जेडीयू के उम्मीदवार 44 सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) 6 सीटों पर, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLM) 4 सीटों पर और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 15 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. वहीं, महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (RJD)  के उम्मीदवार 71 सीटों पर, कांग्रेस (Congress) के प्रत्याशी 37 सीटों पर और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) 7 सीटों पर मैदान में हैं. इसके अलावा, वाम दलों में सीपीआई (माले) 7, सीपीआई 4 और सीपीएम 1 सीट पर चुनाव लड़ रही है. इसी तरह, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने 21 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने 120 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करके चुनावी मुकाबले को और अधिक दिलचस्प बना दिया है.

गयाजी के 3 गांव में 25 साल बाद वोटिंग 

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बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में गयाजी ज़िले के इमामगंज प्रखंड के हेरहज, पथरा और केवलडीह गांव के मतदाताओं के लिए यह दिन खास है. करीब 25 साल बाद इन तीनों गांवों के लोग अपने ही गांव में वोट डाल सकेंगे. दरअसल, वर्ष 2001 में आखिरी बार यहां मतदान हुआ था। इसके बाद नक्सली गतिविधियों के बढ़ने के कारण प्रशासन ने इन गांवों का मतदान केंद्र 10 से 12 किलोमीटर दूर सलैया में स्थानांतरित कर दिया था. दूरी और परिवहन की कमी के चलते ग्रामीण वहां तक नहीं पहुंच पाते थे, जिसके कारण वे वर्षों से मतदान से वंचित रह जाते थे. हालांकि, इस बार प्रशासन ने इन गांवों में फिर से मतदान केंद्र बहाल कर दिए हैं. स्थानीय लोग इसे लोकतंत्र के उत्सव की तरह मना रहे हैं और लंबे इंतज़ार के बाद अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने को लेकर उत्साहित हैं.

सबसे अधिक और कम प्रत्याशियों वाली सीट 

इस चरण में कुछ सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या सबसे अधिक है, तो कुछ क्षेत्रों में मुकाबला बेहद सीमित दायरे में सिमटा हुआ है. इस चरण में तीन विधानसभा सीटों कैमूर की चैनपुर, रोहतास की सासाराम और गया ज़िले की गया शहर पर सर्वाधिक 22-22 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. इन सीटों पर बहुकोणीय मुकाबले की संभावना जताई जा रही है. वहीं, दूसरी ओर छह विधानसभा क्षेत्रों में सबसे कम यानी 5-5 प्रत्याशी मैदान में हैं. इनमें पश्चिमी चंपारण की लौरिया और चनपटिया, पूर्वी चंपारण की रक्सौल और सुगौली, सुपौल की त्रिवेणीगंज तथा पूर्णिया ज़िले की बनमनखी सीट शामिल हैं. इन सीटों पर मुकाबला भले ही सीमित हो, लेकिन सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे नतीजे दिलचस्प होने की उम्मीद है.

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कई दिग्गजों की किस्मत दांव पर

बिहार के इस चरण में सिर्फ राजनीतिक दलों का ही नहीं, बल्कि कई दिग्गज नेताओं और मंत्रियों का भी भविष्य मतदाताओं के फैसले पर निर्भर करेगा. इस चरण में कई मौजूदा और पूर्व मंत्रियों के साथ दो पूर्व उपमुख्यमंत्री भी चुनावी मुकाबले में हैं. पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी बेतिया से चुनाव लड़ रही हैं, जबकि पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद कटिहार से बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं. नीतीश सरकार के मंत्रियों में सुमित कुमार सिंह, जिन्होंने पिछली बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की थी, इस बार भी चुनावी दौड़ में हैं. इसके अलावा चैनपुर से मंत्री ज़मा खान भी मैदान में हैं, जिन्होंने पहले बसपा के टिकट पर जीत हासिल की थी और बाद में जेडीयू में शामिल हो गईं. अमरपुर से जेडीयू के जयंत राज, झंझारपुर से बीजेपी के नीतीश मिश्रा, नौतन से बीजेपी के नारायण प्रसाद, फुलपरास से जेडीयू की शीला मंडल और धमदाहा से जेडीयू की लेशी सिंह भी चुनावी मुकाबले में हैं.

इसके साथ ही बाहुबली आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद जेडीयू के टिकट पर मैदान में हैं, जबकि मुरारी प्रसाद गौतम एलजेपी से चेनारी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. आरजेडी से बीमा भारती और उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता भी अपने-अपने क्षेत्रों में चुनावी संघर्ष में हैं. एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख़्तरुल ईमान ने भी पार्टी के टिकट पर चुनावी मुकाबले में भाग लिया है. इसके अलावा, संतोष कुशवाहा ने जेडीयू छोड़कर आरजेडी के टिकट पर चुनावी मैदान में कदम रखा है.

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दूसरे चरण में कितने मतदान केंद्र?

दूसरे चरण में राज्य के 20 जिलों में कुल 45,399 मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इसमें से 5,326 बूथ शहरी और 40,073 बूथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं. कुल बूथों में 45,388 सामान्य और 11 सहायक बूथ शामिल हैं. इस चरण में विशेष ध्यान रखते हुए महिलाओं द्वारा संचालित 595 बूथ, दिव्यांग मतदाताओं के लिए 91 बूथ और 316 मॉडल मतदान केंद्र बनाए गए हैं. इस चुनाव में कुल 3 करोड़ 70 लाख 13 हजार 556 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे, जिनमें 1 करोड़ 95 लाख 44 हजार 41 पुरुष, 1 करोड़ 74 लाख 68 हजार 572 महिलाएं और 943 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं. मतदाता संख्या के आधार पर मखदुमपुर विधानसभा क्षेत्र सबसे छोटा है, जहां कुल 2,47,574 लोग मतदान करेंगे. वहीं हिसुआ विधानसभा क्षेत्र सबसे बड़ा है, जहां 3,67,667 मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे. इस चरण के सभी 122 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या दो लाख से अधिक है, जो इस चरण की महत्वता को और बढ़ाती है.

पिछले चुनाव में कैसे रहा नतीजा? 

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पिछले चुनाव 2020 के आंकड़े देखें तो इस चरण की 66 सीटें महागठबंधन के पास थीं और 49 सीटें एनडीए के खाते में गई थीं. वहीं, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम को 5 सीटें मिली थीं और बसपा ने 1 सीट पर जीत हासिल की थी. 2020 में इस क्षेत्र की बीजेपी ने 42 सीटें और जेडीयू ने 20 सीटें जीती थीं। एनडीए के सहयोगी जीतनराम मांझी की पार्टी ने भी 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी. महागठबंधन में आरजेडी ने 33 सीटों पर विजय पाई, कांग्रेस 11 सीटों तक सिमटी और सीपीआई माले ने 5 सीटों पर कब्जा किया. चुनाव के बाद बसपा और एक निर्दलीय विधायक ने जेडीयू के साथ गठबंधन किया, जिससे एनडीए की सीट संख्या बढ़कर 68 हो गई थी. इस बार के मुकाबले में इसी हिसाब से सीटों का समीकरण और भी रोमांचक बन गया है.

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