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दिल्ली चुनाव में 'पूर्वांचली' वोट को साधने के लिए कांग्रेस ने चला दांव, छठ पूजा को लेकर किया बड़ा वादा
पूर्वांचल वासियों को लेकर भी सियासत गरम हो गई है। इस मुद्दे पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने है वही कांग्रेस ने मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए पूर्वांचल और बिहार के वोटरों को साधने के लिए बड़ा वादा किया है। कांग्रेस ने एलान किया है कि दिल्ली में शारदा सिन्हा के नाम पर छठ घाट बनवाएगी।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों का ऐलान किए जाने के बाद सभी राजनीतिक दल दिल्लीवासियों को लुभाने के लिए तमाम योजनाओं का ऐलान कर रहे हैं। एक तरफ सत्ता में पुन वापसी के लिए आम आदमी पार्टी के तरफ से लगातार वादों की बौछार की जा रही है तो वहीं इसके जवाब में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस भी अपनी-अपनी लंबी वादों की लिस्ट के साथ जनता के बीच पैठ बनाने की कोशिश में लग गई है। इस बीच पूर्वांचल वासियों को लेकर भी सियासत गरम हो गई है। इस मुद्दे पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने है वही कांग्रेस ने मौक़े का फ़ायदा उठाते हुए पूर्वांचल और बिहार के वोटरों को साधने के लिए बड़ा वादा किया है। कांग्रेस ने एलान किया है कि दिल्ली में शारदा सिन्हा के नाम पर छठ घाट बनवाएगी।
दरअसल, दिल्ली में बड़ी संख्या में पूर्वांचल और बिहार के वोटर है। जो छठ पर्व को बड़े ही भक्तिभाव से मनाते है। अब उनको लुभाने के लिए कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है। दिवंगत शारदा सिन्हा के गीत छठ पर्व पर सबसे ज़्यादा सुने जाते है। बीते छठ पूजा के दौरान उनका निधन हुआ था, ऐसे में अब कांग्रेस ने एलान कर दिया है कि अगर वो सत्ता में आती है तो शारदा सिन्हा के नाम पर छठ घाट बनाएगी। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि जब दिल्ली में उनकी सरकार थी तो राष्ट्रीय राजधानी को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ नगरों में से एक बना दिया गया था। वही बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने बताया कि पूर्वांचल और बिहार के प्रवासी दिल्ली वासियों को महज़ एक वोट बैंक समझने पर आम आदमी पार्टी और बीजेपी की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि ‘‘कांग्रेस ने सत्ता में लौटने पर छठ पूजा को ‘महाकुंभ’ की तरह बनाने का संकल्प लिया है, और यमुना तट पर एक अलग छठ घाट बनाया जाएगा, जिसे एक अलग जिला घोषित किया जाएगा और इसका नाम शारदा सिन्हा घाट रखा जाएगा।"
गौरतलब है कि राजधानी दिल्ली में विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग द्वारा मंगलवार को मतदान की तारीख का ऐलान किया गया था। जिसके मुताबिक दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग अगले महीने 5 फरवरी को होगी जबकि वोटों की गिनती 8 फरवरी को होगी। तब जाकर यह साफ होगा की जनता को लुभाने के लिए ताबड़तोड़ वादों की बौछार करने वाले राजनीतिक दलों में जनता का आशीर्वाद किसे प्राप्त होता है।
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