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बिहार में फिर लौटे ‘छोटे सरकार’! NDA में सीट बंटवारे से पहले अनंत सिंह का बड़ा ऐलान, JDU के टिकट पर मोकामा से लड़ेंगे चुनाव

बिहार विधानसभा चुनाव की तारीख के ऐलान के बाद छोटे सरकार के नाम से मशहूर मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने घोषणा की है कि वे जेडीयू के टिकट पर मोकामा (178) सीट से चुनाव लड़ेंगे. उनका नामांकन 14 अक्टूबर को होगा और उन्होंने जनता से आशीर्वाद और समर्थन की अपील की है.

ANANT SINGH (File Photo)
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का आगाज होते ही राज्य की सियासत गरमाने लगी है. हर पार्टी अपनी रणनीति और उम्मीदवारों की घोषणा में जुटी है. एनडीए और महागठबंधन दोनों ही गठबंधन सीटों के बंटवारे पर अंतिम रूप दे रहे हैं. इसी बीच बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह ने एक बार फिर चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है.

दरअसल, अनंत सिंह ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट करते हुए घोषणा की कि वे जेडीयू के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट (178) से 2025 के चुनाव में नामांकन करेंगे. उनकी यह घोषणा बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रही है, क्योंकि लंबे समय से सियासी पृष्ठभूमि से दूर रहने के बाद वे अब एक बार फिर सुर्खियों में लौट आए हैं.

14 अक्टूबर को करेंगे नामांकन अनंत सिंह 

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अनंत सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'लोकतंत्र के महापर्व #BiharElection2025 में मोकामा विधानसभा क्षेत्र 178 से हमारे नामांकन समारोह में आप सभी जनता मालिक सादर आमंत्रित हैं. यह हमारे लिए गौरव और संकल्प की बेला है. आप सभी जनता मालिकों और समर्थकों से विनम्र निवेदन है कि अपना आशीर्वाद, स्नेह और समर्थन अवश्य प्रदान करें, ताकि यह यात्रा जनहित और न्याय के मार्ग पर सफल हो सके.' उनकी इस घोषणा से यह साफ हो गया कि जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह अब फिर से मुख्यधारा की राजनीति में वापसी कर चुके हैं. फिलहाल मोकामा सीट पर उनकी पत्नी नीलम देवी विधायक हैं, जिन्होंने 2020 के चुनाव में आरजेडी के टिकट पर जीत हासिल की थी. लेकिन 2024 में एनडीए सरकार के शक्ति परीक्षण के दौरान नीलम देवी ने पाला बदलते हुए सत्तापक्ष का साथ दे दिया था. अब जब अनंत सिंह खुद जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतर रहे हैं, तो मोकामा की सियासत में एक नया मोड़ आने वाला है.

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जेल से रिहा होते ही किया था चुनाव लड़ने का ऐलान 

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अनंत सिंह अगस्त 2025 में पटना के बेऊर जेल से रिहा हुए थे. जेल से बाहर आते ही उन्होंने संकेत दे दिया था कि वे आने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. मीडिया से बातचीत में उन्होंने नीतीश कुमार की खुलकर तारीफ करते हुए कहा था, 'नीतीश जी ने जनता के लिए हर काम किया है और आगे भी करेंगे. वह अभी 25 साल तक और काम करेंगे.' इस बयान के बाद से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि अनंत सिंह एनडीए खेमे में शामिल हो सकते हैं. अब उनकी आधिकारिक घोषणा ने उन अटकलों को पुख्ता कर दिया है.

कौन हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

बिहार की राजनीति में अनंत सिंह एक ऐसा नाम हैं जिनका जिक्र हमेशा विवाद और प्रभाव दोनों के लिए होता रहा है. मोकामा क्षेत्र में उनका गहरा जनाधार है और समर्थकों के बीच वे ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर हैं. वे कई बार विधायक रह चुके हैं और स्थानीय स्तर पर उनका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव अब भी कायम है. अनंत सिंह को इस साल की शुरुआत में पंचमहला थाना क्षेत्र में दर्ज सोनू-मोनू केस (संख्या 5/2025) में गिरफ्तार किया गया था. पुलिस ने उन पर हत्या की साजिश रचने, फायरिंग करवाने और आपराधिक षड्यंत्र के गंभीर आरोप लगाए थे. यह मामला कुख्यात सोनू-मोनू गैंग से जुड़ी पुरानी दुश्मनी का हिस्सा बताया गया था. पुलिस के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच रंजिश के चलते फायरिंग की घटना हुई थी, जिसमें अनंत सिंह के समर्थकों की संलिप्तता पाई गई थी. बाद में इस मामले में हाई कोर्ट से उन्हें जमानत मिली और वे जेल से बाहर आए.

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सोनू-मोनू गैंग से है पुरानी दुश्मनी

अनंत सिंह और सोनू-मोनू गैंग के बीच का विवाद वर्षों पुराना है. बताया जाता है कि दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर कई बार टकराव हो चुका है. इस साल की शुरुआत में पंचमहला इलाके में हुई फायरिंग की बड़ी घटना ने एक बार फिर दोनों के बीच तनाव बढ़ा दिया था. पुलिस ने उस घटना को ‘गैंगवार’ बताया था और मामले की जांच की थी. अब जब अनंत सिंह फिर से नीतीश कुमार के साथ जुड़कर मोकामा से चुनाव लड़ने जा रहे हैं, तो यह सीट बिहार विधानसभा चुनाव का सबसे चर्चित मैदान बन गई है. राजनीतिक जानकारों की माने तो अनंत सिंह की वापसी से न सिर्फ मोकामा बल्कि आसपास के इलाकों की सियासी समीकरण भी बदल सकते हैं.

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बताते चलें कि बिहार की सियासत हमेशा से अप्रत्याशित मोड़ों से भरी रही है, और अनंत सिंह की वापसी उसी का एक उदाहरण माना जा रहा है. अनंत सिंह के ऐलान के साथ मोकामा में अब मुकाबला दिलचस्प होने वाला है, क्योंकि जनता यह तय करेगी कि क्या 'छोटे सरकार' दोबारा अपनी जमीन हासिल कर पाएंगे या नहीं.

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