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राघोपुर में तेजस्वी के खिलाफ BJP की चौतरफा घेराबंदी, मोदी-नीतीश के चक्रव्यूह में फंसे लालू के लाल!

बिहार के राघोपुर से तीसरी बार जीत की उम्मीद लगाए बैठे हैं तेजस्वी यादव. इस बार भी उनके सामने हैं दिग्गज सतीश यादव. हालांकि, तेजस्वी उन्हें हराने में कामयाब रहे हैं, लेकिन इस बार राह आसान नहीं है. राघोपुर में बीजेपी के चक्रव्यूह में तेजस्वी फंसते हुए नजर आ रहे हैं, और तो और उनकी जीत थोड़ी मुश्किल नजर आ रही है.

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बिहार विधानसभा चुनाव अपना आधा पड़ाव पार कर गया है. पहले चरण का मतदान खत्म हो गया है. इसके साथ ही कई बड़े चेहरों की किस्मत EVM में कैद हो गई है. इतना ही नहीं महागठबंधन के सीएम पद के चेहरे तेजस्वी यादव और पूरे लालू परिवार की साख दांव पर लगी है. कहा जा रहा है कि बीजेपी के रणनीतिकारों ने राघोपुर में तेजस्वी को तगड़ा घेरा है. रिपोर्ट्स बताते हैं कि उनकी चौतरफा घेराबंदी ऐसी थी कि कुछ बड़ा उलटफेर ना हुआ तो वो चुनाव तक हार सकते हैं.

तेजस्वी यादव के खिलाफ बीजेपी की चौतरफा घेराबंदी!

विशेषज्ञों की मानें तो बीजेपी ने ना सिर्फ लालू यादव को हराने वाले सतीश कुमार यादव पर फिर से अपना दांव लगाया बल्कि राकेश रोशन को अपने पाले में लाकर पिछड़ा, कृष्णौत यादव वोटर्स के बंटवारे को भी रोकने में सफलता पाई. रोशन पिछली बार लोजपा से जोरदार चुनाव लड़े थे. इतना ही नहीं बीजेपी ने जिस तरह से यहां पर चुनाव लड़ा है और छोटी से छोटी चीजों को लेकर अपनी रणनीति बनाई और चक्रव्यूह घेरा उसमें तेजस्वी फंसते हुए नजर आ रहे हैं. कहा जा रहा है ये उसी तरह का चुनाव है जैसा नई दिल्ली से केजरीवाल की हार और ममता के खिलाफ सुवेंदु अधिकारी की जीत थी.

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आपको बताएं कि राकेश रोशन की वजह से जो पिछड़ा वर्ग सतीश यादव के साथ खुलकर नहीं आ रहा था वो उसके लिए अब बीजेपी के साथ आना आसान हो जाएगा. कहा जाता है कि राकेश रोशन का परिवार राघोपुर दियारा क्षेत्र से आता है, यहां तेजस्वी मजबूत हैं. यहां रोशन के परिवार का अच्छा खासा दबदबा है और इसी वजह से 2010 में भी सतीश उनके पिताजी के समर्थन से राबड़ी देवी को चुनाव हरा दिया था. ऐसे में अगर तेजस्वी की हार होती है तो राकेश उसमें X फैक्टर साबित हो सकते हैं.

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तेजस्वी यादव की संभावित हार के कुछ प्रमुख कारण!

महिला मतदाता का रुझान:

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कहा जा रहा है कि नीतीश और NDA सरकार की योजनाओं, मसलन 10 हजार रुपए देना, पेंशन, महिला आरक्षण सहित अन्य महिला केंद्रित योजनाओं ने अपना कमाल दिखाया है. इसी वजह से इस बार भी महिला मतदाताओं के बीच आरजेडी को बेहद कम समर्थन मिलने का अनुमान जताया जा रहा है। महिलाओं के लिए परिवार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे मुद्दों सबसे ज्यादा दिल के करीब माने जाते हैं. ऐसे में उन्होंने मोदी-नीतीश की जोड़ी को इन दशकों में भरोसेमंद विकल्प माना है. यही कारण है कि हो सकता है इस बार भी महिला वोटों का रुझान NDA की तरफ हो सकता है. 

मतदान प्रतिशत में वृद्धि:

राघोपुर विधानसभा में पहले कुल 3,30,000 मतदाता थे, जिनमें से केवल 58% ने मतदान किया था। इस बार लगभग 15407 वोट कम हुए, यानी कुल 3.15 लाख वोटर रहे। इस बार 70.6% मतदान हुआ, जो पिछली बार की तुलना में बहुत अधिक है. यह वृद्धि दर्शाती है कि जनता बदलाव के मूड में है. अब देखने वाली बात होगी कि ये बदलाव सरकार के लिए होती है कि स्थानीय विधायक तेजस्वी को बदलने के लिए.

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राजपूत मतदाताओं की लामबंदी!

इस बार राघोपुर में राजपूत मतदाताओं ने भी रिकॉर्ड मतदान किया है. पिछली बार के मुकाबले डेढ़ गुना अधिक मतदान हुआ है. कैडर वोट के लिहाज से देंखे, तो इस समुदाय के वोट बीजेपी को थोक में मिलते रहे हैं. अगर इस बार भी ऐसा हुआ तो ये स्पष्ट संकेत हैं कि राघोपुर का सामाजिक समीकरण बीजेपी के पक्ष में जा सकता है.

दलित, महादलित और रविदास समाज किधर?

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भाजपा की चुनावी मुहिम का जोर MY समीकरण की काट में वैकल्पिक वोट बैंक की ओर रहा है. उसकी कोशिश रहती है जो भी समाज महागठबंधन को वोट नहीं करते हैं, उन्हें मोदी-नीतीश के चेहरे पर अपनी ओर लामबंद की जाए. ऐसे में पिछड़ा+महिला के थोक में NDA को वोट मिले तो आश्चर्य नहीं होनी चाहिए. ऐसे में हर सीट पर बड़े चेहरों मसलन राकेश रौशन जैसों को साधकर बीजेपी-नीतीश ने अपने जातिगत किले को और मजबूत कर लिया है.

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