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राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा पर BJP के सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा ने दिया चौंकाने वाला बयान, SIR पर भी उठाए सवाल

बिहार चुनाव से पहले एनडीए सहयोगी और आरएलएम प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) के लिए चुनाव आयोग को और समय देना चाहिए था क्योंकि लोगों को दिक्कतें हुईं. साथ ही उन्होंने माना कि राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा का सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा.

Upendra Kushwaha
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बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा चढ़ता जा रहा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप की जंग तेज हो चुकी है. इसी बीच एनडीए की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कांग्रेस और राहुल गांधी को लेकर चौंकाने वाला बयान दे डाला है. उन्होंने साफ कहा है कि हाल ही में राहुल गांधी की अगुवाई में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा का सीधा फायदा कांग्रेस को मिलेगा. 

दरअसल, राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) को लेकर बड़ा बयान देकर चर्चा छेड़ दी है. उनके बयान ने न केवल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि यह भी संकेत दिया कि राहुल गांधी की हालिया वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा मिल सकता है.

वोटर लिस्ट रिवीजन पर साधा निशाना

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कुशवाहा ने कहा कि चुनाव आयोग को बिहार में वोटर लिस्ट रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया के लिए और समय देना चाहिए था. उनका तर्क है कि इस प्रक्रिया से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब दो महीने पहले SIR की शुरुआत हुई थी, तब भी उन्होंने यही बात कही थी कि जनता को पर्याप्त समय दिए बिना इस तरह की कवायद पूरी नहीं की जा सकती. हालांकि कुशवाहा का यह भी कहना था कि जमीनी स्तर पर SIR कोई बड़ा मुद्दा नहीं है. लेकिन समय की कमी के कारण बहुत से मतदाता परेशान हुए और यही वजह है कि यह विषय अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है.

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लंबे समय बिहार में कांग्रेस को मिली नई पहचान: उपेन्द्र कुशवाहा 

राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की अगुवाई में हाल ही में वोटर अधिकार यात्रा निकाली गई थी. इसे विपक्ष ने बड़े अभियान के तौर पर पेश किया. लेकिन कुशवाहा ने इसे विफल करार दिया. उनका कहना है कि इस यात्रा को जनता का उतना समर्थन नहीं मिला, जितनी उम्मीद की जा रही थी. फिर भी उन्होंने यह स्वीकार किया कि लंबे समय बाद राहुल गांधी को बिहार में एक नई पहचान इस यात्रा के ज़रिए मिली है. यानी यात्रा पूरी तरह से सफल न सही, लेकिन कांग्रेस को इसका कुछ न कुछ लाभ जरूर मिलने वाला है. यह बयान कांग्रेस खेमे के लिए राहत की तरह है क्योंकि बिहार में पार्टी लंबे समय से राजनीतिक हाशिए पर रही है.

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नीतीश कुमार पर भरोसा कायम

बिहार की राजनीति में जब भी बदलाव की बात होती है, नीतीश कुमार का नाम केंद्र में रहता है. एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर चर्चा तेज थी, खासकर जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह कहा कि चुनाव के बाद सीएम पर फैसला होगा. इस पर उपेंद्र कुशवाहा ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि नीतीश कुमार ही एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा हैं और चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जाएगा. उन्होंने अमित शाह के बयान को केवल एक 'प्रोटोकॉल स्टेटमेंट' करार दिया, कुशवाहा ने दोहराया कि इसमें किसी को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए कि चुनाव के बाद भी बिहार की कमान नीतीश कुमार के हाथों में ही रहेगी.

निशांत कुमार को राजनीति में आने का सुझाव

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अपने इंटरव्यू में उपेंद्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार का भी ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि निशांत को राजनीति में आना चाहिए. हालांकि निशांत कुमार अब तक राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं और अक्सर सुर्खियों से भी दूर रहते हैं. लेकिन कुशवाहा का यह बयान संकेत देता है कि जेडीयू के भीतर भी नई पीढ़ी को आगे लाने की मांग धीरे-धीरे जोर पकड़ रही है.

कांग्रेस बनाम एनडीए की तैयारी

बिहार विधानसभा चुनाव हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति में खास महत्व रखते हैं. राहुल गांधी की सक्रियता से कांग्रेस की भूमिका एक बार फिर चर्चा में है. वहीं एनडीए पूरी ताकत से मैदान में उतरने की तैयारी कर रहा है. उपेंद्र कुशवाहा जैसे सहयोगी नेताओं के बयान साफ कर रहे हैं कि एनडीए में फिलहाल किसी तरह का बड़ा मतभेद नहीं है और सभी दल मिलकर नीतीश कुमार को आगे करने के लिए सहमत हैं. लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस और आरजेडी गठबंधन इस बार मतदाताओं को लुभाने के लिए नए मुद्दे तलाश रहे हैं. वोटर लिस्ट रिवीजन और यात्रा जैसे कदम इसी रणनीति का हिस्सा हैं.

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क्यों अहम है कुशवाहा का बयान

उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली ओबीसी चेहरा माने जाते हैं. उनके बयानों का असर सीधा-सीधा एनडीए के वोट बैंक पर पड़ सकता है. यही वजह है कि उनके हर बयान को राजनीतिक नज़रिए से देखा जाता है. राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान भी इसी संदर्भ में अहम हो जाता है, क्योंकि यह कांग्रेस को अप्रत्याशित मजबूती देता दिखता है.

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बताते चलें कि कुल मिलाकर, बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है. एनडीए अपने गठबंधन और नेतृत्व को लेकर एकजुट दिख रहा है, वहीं विपक्ष मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों और यात्राओं के ज़रिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. इस बीच उपेंद्र कुशवाहा का बयान न केवल चर्चा का केंद्र बना बल्कि आने वाले समय में चुनावी समीकरणों पर इसका असर भी पड़ सकता है. ऐसे में बिहार की राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता. आज जो बात केवल बयान लग रही है, वही कल चुनावी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा बन सकती है. यही वजह है कि कुशवाहा के शब्दों को हल्के में नहीं लिया जा सकता.

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