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बिहार चुनाव: महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस और आरजेडी में तनातनी, पांच हारी हुई सीटों पर विवाद जारी

Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में एक महीने से कम समय बचा है, लेकिन महागठबंधन में कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट बंटवारे को लेकर विवाद जारी है. सहरसा, बायसी, बहादुरगंज, रानीगंज और कहलगांव विधानसभा सीटें मुख्य टकराव की वजह हैं. सहरसा पर आरजेडी का दावा है, जबकि कहलगांव, बायसी और बहादुरगंज पर कांग्रेस अड़ी हुई है.

Rahul-Tejashwi (File Photo)
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Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में अब एक महीने से भी कम समय बचा है. बावजूद इसके, राज्य की सियासत में हलचल लगातार बढ़ती जा रही है. एनडीए और महागठबंधन दोनों गठबंधन अपने-अपने उम्मीदवारों और सीट बंटवारे को लेकर बैठकें कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन पाई है. खास तौर पर महागठबंधन में कांग्रेस और आरजेडी के बीच कुछ सीटों पर विवाद फंसा हुआ है, जिससे सीट बंटवारे की प्रक्रिया धीमी हो गई है.

कौन-कौन सी सीटें बन आपसी टकराव का जड़

बिहार की राजनीति से जुड़े जानकारों के मुताबिक, महागठबंधन में सहरसा, बायसी, बहादुरगंज, रानीगंज और कहलगांव विधानसभा सीटें सबसे अधिक विवादित हैं. सहरसा सीट को पहले कांग्रेस के कोटे में देने की योजना थी और आईआईपी के आईपी गुप्ता को उम्मीदवार बनाने की चर्चा थी. लेकिन अब आरजेडी ने इस सीट पर दावा ठोक दिया है, जिससे मामला फंस गया है. वही कहलगांव पर कांग्रेस का दावा है कि यह सीट परंपरागत रूप से उनका गढ़ रही है और पिछली बार इसे कांग्रेस ने ही लड़ा था. इसके अलावा बायसी और बहादुरगंज में कांग्रेस का कहना है कि सीमांचल में पार्टी ने लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है और इन्हें मिलने वाली सीटें संगठन की मजबूती के लिए अहम हैं. लेकिन आरजेडी अपने तर्क के साथ इन सीटों पर दावा ठोक रही है. 

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पिछले चुनावों का रिकॉर्ड

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दरअसल, पिछली बार सहरसा, बायसी और रानीगंज सीटें आरजेडी ने लड़ीं, जबकि कहलगांव और बहादुरगंज कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में थे. लेकिन पांचों सीटें इस बार हारी हुई मानी जा रही हैं, इसी कारण महागठबंधन के दो बड़े दलों के बीच टकराव बना हुआ है. बायसी और बहादुरगंज पिछली बार ओवैसी की पार्टी ने जीती थीं, लेकिन बाद में ये विधायक आरजेडी में शामिल हो गए. रानीगंज सीट पिछली बार आरजेडी ने केवल सवा दो हजार मतों से गंवाई थी.

दोनों दलों में चल रही तनातनी

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कांग्रेस और आरजेडी दोनों इस विवादित सीटों से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं. लगातार हो रही बैठकें भी फिलहाल नतीजे पर नहीं पहुंच पाई हैं. इसी तरह तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित न करने का फैसला भी दोनों दलों के बीच आपसी मतभेद को दर्शाता है. कांग्रेस के पर्यवेक्षक और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत इसे रणनीति का हिस्सा बता रहे हैं. महागठबंधन के नेता उम्मीद कर रहे हैं कि देर आए दुरुस्त आए और चुनाव से पहले सबकुछ सही ढंग से तय हो जाए. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विवाद समय रहते सुलझ गया, तो महागठबंधन के लिए चुनावी रणभूमि में मजबूती मिलेगी, अन्यथा सीटों के बंटवारे में देरी गठबंधन के लिए चुनौती बन सकती है.

कब होगा मतदान?

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बताते चलें राज्य में विधानसभा चुनाव की तारीख का ऐलान बीते सोमवार को निर्वाचन आयोग ने किया था, आयोग की घोषणा के अनुसार, बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में वोटिंग होगी. पहले चरण में 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे. नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. चुनावी बिगुल बजने में अब सिर्फ़ एक महीने से भी कम का समय बचा है और राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है.

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