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Bihar Election Result: बंपर जनाधार, फिर नीतीशे कुमार… सुशासन, बेदाग छवि के साथ इन फैक्टर ने बना दिया ‘अजेय’

नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों में हर बार बिहार की राजनीति को अपने इर्द-गिर्द घुमाने में कामयाब रहे हैं. विपक्ष ने उन्हें पलटू राम कहा लेकिन नीतीश कुमार ने अपनी जमीन और वोट बैंक को हमेशा मज़बूत बनाए रखा.

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साल 2020 में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली JDU महज 43 सीटों पर सिमट गई थी. ऐसे में 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए अग्निपरीक्षा माना जा रहा था. दूसरी ओर वह लगातार विपक्ष के निशाने पर रहे. कभी उनकी उम्र को लेकर माहौल बनाया गया तो कभी दावा किया कि BJP उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाएगी, लेकिन नीतीश कुमार ने विरोधियों के तमाम दावों को धता बता दिया और बिहार में भारी जनाधार पाया. 

नीतीश कुमार पिछले 20 वर्षों में हर बार बिहार की राजनीति को अपने इर्द-गिर्द घुमाने में कामयाब रहे हैं. विपक्ष ने उन्हें पलटू राम कहा लेकिन नीतीश कुमार ने अपनी जमीन और वोट बैंक को हमेशा मज़बूत बनाए रखा. 

पूरे किए वादे, बुनियादी ढांचे में सुधार 

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नीतीश कुमार की इस स्थायी लोकप्रियता के पीछे बिहार का विकास और जनता से जुड़े मुद्दे हैं. माना जा रहा है नीतीश ने वादे पूरे किए थे इसीलिए जनता का भारी समर्थन मिला है. शहरों के साथ-साथ उन्होंने बुनियादी ढांचे में भी सुधार किया है. जिससे बिहार के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में सभी का विश्वास अर्जित हुआ है. ये ही वजह है कि बिहार में वोटर्स दिखावती बयानबाजी की बजाय प्रदेश के विकास का जिम्मेदार नीतीश कुमार को मानते हैं. 

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नीतीश कुमार के व्यावहारिक और समावेशी शासन-दृष्टिकोण ने लंबे समय से चली आ रही कमियों को पाट दिया है और उम्मीदों पर खरे उतरे. उनकी विकास केंद्रित राजनीति ने मतदाताओं के दिलों में जगह बनाई. सत्ता में बने हुए 20 साल हो गए फिर भी नीतीश कुमार की सुशासन की छवि बरकरार है. 

महिला स्कीम बनी गेमचेंजर 

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हमेशा से ही नीतीश कुमार के पक्ष में रहीं. घर में अगर पति-पत्नी वोटर हैं तो फर्क नहीं पड़ता पति का झुकाव किस ओर है. महिलाएं पोलिंग बूथ पर JDU को ही वोट देकर आएंगी. इसकी वजह नीतीश कुमार के कई फैसले हैं. जिसमें विधवाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए पेंशन, स्कूल नाइट गार्ड और पीटी शिक्षकों के वेतन को दोगुना करना और लगभग एक करोड़ महिलाओं को 10,000 रुपये की सहायता शामिल है. 

नीतीश को मिला मुस्लिम समुदाय का साथ!

नीतीश कुमार का जनाधार धर्म और जातिगत सीमाओं से परे है. लगभग-लगभग सभी समुदायों और जातियों का समर्थन नीतीश कुमार को मिला. जिसमें 10% हिंदू जनरल कैटेगरी की जातियां, 4% से ज्यादा कुशवाहा, 5% से ज्यादा पासवान, 3% से ज्यादा मुसहर और 2.6% मल्लाह वोट बैंक शामिल है. 

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इसी जनाधार ने नीतीश कुमार को दो दशकों से भी ज़्यादा समय तक सत्ता में बने रहने में मदद की है. बिहार में नीतीश कुमार की स्थायी लोकप्रियता वाकई उल्लेखनीय है, खासकर उनके दो दशकों से ज़्यादा के कार्यकाल को देखते हुए. 

नीतीश कुमार मुसलमानों समेत हाशिए पर मौजूद समुदायों तक पहुंचे. उन्होंने सामाजिक भेदभाव और कट्टरता को सिरे से नकारा. इसका नतीजा ये रहा कि मुस्लिमों का भी उन्हें साथ मिला. नीतीश के करिश्माई नेतृत्व का ही नतीजा है कि NDA ने 2025 में विधानसभा चुनावों में 90% जनाधार हासिल किया. बिहार की अग्निपरीक्षा में नीतीश ने एक बार फिर सफलता हासिल की.  

बिहार में मतदान ने तोड़े सारे रिकॉर्ड 

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गौरतलब है कि बिहार में पहली बार रिकॉर्ड मतदान किया गया. इस चुनाव में रिकॉर्ड 67.13% मतदान हुआ. विश्लेषक इसे सत्ता-विरोधी भावना के बजाय प्रतिस्पर्धात्मक उत्साह का परिणाम मान रहे हैं. नीतीश कुमार नवंबर 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं. 

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