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वैरागी से बाहुबली कैसे बन गए अनंत सिंह? भाई की हत्या ने बनाया अपराधी! जानें, ‘छोटे सरकार’ से जुड़े दिलचस्प किस्से
Bihar Election 2025: बाहुबली की छवि रखने वाले अनंत सिंह एक समय में वैरागी बनना चाहते थे लेकिन भाई के प्यार ने उन्हें अपराधी बना दिया. जानते हैं मोकामा के राजा अनंत सिंह की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से.
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आंखों पर काला चश्मा, बड़ी-बड़ी मूंछे, रौबदार पर्सनैलिटी, मगही भाषा और बोलने का लहजा ऐसा कि सोशल मीडिया वायरल कंटेट बन जाए. बात हो रही है बिहार के अनफिल्टर नेता उर्फ छोटे सरकार यानी अनंत सिंह की. बाहुबली की छवि रखने वाले अनंत सिंह एक समय में वैरागी बनना चाहते थे लेकिन भाई के प्यार ने उन्हें अपराधी बना दिया. जानते हैं मोकामा के राजा अनंत सिंह की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से.
बिहार चुनाव के लिए जोर-आजमाइश तेज हो गई है. चुनावी वादों से गलियां गुलजार हैं. राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी फिर अपना वर्चस्व स्थापित करने उतरे हैं. इन्हीं सूरमाओं में से एक हैं अनंत सिंह. मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह का आज भी इस क्षेत्र में डंका बजता है. जेल से लौटने के बाद से ही अनंत सिंह अपने अल्हड़ बयानों से सुर्खियों में रहते हैं.
वैरागी बनने चले अनंत सिंह पर कैसे लगा हत्यारे का टैग?
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अपने बेबाक और अल्हड़ बयानों को लेकर चर्चित अनंत सिंह के अपराधी अमित छाप भी साथ-साथ चली. साल 2020 के उनके चुनावी हलफनामे पर गौर करें तो उनके खिलाफ मर्डर के 7 केस, मर्डर की कोशिश के 11 केस और किडनैपिंग के 4 मामलों समेत कुल 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं. हालांकि अभी वह इन सब मामलों में बरी हो चुके हैं.
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राजनीति में आने से पहले अनंत सिंह के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब वह सब कुछ त्यागकर वैराग्य अपनाने वाले थे. इस खोज में उन्होंने कभी अयोध्या का रुख किया तो कभी हरिद्वार गए. हालांकि यहां भी साधुओं के साथ झगड़ा हो गया. इसी बीच अनंत सिंह के बड़े भाई बिरंची की हत्या हो गई. अनंत अपने भाइयों से बेहद प्यार करते थे. बिरंची की हत्या ने उन्हें तोड़ दिया. इसके बाद उनका एक ही मकसद था भाई की मौत का बदला.
अनंत सिंह ने कैसे लिया भाई की मौत का बदला?
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अनंत सिंह किसी भी कीमत पर भाई के हत्यारे को मारना चाहते थे. एक दिन उन्हें पता चला कि हत्यारा किसी नदी के पास बैठा है. फिर क्या था अनंत सिंह ने तैरकर नदी पार की और ईंट पत्थरों से कुचलकर हत्यारे को मौत के घाट उतार दिया. इस प्रकरण के बाद इलाके में उनका खौफ कायम हो गया.
हालांकि इससे पहले अनंत सिंह के भाई दिलीप सिंह की भी दबंग छवि थी. उन पर बूथ लूटने जैसे आरोप लगते थे. दिलीप सिंह लालू यादव के संपर्क में आए और फिर उन्हें RJD से टिकट मिला. भाई दिलीप सिंह से ही अनंत सिंह ने दबंगई और सियासत की बारीकियां सिखीं.
दबंग छवि से कैसे बने जनता के फेवरेट?
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एक तरफ बाहुबल तो दूसरी ओर धनबल. अनंत सिंह दबंगई के साथ-साथ माननीय भी बनते जा रहे थे. वह लोगों के बीच भूमिहारों के सेवक और रक्षक के रूप में उभरने लगे थे. धीरे-धीरें उनकी छवि रॉबिनहुड वाली बनने लगी. लोगों को कपड़े बांटना, हिंदू त्यौहारों में मिठाई बांटना तो रमजान में इफ्तार करवाने जैसे सामाजिक कार्य भी बढ़-चढ़कर करवाए. लोगों के बीच उनकी छवि सामाजिक नेता की बनने लगी. अनंत सिंह की इसी छवि का फायदा नीतीश कुमार ने उठाया और उनके जरिए जातिगत समीकरण साधे.
लोकसभा में अनंत सिंह ने लगाई नीतीश की नैया पार
साल 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव और नीतीश कुमार की राहें अलग होने लगीं. लालू से अलग होने के बाद 1996 में नीतीश को जातिगत समीकरण खतरे में पड़ने की चिंता सताने लगी. ऐसे में अनंत सिंह की लोकप्रियता उनके काफी काम आई. 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में अनंत सिंह, नीतीश कुमार के लिए गेमचेंजर साबित हुए. इसके बाद साल 2005 विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह ने JDU से विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की.
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अल्हड़ और बेबाक बयानों से रहते हैं वायरल
मौजूदा वक्त में उनकी पत्नी नीलम देवी मोकामा से विधायक हैं लेकिन इस बार इस सीट पर वह खुद वापसी करेंगे. हाल ही में उन्होंने नीलम देवी की फिर से दावेदारी को सिरे से नकार दिया था. उन्होंने एक न्यूज चैनल से बातचीत में पत्नी पर चुटिले अंदाज में तंज कसा. अनंत सिंह ने साफ कहा, पत्नी ने अच्छा काम नहीं किया उन्होंने जनता से मेल-जोल नहीं रखा. एक सवाल के जवाब में अनंत सिंह ने कहा, पत्नी रहे खचरी तो उसको क्या सुधा कहें. ये बोलते हुए अनंत सिंह के मन में कोई हिचकिचाहट नहीं थी.अनंत सिंह का ये अंदाज लोगों को काफी पसंद भी आता है.
बेटों को तैयार कर रहे अनंत सिंह
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माना जा रहा है इस बार अनंत सिंह अपने बेटों को टिकट दिलवा सकते हैं. इसके लिए उन्होंने बेटों को राजनीति की बारीकियां सिखाना भी शुरू कर दिया. अनंत सिंह का बेटे को घुड़सवारी सिखाने का वीडियो चर्चा का विषय बना था. इसे बेटे की लॉन्चिंग से जोड़कर देखा जा रहा है.
अनंत सिंह खुद भी पशुओं से काफी लगाव रखते हैं. एक बार तो वह बग्गी लेकर विधानसभा पहुंच गए थे. घोड़े से उनके लगाव के किस्से दूर-दूर तक चर्चित रहे हैं. कहा जाता है वह अपने फेवरेट घोड़े को गाय का दूध पिलाते हैं. उन्होंने लालू यादव का घोड़ा भी खरीदा था. हालांकि यह घोड़ा उन्होंने खुद न खरीदकर किसी और को लाने भेजा.
महिला को न्याय दिलाने के लिए करवाई किडनैपिंग
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2005 और 2010 में जीत के बाद 2015 में उनका टिकट कट गया. उस वक्त JDU-RJD दोनों गठबंधन में थे, लेकिन अनंत सिंह निर्दलीय मैदान में उतरे और जीत हासिल की. इसी समय बाढ़ बाजार इलाके में चार लड़कों पर महिला के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगे. आरोप है कि महिला को न्याय दिलाने के लिए अनंत सिंह ने इन लड़कों को किडनैप करवा लिया. इनमें से एक युवक का शव अगले दिन जंगल में मिला. इसके बाद पकड़े गए बाकी 3 लड़को को पुलिस ने छोड़ दिया. इन लड़कों ने पुलिस को बताया था कि, विधायक ने ही इनके अपहरण का आदेश दिया था. इसके बाद जून 2015 में अनंत को उनके सरकारी आवास से अरेस्ट कर लिया गया.
UAPA के बाद विधायकी रद्द
साल 2019 में अनंत सिंह की विधायकी रद्द हो गई. उन पर घर में हथियार रखने के आरोप लगे. उनके घर से एक AK-47, दो हैंड ग्रेनेड के साथ मैगजीन बरामद हुए. फिर UAPA के तहत उनको अरेस्ट किया गया और 10 साल की सजा सुनाई गई. इसके बाद साल 2022 में अनंत सिंह की पत्नी नीलम ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. इस बार खुद अनंत सिंह अपना राजनीतिक वर्चस्व हासिल करने मैदान में उतरेंगे.
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अनंत सिंह अपनी सबसे बड़ी ताकत जनता को मानते हैं इसी के सहारे वह लगातार JDU के बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं. NDA भी उनके कद से भलि-भांति वाकिफ है ऐसे में ललन सिंह, अशोक चौधरी और CM नीतीश कुमार भी उनसे मुलाकात कर रहे हैं. अब देखना होगा एक ब्रेक के बाद क्या अनंत सिंह मोकामा की जनता पर फिर अपना करिश्माई प्रभाव डालने में कामयाब हो पाएंगे.